: चौका गांव में फिर जंगली हाथी ने मचाया उत्पात
मनोहरपुर : 'दो जून की रोटी' के लिए मजबूर ग्रामीण भारी बोझ ले तय करते हैं मिलों का सफर
Manoharpur (Ajay singh) : सुदूरवर्ती सारंडा के घने जंगलों में रहने वाले आदिवासी आज भी दो जून की रोटी के लिए कंधे पर या साइकिल पर भारी बोझ लेकर 15 से 20 किलोमीटर चलने को विवश हैं. रोज़गार के अभाव में ग्रामीणों को जलावन की लकड़ियां बेचने की मजबूरी है. यह यात्रा कितनी कष्टदायक होती है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. ये आदिवासी ग्रामीण कंधे पर या साइकिल पर लकड़ी का भारी बोझ लेकर 15 से 20. किलोमीटर दूर मनोहरपुर शहर व आस पास में ले जाकर बेचते है. इसे भी पढ़ें :चांडिल">https://lagatar.in/chandil-wild-elephant-again-created-ruckus-in-chauka-village/">चांडिल
: चौका गांव में फिर जंगली हाथी ने मचाया उत्पात
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