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पाकुड़ : संथाल में फलने फूलने लगा अब चंदन तस्करी का खेल, प्रशासन बेख़बर

Manoj Choubey Pakur : संथाल परगना में कोयला, पत्थर, बालू की तस्करी का खेल नया नहीं है. तस्करों के कई बड़े सिंडिकेट यहां  अपना साम्राज्य चलाते हैं. अब यहां चंदन तस्करों का सिंडिकेट पैर जमाने लगा है. जून महीने में पश्चिम बंगाल की एसटीएफ की कार्रवाई के बाद इस खेल का खुलासा हुआ. स्थानीय प्रशासन अब भी अनजान बना हुआ है.

एसटीएफ ने दबोचे थे दो तस्कर

जून महीने के पहले सप्ताह में ही पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मुरारोई थाना क्षेत्र में कीमती चंदन की लकड़ी से लदे एक टोटो को पकड़ा गया था. पुलिस ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई की थी. इसके लिए एसटीएफ का गठन किया था. एसटीएफ ने टोटो से 50 किलो से ज़्यादा वजन के चंदन की लकड़ी के 115 छोटे-छोटे टुकड़े बरामद किये थे. एसटीएफ ने टोटो के साथ दो तस्कर रवि शेख उर्फ वापी और अबुल शेख उर्फ मिंटू को गिरफ़्तार कर जेल भेजा था. गिरफ़्तार दोनो तस्कर पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित बड़कियारी गांव के रहने वाले हैं. मामले में वीरभूम जिले के मुरारोई थाना में 2 जून को कांड संख्या 107/22 दर्ज़ किया गया. हालांकि दोनो तस्कर जमानत पर बाहर आ चुके हैं. [caption id="attachment_395810" align="alignnone" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/abul-shekh-300x186.jpg"

alt="" width="300" height="186" /> तस्करी के आरोपी अबुल शेख उर्फ मिंटू[/caption]

राजमहल पहाड़ी तस्करों का अड्डा

दुमका के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र से लेकर साहिबगंज जिले के राजमहल तक फैली राजमहल पहाड़ी तस्करी का अड्डा है. जंगलों में चंदन के पेड़ भी भरे पड़े हैं. जिसे सुंघते हुए लेकर चंदन तस्करों का गिरोह भी मांद में दाखिल हो चुका है. जानकारी के मुताबिक कई महीनों से यहां चंदन की लकड़ी की तस्करी का खेल चल रहा है. लेकिन ना ही पुलिस और ना विभाग को इसकी ख़बर है. जबकि बंगाल की पुलिस को पहले ही भनक लग गई.

सीमावर्ती ज़िलो से बंगाल में हो रही तस्करी

पश्चिम बंगाल के वीरभूम ज़िले के मुरारोई थाना प्रभारी विप्लव प्रमाणिक ने बताया कि झारखंड के दुमका, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा जिले के सीमावर्ती जंगलों से चंदन के पेड़ों को काटकर पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में तस्करी की जा रही है. बंगाल पुलिस को जब इसकी सूचना मिली तो एसटीएफ का गठन कर कार्रवाई की गई. झारखंड में खनिज संसाधनों और वनस्पति की लूट नई नहीं है. कोयलांचल से लेकर संथाल परगना तक तस्करों का सिंडिकेट अपना साम्राज्य चला रहा है. चंदन तस्करी भी धीरे-धीरे सिंडिकेट का रूप अख़्तियार कर ले तो हैरानी नहीं होगी. विभाग, प्रशासन और पुलिस की चुप्पी सवाल ज़रूर पैदा करते हैं. यह">https://lagatar.in/pakur-demand-to-include-angika-language-in-the-8th-schedule-in-the-meeting-of-angika-society/">यह

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