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घुसपैठ के खिलाफ लड़ी जाएगी निर्णायक लड़ाई, लागू होगा एनआरसी - बाबूलाल मरांडी

 
Ranchi: बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही घुसपैठ के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी. एनआरसी लागू कर बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित किया जाएगा. इसके बाद उन्हें चुन-चुनकर राज्य की सीमा से बाहर किया जाएगा. झारखंड में आदिवासी समाज के अस्तित्व को बचाने और घुसपैठ पर नकेल कसने के लिए एनआरसी लागू करना बेहद जरूरी है. जिस प्रकार से झामुमो और कांग्रेस के संरक्षण में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देकर उनके अवैध दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, ये भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है. इसे भी पढ़ें -मद्रास">https://lagatar.in/important-decision-of-madras-high-court-shariat-council-is-not-a-court-cannot-issue-divorce-certificate/">मद्रास

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बाबूलाल लाल ने बताए आंकड़े

संथाल परगना के साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, गोड्डा व जामताड़ा समेत 6 जिलों से 16% जनजातीय समुदाय के लोग घटे हैं. जबकि मुस्लिमों की आबादी में 13% की वृद्धि हुई है. संथाल परगना के दो जिले साहिबगंज और पाकुड़ में तो मुस्लिमों की संख्या 35% बढ़ी है. 1951 की जनगणना के अनुसार, झारखंड में जनजातीय समुदाय की आबादी 36% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% हो गई है. वहीं मुसलमानों की आबादी 9% से बढ़कर लगभग 14.5% तक जा पहुंची है. इसी दरम्यान हिंदुओं की आबादी भी लगभग 7% घटकर 88% से 81% पर पहुंच गई है.

घुसपैठ का असर राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी

झारखंड में आदिवासियों की घटती आबादी का बुरा असर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी और सरकारी नौकरियों में घटते अवसर के रूप में पड़ने वाला है. यदि अवैध घुसपैठ की स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो आदिवासी समाज के सांसदों, विधायकों की संख्या भी कम हो जाएगी. संथाल परगना के क्षेत्र में मुस्लिम युवक आदिवासी महिला जनप्रतिनिधियों से विवाह कर डेमोग्राफी बदलने का प्रयास कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें -रांची">https://lagatar.in/ranchi-petition-challenging-speakers-election-rejected/">रांची

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