ऐसे थे भारत यायावर…

“जानते हैं रतन जी, रेणु पर काम करने का मतलब है— रेणु के साथ-साथ चलना, रेणु को आत्मसात कर  खुद में ही रेणु हो जाना…. ” सच कहूं, तो उन दिनों अपने प्रियवर मित्र, प्रेरणास्रोत और महज़ एक साहित्यकार नहीं, बल्कि अपने-आप में एक साहित्यिक संस्था भारत यायावर की ऐसी दार्शनिक बातों को मैं बहुत … Continue reading ऐसे थे भारत यायावर…