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लेखा-जोखाः जून में BJP के 30 बड़े बयान, पढ़िए- दीपक प्रकाश, बाबूलाल और रघुवर ने क्या-क्या कहा

Ranchi: जून महीने में मांडर उपचुनाव को लेकर झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी रही. बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत उपचुनाव में झोंक दी. पूजा सिंघल प्रकरण और मुख्यमंत्री से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी बीजेपी मुखर रही. रांची में हुई हिंसा को लेकर भी सरकार बीजेपी के निशाने पर रही. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति के कारण यह स्थिति पैदा हुई. जून महीने के 30 दिन में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास के दिये 30 बयानों को पढ़िये.

दीपक प्रकाश ने जून में क्या-क्या कहा

26 जून- कांग्रेस का इतिहास लोकतंत्र विरोधी रहा है. इंदिरा गांधी के शासनकाल में सत्ता के लिए लोकतंत्र की हत्या की गई 23 जून- खुद को आदिवासी हितैषी कहने वाले जेएमएम को राजनीति से परे हटकर द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करना चाहिए. 20 जून- मांडर विधानसभा की जनता ने कांग्रेस के खूनी पंजे को अच्छे से पहचान लिया है. 19 जून- मरणासन्न अवस्था में पड़ी कांग्रेस के दरबारियों द्वारा प्रधानमंत्री पर की गयी टिप्पणी उनकी और कांग्रेस की घटिया सोच को प्रदर्शित करता है. 18 जून- आदिवासी हित की बात करने वाले बंधु तिर्की आदिवासी समाज को न्याय दिलाने के समय राज्य सरकार के एजेंट बनकर समझौता करवाते हैं. 16 जून- भ्रष्टाचार का खेल चलता रहे इसलिए बंधु तिर्की मांडर से बेटी को चुनाव लड़वा रहे. 15 जून- राज्य सरकार के मुखिया और उनका पूरा परिवार भ्रष्टाचार में डूबा है. सरकार की नीति और नीयत दोनों में खोट है. 14 जून- कांग्रेस लोकतंत्र पर विश्वास नहीं करती. जिसके कारण आज ईडी दफ्तर का दौड़ लगाना पड़ रहा है. 12 जून- रांची में हुई हिंसक वारदात, तोड़फोड़ और राज्य सरकार की विफलता है. खुफिया तंत्र पूरी तरह से विफल रहा है. 7 जून- जेएमएम-कांग्रेस के नेताओं को "मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट" की भी सही जानकारी नहीं है और राजनीति कर रहे हैं. या तो पढ़ें या बेतुके बयान न दें.

बाबूलाल मरांडी के जून महीने में दिये गये बयान

29 जून- अब तो आदिवासियों की जमीन भी CM HOUSE का धौंस दिखाकर दूसरों से कब्ज़ा करवाया जा रहा है. 28 जून- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सिर्फ अपना चेहरा चमकाने के लिये क़रीब दो सौ करोड़ खर्च कर दिये, वह भी कोरोना जैसे संकट की घड़ी में. 27 जून- मुख्यमंत्री अपने घोटालों की जांच रोकने के लिए गरीबों की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये महंगे वकीलों पर खर्च कर रहे हैं. 24 जून- लोकतंत्र में जनादेश और राज्य सत्ता में बहुमत का मतलब लूटपाट कर खुद, परिवार और बंधु-बांधवों के लिए अकूत सम्पत्ति अर्जित करने का लाइसेंस नहीं होता है. 23 जून- झारखंड में जंगल राज का आलम यह है कि जज, न्यायालय परिसर से लेकर गवाह तक सुरक्षित नहीं हैं. हालत ये है कि देवघर कोर्ट परिसर में हत्या के मामले हाईकोर्ट को संज्ञान लेना पड़ रहा है. 22 जून- ऊर्जा विभाग भी अन्य विभागों की तरह सिर्फ लूट का अड्डा बन गया है. मैंने 27 अप्रैल को पत्र लिखा है, याद न हो तो मुख्यमंत्री पत्र मंगाकर देख लें. 20 जून- सुबोधकांत सहाय राजनीतिक व्यवहार तो सही रख लेते. क्या गांधी परिवार में आपको हिटलर नजर नहीं आया, जिसने राजनीति में आपको ठिकाने लगा रखा है. 17 जून- मुख्यमंत्री को स्लोगन गढ़ने में महारत हासिल है. तभी तो वे सपरिवार दौलत इकट्ठा कर रहे हैं और झारखंडी बेरोजगारों को टेम्पो-ट्रक चलाने की शिक्षा दे रहे हैं. 15 जून- रांची पुलिस के द्वारा शहर में लगाए गए उपद्रवियों के पोस्टर चंद घंटों में JMM के दबाव में उतार लिए गए. जाहिर है कि सत्ता में बैठे लोग अभी जोड़-घटाव में जुटे हैं. 10 जून- झारखंड सरकार ने पिछले एक महीने से पूरे सूचना तंत्र को ED कार्यालय और उन विरोधियों के चारों तरफ देश भर में लगा रखा है, जो सरकारी पाप की जड़ तक पहुंचने की सूचनाएं जांच एजेंसियों को दे रहे हैं. 6 जून- रांची के उपायुक्त छवि रंजन चार्जशीटेड अभियुक्त हैं. इनपर हाईकोर्ट ने भी प्रतिकूल टिप्पणी की है. ऐसे दागी व्यक्ति के नेतृत्व में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद नहीं है. 5 जून- आज जिन लोगों की सरकार है, वो बात तो आदिवासियों की करते हैं लेकिन उन्हें घर के बाहर आदिवासी नहीं दिखते. खुद के नाम से खदानें लेते हैं,पत्नी के नाम से जमीन लेते हैं. 3 जून- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध है कि बेलगाम शराब माफिया की लूट पर लगाम लगाएं. वरना वह दिन दूर नहीं जब शराब घोटाला भी इसके लाभार्थी समूह के लिये एक और परेशानी का कारण बन जाएगा.

रघुवर दास के जून महीने का बयान

25 जून- आज लोकतंत्र की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि कांग्रेस या किसी दल का कोई नेता आपातकाल जैसी परिस्थिति फिर से पैदा करने का साहस नहीं करेगा. 22 जून- कांग्रेस हमेशा से आदिवासी समाज को पिछड़ा बनाए रखना चाहती है. देश के सर्वोच्च पद पर पहली बार जनजातीय समाज का प्रतिनिधि आसीन होने जा रहा है. यह कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं हो रहा है. 21 जून- मैं विपक्ष के सभी दलों से आग्रह करता हूं कि द्रौपदी मुर्मू को समर्थन प्रदान कर सर्वसम्मति से राष्ट्रपति बनाएं. यशवंत सिन्हा से आग्रह है कि वह भी द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में अपना नाम वापस लेकर एक मिशाल पेश करें. 20 जून- सरकार को तुष्टीकरण की राजनीति करनी है इसलिए सरकारी स्कूलों और उनके बच्चों के पोशाकों का रंग हरा करने पर ध्यान दे रही है. सरकार अप्रत्यक्ष रूप से सभी स्कूलों को मदरसे के रंग में रंग देना चाहती है. 19 जून- हेमंत सोरेन की सरकार नारे और झूठे वादों की सरकार है. पिछले ढाई साल में झामुमो-कांग्रेस-राजद के नापाक और स्वार्थपूर्ण गठबंधन ने केवल और केवल लोगों को धोखा दिया है. 17 जून- घोषणावीर व्यक्ति (हेमंत सोरेन) को उपदेश शोभा नहीं देता. एक साल में पांच लाख नौकरी का वादा कर लोगों का रोजगार छिननेवाले और बेरोजगारी भत्ता देने का झूठा वादा करने वाले आज युवाओं के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं. 12 जून- रांची की हिंसक घटना तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति का परिणाम है. असामाजिक तत्वों का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है. हेमंत सरकार उनके सामने बेबस हैं. [wpse_comments_template]

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