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धनबाद : ओबी डंप से बर्बाद हो रही लाह की खेती

भौंरा के डेढ़ दर्जन युवाओं को सता रहा बेरोजगार होने का डर

Ranjit Kumar Singh Dhanbad : धनबाद के लिए कोयला जहां वरदान है, वहीं, यह अभिशाप भी बन रहा है. ताजा मामला लाह की खेती से जुड़ा है. झरिया की भौंरा जहाजटांड़ बस्ती के 20-25 बेरोजगारों ने रोजगार के मकसद से जनवरी से बस्ती के समीप लाह की खेती शुरू की है. मेहनत के दम पर इन युवकों ने पौधे में लाह के कीड़े बनने तक का सफर तय कर लिया था. उम्मीद की जा रही थी कि लाह की खेती स्थानीय लोगों के जीवन को बदल देगी. यहां का एक बड़ा तबका इस काम में जुट जाएगा, लेकिन अब इन युवकों पर ही बेरोजगार होने का खतरा मंडराने लगा है. क्योंकि भौंरा आउटसोर्सिंग कंपनी के ओबी डंप के कारण अब इनकी खेती पर ही शामत आ गई है. ओबी डंप से खेती बर्बाद हो रही है. ऐसे में अब इन युवकों के चेहरे पर मायूसी छा गई है. लाह की खेती करने वाले सचिन कुमार महतो व राजेश मल्लिक ने बताया कि टीएसआरडीएस के सहयोग से 20- 25 युवकों ने मिलकर इसी साल जनवरी से दामोदर नदी किनारे लाह की खेती शुरू की थी. लेकिन पिछले कुछ दिनों से आउटसोर्सिंग कंपनी एटी देव प्रभा मनमाने ढंग से ओबी डंप कर लाह की खेती को बर्बाद कर रही है. कंपनी की इस लापरवाही ने युवकों का सपना पूरा होने से पहले ही दम तोड़ने लगा है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में आउटसोर्सिंग प्रबंधक को लिखित शिकायत की गई. इसके बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. सांसद ढुल्लू महतो से भी इस मामले में शिकायत की गई है. सचिन ने कहा कि यदि सरकार और जिला प्रशासन ने जल्द इस पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो युवा बेरोजगार होकर पलायन को मजबूर होंगे.

झारखंड में लाह की खेती बन रही रोजगार का बेहतर जरिया

[caption id="attachment_938759" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/dhanbad-lac-cultivation-getting-ruined-due-to-ob-dump/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b9/"

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alt="" width="600" height="400" /> बर्बाद होती लाह की खेती देखता भौंरा का युवक[/caption] झारखंड में लाह की खेती रोजगार का बेहतर जरिया बनकर उभर रही है. सरकार के साथ-साथ कई संस्थाएं भी इसकी खेती कराने पर विशेष ध्यान दे रही हैं. इससे राज्य के बेरोजगार युवाओं को अपने गांव में ही बेहतर रोजगार मिल रहा है. लाह की खेती के मामले में झारखंड देश ही नहीं पूरे विश्व में पहला स्थान रखता है. यहां पर सबसे अधिक लाह की खेती और उत्पादन किया जाता है. झारखंड के लाह उत्पादन के आंकड़े को देखें तो यहां प्रतिवर्ष लगभग 8-10 हजार मीट्रिक टन लाह का उत्पादन किया जाता है. 400 से अधिक प्रकार के पेड़ों में लाह के कीट पाए जाते हैं. सिर्फ 30 प्रकार के पेड़ों में ही लाह की कॉमर्शियल खेती की जाती है. लाह की खेती के लिए कुसुम, बेर, सेमियालता और पलाश के पेड़ सबसे बेहतरीन माने जाते हैं. कुसुम के पेड़ में औसतन आठ गुणा, बेर के पेड़ में औसतन पांच गुणा और सेमियालता के पेड़ में औसतन सात गुणा अधिक उत्पादन होता है. [wpse_comments_template]

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