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कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट अंडर ग्रेजुएट अब तीन पालियों में होगा : यूजीसी चेयरमैन

New Delhi : कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट अंडर ग्रेजुएट (CUET UG) अब दो नहीं तीन पालियों में आयोजित होगा. यूजीसी ने पिछले वर्ष मार्च में घोषणा की थी कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रवेश एक सामान्य प्रवेश परीक्षा के माध्यम से आयोजित किया जाएगा. यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि जेईई और एनईईटी जैसी महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं के साथ इसके विलय की योजना कम से कम दो साल पहले घोषित की जाएगी. बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं कि सीयूईटी-यूजी का दूसरा संस्करण गड़बड़ मुक्त हो.

सीयूईटी केंद्रों की पहचान तीन श्रेणियों में

कुमार ने बताया कि सीयूईटी केंद्रों की पहचान तीन श्रेणियों में की गई है. उन्होंने कहा, हमने केंद्रों को तीन श्रेणियों ए, बी और सी में वर्गीकृत किया है. कुछ केंद्रों में जिनमें हमें पिछले साल समस्या आई थी, उन्हें ‘सी’ श्रेणी में रखा गया है और उन्हें इस बार केंद्र के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा, बी श्रेणी में उन केंद्रों को रखा गया है, जहां पर कुछ काम करने की जरूरत है, जबकि ‘ए’ श्रेणी के तहत वे केंद्र हैं जो मानकों पर एकदम खरा उतरते हैं.

केवल एग्जाम को लेकर चिंता करें छात्र

उन्होंने कहा कि पिछली बार परीक्षा के दौरान कई गड़बड़ियां हुई थीं, लेकिन इस वर्ष सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया है. छात्रों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई गई है. इसके अलावा हम यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं कि परीक्षा के दौरान कोई गड़बड़ नहीं होगी. छात्र केवल अपनी परीक्षा को लेकर चिंता करें.

13 भाषाओं में होगी परीक्षा

​इस बार अंडर ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी टेस्ट का आयोजन 21 से 31 मई 2023 के मध्य होगा. CUET UG 13 भाषाओं- असमिया, बांग्ला, अंग्रेजी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू में आयोजित किया जाएगा. NTA ने देश में करीब 1,000 परीक्षा केंद्रों की पहचान की है, जिनमें से प्रत्येक दिन 450-500 परीक्षा केंद्रों का उपयोग परीक्षा के लिए किया जाएगा.

विद्यार्थियों पर से बोझ कम करना चाहिए

उन्होंने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा करा विद्यार्थियों पर से बोझ कम करना चाहिए. हमने विचार सामने रखा है ताकि विद्यार्थी मानसिक रूप से तैयार रहें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने ऐसी चीजें प्रस्तावित की हैं और आने वाले दिनों में इनके लागू होने की संभावना है. हम आंतरिक तौर पर काम कर रहे हैं कि कैसे इसे आगे ले जाया जाए.
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