14 अक्टूबर को कलश यात्रा के साथ शुरू होगा 50 वां मानस पाठ महायज्ञ 15 अक्टूबर से शुरू होगा मानस पाठ Ashish Tagore Latehar: लातेहार प्रारंभ से ही सांप्रदायिक सदभावना की मिसाल पेश करता आया है. यही कारण है कि यहां सड़क के इस पार श्रीरामचरित मानस का पाठ होता है तो सड़क के उस पार अजान की आवाज सुनाई पड़ती है. शहर के ठीक बीचोबीच स्थित अंबाकोठी में इस वर्ष श्रीरामचरित मानस नवाह्य परायण पाठ का स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जा रहा है. 14 अक्टूबर को कलश यात्रा के साथ इस महायज्ञ का शुभारंभ होगा. महायज्ञ स्थल के ठीक सामने सड़क के उस पार मात्र 15 फीट की दूरी पर स्थित है शहर का जामा मस्जिद. इन 50 वर्षों में दोनों समुदायों ने आपसी एकता एवं सांप्रदायिक सोहार्द्र की मिसाल पेश की है. शारदीय नवरात्र के मौके पर जब भी किसी शुक्रवार को जामा मस्जिद में नमाज का वक्त होता है, महायज्ञ समिति के द्वारा लाउडस्पीकर की आवाज को या तो बंद कर दिया जाता है या फिर उसकी आवाज कम कर दी जाती है, ताकि नमाज में कोई व्यवधान नहीं हो. इसे भी पढ़ें-दिल्ली">https://lagatar.in/delhi-liquor-policy-scam-aap-mp-sanjay-singh-in-judicial-custody-till-october-27-appeal-in-high-court/">दिल्ली
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नहीं है एक भी मुस्लिम परिवार
अक्सर देखा जाता है कि मुस्लिम बहुल इलाके में ही मस्जिदें होती हैं. दीगर बात यह है कि जिस स्थान पर लातेहार का जामा मस्जिद हैं, वहां आसपास के आधे किलोमीटर के दायरे में मुस्लिम समुदाय का एक भी परिवार नहीं है. बावजूद इसके प्रत्येक शुक्रवार को यहां काफी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग यहां नमाज पढ़ने आते हैं. आज तक यहां किसी प्रकार की काई छोटी सी भी अप्रिय घटना नहीं हुई है. कभी अगर ईद के मौके पर मानस पाठ हो रहा हो तो मानस महायज्ञ समिति के लोग आगे बढ़ कर मुस्लिम समाज के लोगों को ईद की मुबारकबाद देते हैं. मुस्लिम समाज के लोग भी इसकी प्रशंसा करते हैं. थाना चौक के शकील अख्तर ने कहा कि लातेहार में सांप्रदायिक सोहार्द की मिसाल देखने को मिलती है.महायज्ञ समिति के द्वारा दी जाती है हर प्रकार की सहूलियतें
अंबाकोठी में पिछले 49 वर्षो से लगातार बिना किसी विघ्न के मानस पाठ का आयोजन किया जाता रहा है. महायज्ञ के मुख्य संरक्षक सह स्थानीय विधायक बैद्यनाथ प्रसाद व अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिंह ने बताया कि साल 1973 में इस आयोजन का शुभारंभ किया गया था. इन 49 वर्षो मे आयोजन मे काफी बदलाव आया है. शुरूआती दौर में इस आयोजन में आठ से दस हजार रूपये खर्च आते थे, आज इसमें आठ से दस लाख रूपये खर्च आता है. महायज्ञ समिति के द्वारा पाठकर्ता महिला व ब्राह्मणों को हर प्रकार की सहुलियतें दी जाती है. इसे भी पढ़ें-जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-demonstration-of-muslim-community-after-namaz-sloganeering-against-israel/">जमशेदपुर: नमाज के बाद मुस्लिम समाज का प्रदर्शन, इजराइल के खिलाफ की नारेबाजी
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