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गर्मी और ओवर लोड ने बिजली वितरण सिस्टम को किया बेदम

Kaushal Anand Ranchi: राज्य में गर्मी 43 डिग्री के पार जा चुकी है. गर्मी के कारण लोग बेहाल हैं. मगर इस गर्मी को और अधिक कष्टकारी बना दे रहा है पावर कट. अतिरिक्त बिजली लेकर राज्य में फुल लोड बिजली उपलब्ध होने की बात कही जा रही है. मगर फुल लोड बिजली होने के बावजूद जनता पावर कट से त्राहिमाम कर रही है. केवल लोकल फॉल्ट के नाम पर लगातार अंतराल में हो रहे पावर कट से जनता परेशान हो चुकी है. औसतन पूरे राज्य में 24 घंटे में शहर में 5-6 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 8 घंटे तक पावर कट हो रहा है. इसका मुख्य कारण ओवर लोडेड ट्रांसफार्मर एवं बिजली के तार हर डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफार्मर से क्षमता से अधिक उपभोक्ताओं को कनेक्शन और गर्मी में बढ़ी खपत ने पूरे वितरण सिस्टम को चरमरा दिया है. पावर कट को लेकर जब भी किसी जिम्मेवार इंजीनियर को फोन किया जाए तो यही जवाब मिलता है, लोकल फॉल्ट के कारण शट डाउन लिया गया है.

बिजली वितरण सिस्टम के फैक्ट

-राज्य में 200, 100, 63 एवं 25 केवीए के कुल ट्रांसफार्मरों की संख्या करीब 1,34,349 लाख है.  -राज्य में 33 केवीए के कुल 738 और 11 केवी के कुल 1821 फीडर हैं.  -राज्य में 11 केवीए लाइन की कुल लंबाई 7,514,46 किमी है.  -राज्य में 33 केवीए लाइन की कुल लंबाई 12000 है.  -राज्य में 33 एवं 11 केवीए के कुल 552 सबस्टेशन हैं.  -राज्य के कुल फीडरों में पावर ट्रांसफार्मरों की संख्या 7418 है. 

वितरण सिस्टम फेल होने और लोकल फॉल्ट उत्पन्न होने के फैक्ट

-एक 100 केवीए डिस्ट्रब्यूशन ट्रांसफार्मर से अधिक से अधिक अधिक से अधिक 150 घरेलू कंज्यूमरों को बिजली कनेक्शन दिया जा सकता है. -मगर राज्य का कोई भी ऐसा ट्रांसफार्मर नहीं है, जिससे 200 से 300 कंज्यूमरों को कनेक्शन दिया गया है. इसके कारण लोकल डिस्ट्रब्यूशन ट्रांसफार्मर ओवर लोडेड होने के कारण उसमें फ्यूज उड़ने या फिर उसके जलने और खराब होने हो जा रहे हैं. -इसे दुरूस्त करने के लिए लगातार अंतराल पर शट डाउन लिए जाने के कारण पावर कट हो रहा है. -जेबीवीएनएल प्रबंधन द्वारा दावा किया जाता रहा है कि शहर में 6 से 12 घंटे के अंदर और ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे के अंदर खराब एवं जले हुए ट्रांसफार्मर बदले जाएंगे. मगर यह निर्देश केवल निर्देश बन कर ही रह गया है. कहीं पर निर्धारित दिशा-निर्देश के अंदर ट्रांसफार्मर बदले नहीं जा रहे हैं. -रांची सहित कई शहरों में 11 एवं 33 केवीए के लाइन को अंडरग्राउंड किया गया है, मगर इसका कुल प्रतिशत अब भी 30-40 प्रतिशत ही है. इसके कारण तेज आंधी-हवा में ये लाइन डिस्टर्ब होने से लंबे अवधि तक पावर कट होता है. -एलटी (डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफार्मर से गली-मुहल्ले में निकलने वाले तार) को भी कवर्ड वायर में बदला गया. मगर अब भी इसकी कुल प्रतिशत करीब 60 प्रतिशत है. यानि की 40 प्रतिशत तार अब भी खुले हैं, पुराने हैं और जर्जर हो चुके हैं. इसके कारण गर्मी में ओवर लोड होकर तार गिरने और जलने की संख्या बढ़ जाती है. इसके कारण भी लोकल फॉल्ट उत्पन्न होता है और पावर कट होते रहते हैं.

रांची एरिया बोर्ड के अधीन जिलों में पावर कट की स्थिति

रांची शहरी : 5-6 घंटे रांची ग्रामीण : 24 घंटे में 7 -8 घंटे  गुमला : 5 से 7 घंटे लोहरदगा : 5 से 8 घंटे खूंटी : 5 से 8 घंटे सिमडेगा : 7 से 8 घंटे

क्या कहते हैं जिम्मेवार

वितरण सिस्टम को लगातार दुरूस्त करने का प्रयास जारी है. नए सबस्टेशन का निर्माण, एलटी लाइन को कवर्ड वायर में चेंज करना. डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफार्मरों की संख्या को बढ़ाना. अगर रांची की बात की जाए तो रांची में 33 केवी लाइन करीब 60 प्रतिशत और 11 केवी लाइन 30 प्रतिशत हो चुका है. शेष बचे काम के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है. हमारे इंजीनियर एवं कर्मी लोकल फॉल्ट को दुरूस्त करने के लिए युद्धस्तर पर लग जाते हैं. कहीं-कहीं मेजर समस्या होने से ही समय लग जाता है नहीं तो कम समय में लोकल फॉल्ट को दुरूस्त करके बिजली री-स्टोर कर लिया जा रहा है. (पीके श्रीवास्तव, जीएम रांची एरिया बोर्ड)

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