Search

 
 
 

पहली बार : सदर अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक वेंट्रल हर्निया की सर्जरी

 
Ranchi : सदर अस्पताल ने एक और उपलब्धि अपने नाम की है. नए मॉड्यूलर ओटी शुरू होते ही लेप्रोस्कोपित विधि से डेढ़ और ढाई सेमी के तीन पत्थर निकाले गए थे. जबकि शुक्रवार को झारखंड के जिला अस्पताल में पहली बार लेप्रोस्कोपिक वेंट्रल हर्निया की सर्जरी की गई. सर्जन डॉ. अजित कुमार ने बताया कि अस्पताल के मॉड्यूलर ओटी में सिविल सर्जन के मार्गदर्शन में एक अंबिलिकल हर्निया के मरीज का दूरबीन विधि के द्वारा आईपोम प्लस ऑपरेशन किया गया. यह एक एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी मानी जाती है.

 लेप्रोस्कोपिक विधि से जटिल मानी जाती है सर्जरी

इस सर्जरी में छोटे-छोटे तीन पोर्ट की मदद से दूरबीन विधि के द्वारा पेट के अंदर से छेद को पहले बंद किया जाता है, उसके बाद पेट के अंदर से ही उस बंद छेद के ऊपर कम्पोजिट मेस (जाली) लगाया जाता है. इस तरह से पेट के छेद को दो स्तर पर बंद किया जाता है, जिससे मजबूती काफी बढ़ जाती है. साथ ही दोबारा हर्निया होने का खतरा ओपन विधि की तुलना में काफी कम होता है. डॉ. अजित ने बताया कि मरीज जब भी छींकती थी, नाभी में एक छेद से हवा बाहर आने लगता था. और नाभी फूलने लगता था. ऑपरेशन कर डॉक्टरों की टीम ने पहले नाभी के छेद को पेट के अंदर से बंद किया. फिर बंद किए छेद में अंदर से ही जाली लगाकर उसे फिक्स कर दिया. लेप्रोस्कोपिक विधि से यह सर्जरी काफी जटिल मानी जाती है.

टीम में ये हुए शामिल

सर्जरी टीम में सर्जन डॉ. अजीत कुमार, एनस्थेटिस्ट डॉ. दीपक कुमार, डॉ विकास, सिस्टर सविता, सरिता, पूनम, ओटी असिस्टेंट सुशील, नीरज, मुकेश, मोहित, माधव व अन्य शामिल थे. इसे भी पढ़ें – दाहू">https://lagatar.in/police-deliberately-not-arresting-dahu-yadav-babulal/">दाहू

यादव को पुलिस जान-बूझकर नहीं कर रही गिरफ्तार : बाबूलाल
[wpse_comments_template]
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही