Chakulia : चाकुलिया प्रखंड की माटियाबांधी पंचायत में पहाड़ और साल जंगलों से घिरे घाघरा गांव स्थित घाघ झरना प्रकृति का अनूठा उपहार है और विगत कई दिनों हुई बारिश के बाद अनुपम छटा बिखेर रहा है. लगभग 30 फुट की ऊंचाई से कल - कल की आवाज करता झरना का दूधिया पानी हर किसी को आकर्षित करता है. खूबसूरत और हसीन वादियों के बीच स्थित यह झरना पर्यटकों की नजरों से ओझल है और पर्यटन के मानचित्र से गायब है. यहां के ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटन स्थल के रूप में इसका विकास हो तो पश्चिम बंगाल सीमा से सटे इस इलाके की तस्वीर और तकदीर बदल सकती है. इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-the-turbulent-situation-of-ayushman-scheme-in-the-district-lakhs-of-nursing-home-dues/">गिरिडीह
: जिले में आयुष्मान योजना की डांवाडोल स्थिति, नर्सिंग होम के लाखों बकाए
: स्वच्छता के लिए नामित विद्यालयों का केंद्रीय टीम करेगी भौतिक सत्यापन
: पूर्वी सिंहभूम जिले में चौकीदार के 284 पदों पर निकली बहाली, 30 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन
: जिले में आयुष्मान योजना की डांवाडोल स्थिति, नर्सिंग होम के लाखों बकाए
घाघ झरना की पानी से प्यास बुझाते थे 125 परिवार
वहीं झरना के पानी से सैकड़ों एकड़ खेत में सिंचाई कर किसान लाभान्वित हो सकते हैं. परंतु विडंबना यह है कि झरने की पानी का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है. आज से चार साल पहले तक घाघरा गांव के 125 परिवार घाघ झरना के पानी से ही अपनी प्यास बुझाते थे. आज भी बिजली नहीं रहने पर लोग इसी झरना के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं. जानकारी हो कि तीन राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र पहाड़ और घने जंगलों से घिरा प्रमुख धार्मिक स्थल गोटाशिला पहाड़ इस झरना से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर है. गोटाशिला मंदिर होते हुए और घाघरा होते हुए सड़क पश्चिम बंगाल तक जाती है. लिहाजा यह क्षेत्र एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है. यहां आने के लिए धालभूमगढ़ और चाकुलिया से पक्की सड़क है. इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-central-will-do-physical-verification-of-schools-designated-for-cleanliness/">चाईबासा: स्वच्छता के लिए नामित विद्यालयों का केंद्रीय टीम करेगी भौतिक सत्यापन
2017 तक यह इलाका नक्सल प्रभावित माना जाता था
अगर क्षेत्र का विकास पर्यटन स्थल के रूप में हुआ तो क्षेत्र का विकास होगा. सरकार को राजस्व मिलेगा और ग्रामीणों को रोजगार भी प्राप्त होगा. झरना के पानी का प्रयोग सिंचाई के रूप में करने की व्यवस्था हो तो क्षेत्र की कृषि को फायदा मिलेगा और किसान खुशहाल होंगे. परंतु विडंबना है कि इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हुई है. वर्ष 2017 तक यह इलाका घोर नक्सल प्रभावित था. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-restoration-for-284-posts-of-watchmen-in-east-singhbhum-district-can-apply-till-30-september/">जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में चौकीदार के 284 पदों पर निकली बहाली, 30 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

Leave a Comment