सरकार पैसे से सहयोग करती तो किराये में रह लेते- महादेव महली
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alt="" width="600" height="400" /> 80 साल का महादेव महली ने कहा कि यहां पर आठवीं क्लास से दो रूम का घर बनाकर रहते आ रहे थे. कुली का काम करके घर बनाया था. परिवार में चार लोग हैं. रोते हुए कहा कि गांव वापस चले जायेंगे. जो बचा था,सबकुछ बिखर गया. पूरा परिवार रोड पर आ गया. आंसू पोंछने वाला कोई नहीं आया. घर तोड़ने से पहले सरकार पैसे से मदद करती,तो शायद कहीं किराये में रूम लेकर रह लेते, लेकिन कुछ भी नहीं बचा. एक-एक ईंट को मेहनत कर बनाये थे. छोटी-छोटी रकम जमा कर घर बनाये थे. बिशु कुजूर ने बताया कि गरीबों का कोई नहीं होता है. यहां पर रहने वाले सभी आदिवासी हैं. सरकार को आदिवासियों के बारे में सोचना था. पूरे परिवार को बिखेर दिया. बाहर से आने वाले लोगों को झोपड़ी के बदले मकान दिया गया. लेकिन यहां के लोगों को कुछ भी नहीं मिला.
दूसरों के घर में काम करके घर बनाए थे- नोपिलाएन
नोपोलिएन उरांव ने बताया कि प्रत्येक दिन मीडिया वाले पहुंचते हैं. कोई कुछ नहीं करता है. काफी गुस्सा आता है कि गरीब का कोई साथ नहीं देता. जिसके पास पैसा होता है. लोग उसी के साथ होते हैं. वोट मांगकर ले लिया, जीत भी गया. घर में बुलडोजर लग गया. परिवार में बेटा है और बहु है. अब कहां जाएं.पांच महीने से घर में बैठे हैं- मंगरू उरांव
मंगरू उरांव ने बताया कि इसी जीईएल चर्च में दो दिन से सहारा मिला है. परिवार में 18-20 लोग रहते हैं. चर्च की सेवा करते पूरा जीवन गुजर चुका है. दो-दिन से ही साफ सफाई परिवार के लोग ही कर रहे हैं. ऑटो से लेकर ट्रक चलाते थे,लेकिन दुर्घटना में पैर से लाचार हो गए हैं. पा़च महीने से घर में बैठे हुए हैं. भाई मंगला उरांव डेढ़ साल से गायब है. बिहार काम करने गया था. वहां से आजतक घर वापस नहीं आया है. वोट ठगकर ले लिया. गरीब का बादशाह कहकर वोट मांगा गया. घर टूट रहा था, उस वक्त खड़ा भी हो जाता तो मन को संतुष्टि मिलती. लेकिन कोई गरीबों की न्याय के लिए सामने नहीं आया.ठंडी रात में परिवार खुले आसमान में सोया- नीलम नायक
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alt="" width="600" height="400" /> 70 साल की नीलम नायक ने बताया कि सरकार का कोई कर्मचारी और अधिकारी सुध लेने नहीं पहुंचा. दो दिन तक खाना पानी भी हमसब नहीं खाए. बच्चों के आंख से आंसू रूक नहीं रहे. चूल्हा जलाने तक स्थान नहीं मिला. ठंडी रात में परिवार खुले आसमान में सोया. एक गमच्छा और साड़ी को पूरा परिवार ढक कर दिन रात बिता रहे हैं. तिरपाल तक नसीब नहीं हुआ. ठंड से बचने के लिए कबंल तक नहीं मिला. यहां पर दर्जनों घर के सदस्य की मौत हो चुकी है. इसका निशान ही बचा था. वह भी हमेशा के लिए खत्म हो गया. मंगल सूत्र और भगवान से बना लोकेट भी ईंट में तब्दील हो गया. इसे भी पढ़ें -कर्नाटक">https://lagatar.in/special-meeting-of-cwc-on-26-december-in-karnataka-jai-bapu-jai-bhim-jai-samvidhan-rally-on-27-december-congress/">कर्नाटक
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