लेप्रोस्कोपिक विधि से जटिल मानी जाती है सर्जरी
इस सर्जरी में छोटे-छोटे तीन पोर्ट की मदद से दूरबीन विधि के द्वारा पेट के अंदर से छेद को पहले बंद किया जाता है, उसके बाद पेट के अंदर से ही उस बंद छेद के ऊपर कम्पोजिट मेस (जाली) लगाया जाता है. इस तरह से पेट के छेद को दो स्तर पर बंद किया जाता है, जिससे मजबूती काफी बढ़ जाती है. साथ ही दोबारा हर्निया होने का खतरा ओपन विधि की तुलना में काफी कम होता है. डॉ. अजित ने बताया कि मरीज जब भी छींकती थी, नाभी में एक छेद से हवा बाहर आने लगता था. और नाभी फूलने लगता था. ऑपरेशन कर डॉक्टरों की टीम ने पहले नाभी के छेद को पेट के अंदर से बंद किया. फिर बंद किए छेद में अंदर से ही जाली लगाकर उसे फिक्स कर दिया. लेप्रोस्कोपिक विधि से यह सर्जरी काफी जटिल मानी जाती है.टीम में ये हुए शामिल
सर्जरी टीम में सर्जन डॉ. अजीत कुमार, एनस्थेटिस्ट डॉ. दीपक कुमार, डॉ विकास, सिस्टर सविता, सरिता, पूनम, ओटी असिस्टेंट सुशील, नीरज, मुकेश, मोहित, माधव व अन्य शामिल थे. इसे भी पढ़ें – दाहू">https://lagatar.in/police-deliberately-not-arresting-dahu-yadav-babulal/">दाहूयादव को पुलिस जान-बूझकर नहीं कर रही गिरफ्तार : बाबूलाल [wpse_comments_template]

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