”दाना” को लेकर ऑरेंज अलर्ट, कई ट्रेनें हुई रद्द
पार्टी नेतृत्व ने आखिर क्यों सीपी पर ही भरोसा जताया
वर्ष 2000, 2005, 2009, 2014 और 2019 का चुनाव सीपी सिंह ने जीता था. सिंह भाजपा सरकार में मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष भी रहे हैं. हालांकि 2019 के विस चुनाव में उन्हें झामुमो प्रत्याशी महुआ माजी ने कड़ी टक्कर दी थी. इस बार कयास लगाया जा रहा था कि उम्र की वजह से भाजपा सीपी सिंह की जगह किसी और को प्रत्याशी बना सकती है. भाजपा के अंदरखाने में भी प्रत्याशी बदले जाने की चर्चा हो रही थी. लेकिन भाजपा का शीर्ष नेतृत्व हेमंत सरकार को उखाड़ फेंकने के साथ चुनाव मैदान में उतरा है. भाजपा के लिए एक-एक सीट की अहमियत है. इसे ध्यान में रखते हुए आखिरी वक्त पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सीपी सिंह को मैदान में उतारने का निर्णय लिया. रांची सीट से प्रत्याशी बदल कर भाजपा नेतृत्व कोई रिस्क लेना नहीं चाहता था. चूंकि सीपी सिंह लगातार क्षेत्र की जनता से मिलते-जुलते रहते हैं और लोगों के बीतच उनकी अच्छी पकड़ है, इसलिए ही पार्टी नेतृत्व ने उनपर भरोसा किया. पार्टी नेतृत्व को यह भी आभास था सीपी सिंह को बदल कर किसी नए को प्रत्याशी बनाया जाता है, तो उसके लिए राह उतना आसान नहीं रह जाता. ऐसे में विपक्षी प्रत्याशी भाजपा पर भारी पड़ सकता था. नए प्रत्याशी को उतारने पर टिकट की दौड़ में शामिल दूसरे नेताओं के रूठने का भी अंदेशा था. इसलिए अंतिम समय में नेतृत्व ने सीपी पर ही दांव खेलना मुनासिब समझा.कई राउंड पिछड़ने के बाद सीपी 5904 वोटों से जीते थे
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के सीपी सिंह और महुआ माजी आमने-सामने होंगे. 2019 के चुनाव में कई राउंड में पिछड़ने के बाद सीपी सिंह ने महुआ माजी को 5904 वोटों के अंतर से पराजित किया था. सीपी सिंह को 79,646 वोट मिले थे, जबकि महुआ माजी को 73,742 वोट. इसे भी पढ़ें -मुजफ्फरपुर:">https://lagatar.in/muzaffarpur-newly-married-couple-missing-from-in-laws-house-family-members-filed-a-case-of-murder/">मुजफ्फरपुर:नवविवाहित ससुराल से गायब, परिजनों ने दर्ज कराया हत्या का केस [wpse_comments_template]
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