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पड़ताल : नर्सिंग होम संचालकों ने लगा लिया अग्निशमन यंत्र, अब अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए लगा रहे चक्कर

अग्निशमन विभाग की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे नर्सिंग होम के संचालक नगर निगम से प्रत्येक दिन सर्टिफिकेट और यंत्र लगाने का दिया जा रहा निर्देश Pramod Upadhyay Hazaribagh : न जांच की गई और न अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया जा रहा है. यह मामला जुड़ा है नर्सिंग होमों में अग्निशमन यंत्र लगाने और अनापत्ति प्रमाण पत्र पाने का. विडंबना यह है कि विभिन्न नर्सिंग होमों में अग्निशमन यंत्र लग चुके हैं. संचालक अग्निशमन विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इधर नर्सिंग होम के संचालक इसलिए परेशान हैं कि नगर निगम की ओर से लगातार सर्टिफिकेट और अग्निशमन यंत्र दिखाने का निर्देश दिया जा रहा है. दोनों में से एक चीज की कमी पर कार्रवाई करने की बात कही जा रही है. इसे भी पढ़ें : होली">https://lagatar.in/hooliganism-will-have-to-be-heavy-in-holi-deployment-about-5000-additional-forces-across-jharkhand/">होली

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70 से 80 हजार रुपए तक कर चुके हैं खर्च

कई नर्सिंग होम के संचालकों ने बताया कि आवेदन ऑनलाइन करने के साथ ही अग्निशमन यंत्र का सिस्टम भी बैठा चुके हैं. इसमें लगभग 70 से 80 हजार रुपए की लागत भी लगा चुके हैं. यह यंत्र अग्निशमन विभाग के दिशा-निर्देश पर लगाया जाना था. लेकिन अब तक विभाग की ओर से न जांच की गई और न लाइसेंस दिया जा रहा. अब ऑनलाइन किए हुए आवेदन की तिथि भी समाप्त हो गई. इसके साथ ही लाइसेंस मिलने की अवधि भी खत्म हो गई. जब ऑफलाइन से लाइसेंस लेने के लिए जा रहे हैं, तो मोटी रकम की डिमांड की जा रही है. ऐसे में इतने पैसे कहां से लाएं. ऊपर से नगर निगम से जल्द लाइसेंस लेने का दबाव भी है. अब ऑनलाइन आवेदन करते हैं, तो कम-से-कम एक से डेढ़ माह की अवधि लगेगी. नगर निगम से इतनी मोहलत नहीं दी गई है. ऐसे में हम नर्सिंग होम के संचालक क्या करें.

जांच से बचना चाहते हैं नर्सिंग होम के संचालक : अग्निशमन पदाधिकारी

इस संबंध में डिस्ट्रिक्ट फायर ऑफिसर राम.एस. सिंह ने बताया कि निजी अस्पताल के संचालक अग्नि सामग्री यंत्र की जांच बंद करवाना चाहते हैं. वह लाइसेंस लेना नहीं चाहते हैं. अग्निशमन कार्यालय से ऐसी कोई भी जांच नहीं की जा रही है, यह डीडीसी सह नगर आयुक्त के माध्यम से जांच करवाई जा रही है. अग्निशमन कार्यालय में नोटिस निकाल दिया गया है. ऑफलाइन नहीं, बल्कि ऑनलाइन आवेदन करें और सारी प्रक्रिया होने के बाद लाइसेंस प्राप्त हो जाएंगे. हजारीबाग में अब तक करीबन 30 से 35 नर्सिंग होमों को रीन्यूअल समेत एनओसी दिया गया है. इस 15 संचालकों ने ऑनलाइन आवेदन किया है. इसकी जांच के बाद एनओसी दिया जाएगा. नर्सिंग होम के संचालक ऑफलाइन आवेदन करने आते हैं. इस स्थिति में क्या वह अपनी नौकरी दांव पर लगा दें. मोटी रकम लेने की बात बिल्कुल निराधार है. उन्होंने यह भी कहा कि अग्निशमन कार्यालय से एडवाइजरी लेने की सलाह दी जाती है. बिल्डिंग के हिसाब से यंत्र की लागत लगती है, जो भी ऑनलाइन आवेदन किए थे, वह आधा-अधूरा था. इसके लिए उन्हें लाइसेंस नहीं दिया गया. वर्ष 2017 के अक्टूबर माह से ऑफलाइन बंद हो चुका है. इसे भी पढ़ें : सीएम">https://lagatar.in/cms-principal-secretary-rajeev-arun-ekka-accused-of-going-to-vishal-chowdharys-house-to-settle-the-file-bjp-released-video/">सीएम

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