Lagatar Desk : हर साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है. इस दिन विशेष रूप से भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर के साथ-साथ सभी प्रकार के औजारों (टूल्स), मशीनों, कारखानों के उपकरणों, दुकानों, और वाहनों (गाड़ियों) की पूजा की जाती है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था. मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में सफलता, उन्नति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
17 सितंबर को मनाई जाएगी विश्वकर्मा पूजा
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ मशीनों, औजारों और कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की भी पूजा की जाएगी. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक बताया गया है. वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा.
विश्वकर्मा पूजा की विधि
विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल और कार्यस्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें. एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए प्रतिमा का गंगाजल से अभिषेक करें और घी का दीपक जलाएं. पूजा में रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें. इसके बाद कार्यस्थल पर मौजूद मशीनों, औजारों और अन्य उपकरणों पर रोली, अक्षत और फूल चढ़ाकर उनकी पूजा करें. अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और सुख-समृद्धि व कार्यक्षेत्र में सफलता की कामना करें.
विश्वकर्मा पूजा की सामग्री
पूजा के लिए भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा, लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, कलश, जनेऊ, हल्दी, रोली, अक्षत, सुपारी, मौली, लौंग, कपूर, देसी घी, फल, मिठाई, इत्र और शहद आदि सामग्री रखी जा सकती है. मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान विश्वकर्मा की आराधना करने और अपने कार्यस्थल व उपकरणों की पूजा करने से कार्य में सफलता और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.