22 दिसंबर 1855 को हुआ था संथाल परगना का गठन
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alt="" width="600" height="400" /> ऐतिहासिक संथाल हुल (क्रांति) के फलस्वरूप बिटिश हुकूमत के दौरान 22 दिसम्बर 1855 को संथाल परगना का गठन हुआ था. उस समय पूरा संताल परगना एक जिला था, जिसमें बिहार (झारखंड) व बंगाल के कुछ हिस्सों को शामिल किया गया था. इसी उपलक्ष्य में हर साल 22 दिसंबर को संथाल परगना स्थापना दिवस मनाया जाता है. संथाल परगना को अब प्रमंडल बना दिया गया है. इस प्रमंडल में छह जिले गोड्डा, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज, पाकुड़ व देवघर शामिल हैं. इस क्षेत्र की पहचान शहीदों की विरासत के रूप में है. संथाल हुल के फलस्वरूप गरीबों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम लागू किया गया, जिसमें यहां के समुदाय को विशेष संरक्षण प्राप्त है. अखड़ा के सचिव सिमल हांसदा ने कहा कि संथाल परगना दिवस शहीदों की विरासत को संजोये रखने व उनके अतुलनीय बलिदानों को सम्मानित करने का अवसर है. यह न्याय, स्वतंत्रता व सम्मान के लिए किए गए उनके संघर्ष का उत्सव है, जिसका नेतृत्व महान स्वतंत्रता सेनानी सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरो मुर्मू, फूलो मुर्मू व झानो मुर्मू ने किया था. यह भी पढ़ें : नेहरू">https://lagatar.in/what-will-prime-minister-modi-do-without-nehru-congress-taunted-reminded-philosopher-voltaires-statement/">नेहरू
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