alt="" width="233" height="300" /> टीम के सदस्य प्रोफेसर नीतीश कुमार मौर्य[/caption] इस तकनीक के माध्यम से धरती के भीतर मौजूद पत्थरों के बीच के दरारों में फंसे तेल को भी आसानी से निकाला जा सकेगा. तकनीक को विकसित करने वाले सदस्यों की टीम के नेतृत्वकर्ता प्रो अजय कुमार मंडल एवं टीम में शामिल असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नीतीश कुमार मौर्य और जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ) दिनेश मोदी ने बताया कि उनकी टीम ने वर्ष 2019 से 2021 तक दो वर्षों के दौरान किए गए शोध में पाया कि पारंपरिक तरीकों के इतर सिलिका के नैनो पार्टिकल्स की मदद से पत्थरों की दरारों और छेद में फंसे क्रूड ऑयल को भी निकाला जा सकता है. टीम में शामिल सदस्यों ने बताया कि सिलिका के अलावा अन्य पदार्थों के नैनो पार्टिकल्स पर भी शोध किया जा रहा है. देश के अन्य संस्थान भी इस दिशा में शोध कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह तकनीक आईआईटी-आईएसएम द्वारा ओएनजीसी के लिए विकसित किया गया है. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-now-fisheries-department-will-do-fisheries-in-closed-stone-mines/">धनबाद
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