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आखिर "स्कूल के रस्ते, मर जायेंगे हंसते-हंसते" जैसी शहादत भी मायने रखती है

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  [caption id="attachment_287871" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/vinay-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> Vinay Bharat[/caption] बिहार में स्कूल Timing : सुबह 6:30 बजे से 11:30 बजे तक.  तेलंगाना में स्कूल Timing : सुबह 8 से 11.30 बजे तक. आंध्र प्रदेश में Timming: सुबह 7.30 बजे से सुबह 11.30 बजे तक. उत्तर प्रदेश में Timming : 8वीं कक्षा तक के स्कूल सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक. छत्तीसगढ़ में Timming: 7:30 बजे से 11:30 बजे तक. …… और झारखंड में क्या स्थिति है. तो जान लीजिये झारखंड में सुबह 7.30 से दोपहर 1.45 बजे तक सरकारी और गैर सराकारी स्कूल खुले हैं. प्राईवेट स्कूलों में तो पंखे भी लगे होते हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों के हाल तो आप सब जानते ही हैं. यह स्थिति तब है जब झारखंड में भी उतनी ही गर्मी पड़ रही है, जितनी कि दूसरे राज्यों में. यहां भी कुछ शहरों का तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया है. रांची का तापमान 40 डिग्री पार कर रहा है. जमशेदपुर, धनबाद व पलामू की स्थिति सबसे खराब है. इस स्थिति में अगर कोई बच्चा लू से बीमार होता है या मर जाता है, तो इसमें बच्चों का कोई दोष नहीं. आप कह सकते हैं : आखिर "स्कूल के रस्ते, मर जायेंगे हंसते-हंसते" जैसी शहादत भी तो मायने रखती हैं. सरकार और जिला प्रशासन की किसी तरह की जिम्मेदारी की बात करनी ही बेमानी है. झारखंड के अधिकांश जिलों के डीसी इन सब चीजों से उपर उठ चुके हैं. ऐसी छोटी बातों को लेकर सोचने का वक्त उनके पास है ही नहीं. गर्मी कितनी है, यह तो उन्हें पता भी नहीं चलता. गाड़ी, ऑफिस, घर सब जगह एयर कंडीशन. वह भी सरकारी खर्चे से. गौर करेंगे तो पायेंगे ऐसे मामलों में फैसला जिलों के डीसी ही लेते हैं. आदेश भी वही जारी करते हैं. तो सवाल यह उठता है कि फिर दोष किसका है? दोष है तो बस उनके गूंगे शिक्षकों का, छोटे-छोटे बच्चों के गूंगे अभिभावकों का, जो इसके खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोलते. वे देखते होंगे न मासूमों को नंगे पैर कोयले की ताव पर चलते हुए ! याद रखिये, मंत्री और अफसर के सामने जो "जी सर" बोले, वो शिक्षक हो ही नहीं सकता. डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं

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