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रिर्पोट में खुलासा : झारखंड के आदिवासी समूहों का खर्च देश में सबसे कम

  • सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की रिर्पोट में हुआ खुलासा
  • ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी पढ़ाई में करते हैं दोगुना खर्च
  • अनाज में शहरवासियों से अधिक खर्च करते हैं ग्रामीण
  • ग्रामीण इलाज में 12.6 और शहरी करते हैं 10.7 फीसदी खर्च
  • अंडा-मीट मछली खाने में अधिक खर्च करते हैं ग्रामीण
Ravi Bharti Ranchi :  मूलभूत सुविधाओं के मामले में झारखंड के ग्रामीण इलाके आज भी बहुत पिछड़े हुए हैं. ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत नहीं पहुंच पाता है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2022-23 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है कि झारखंड के लोग किन चीजों पर कितना खर्च करते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि झारखंड के गांवों में इलाज पर पढ़ाई से ज्यादा खर्च किया जाता है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के ग्रामीण इलाकों में इलाज पर 12.6 व पढ़ाई पर 5.9 फीसदी खर्च किया जाता है. जबकि शहर में पढ़ाई पर गांवों की तुलना में लगभग दोगुना यानी 10.8 फीसदी खर्च किया जाता है, जबकि इलाज पर 10.7 फीसदी खर्च किया जाता है. रिर्पोट के अनुसार, प्रमुख राज्यों में सामाजिक समूह के ग्रामीण व शहरी इलाकों में प्रति व्यक्ति औसत मासिक खर्च के मामले में झारखंड के ग्रामीण इलाकों के आदिवासी व्यक्ति का खर्च देश में सबसे कम है. यहां गांवों के आदिवासी द्वारा प्रति व्यक्ति औसत 2,218 रुपए मासिक खर्च किया जाता है. इसके बाद छत्तीसगढ़ के ग्रामीण आदिवासियों का औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 2,258 है, जबकि मध्य प्रदेश 2,651 रुपए औसत प्रति व्यक्ति मासिक खर्च होता है.

शहर में दूध व इससे बने उत्पादों और फल पर होता है ज्यादा खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक कि शहरी इलाकों में दूध व दूध से बने उत्पादों और फल पर गांवों की तुलना में अधिक खर्च किया जाता है. जबकि, ग्रामीण इलाकों में अंडा, मछली व मीट पर शहर की तुलना में अधिक खर्च होता है. शहर में अनाज पर 14.2, दूध व दूध से बने उत्पादों पर 16.1, सब्जियों पर 11.3, फल पर 8.7, अंडा, मछली व मीट पर 9.7 और पेय पदार्थ, जलपान व प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर 21.2 फीसदी खर्च किया गया. वहीं, गांवों में अनाज पर 14.8, दूध व दूध से बने उत्पादों पर 11, सब्जियों पर 12.5, फल पर 6.1, अंडा, मछली व मीट पर 13.9, पेय पदार्थ, जलपान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर 20.3 फीसदी खर्च किया गया.

ग्रामीण इलाकों में इलाज पर अधिक खर्च

ग्रामीण इलाकों के लोग शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा इलाज में अधिक खर्च करते हैं. ग्रामीण क्षेत्र के लोग इलाज में 12.6 फीसदी खर्च करते हैं. जबकि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग का इलाज में 10.7 फीसदी खर्च होता है. ग्रामीण क्षेत्र के लोग अनाज पर 14.8 फीसदी और शहरी क्षेत्र के लोग 14.2 फीसदी खर्च करते हैं.

शहरों इलाकों में पढ़ाई पर दोगुना खर्च

शहरी इलाकों के लोग पढ़ाई में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में दोगुना खर्च करते हैं. शहरी इलाकों के लोग पढ़ाई में 10.8 फीसदी खर्च करते हैं. जबकि ग्रामीण इलाके के लोग पढ़ाई में 5.9 फीसदी ही खर्च करते हैं. वहीं झारखंड के गांवों में परिवहन पर 12.9 फीसदी खर्च होता है. जबकि शहर में परिवहन पर 13.8 फीसदी खर्च किया जाता है. शहरी क्षेत्रों में, केरल में सबसे अधिक 16.6 प्रतिशत , तमिलनाडु में 16.1 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 16 प्रतिशत, गुजरात में 15.7 प्रतिशत और  राजस्थान 15.6 प्रतिशत वाहन पर खर्च किया जाता

फैक्टशीट के तीन महीने बाद रिपोर्ट

सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट फैक्टशीट जारी होने के तीन महीने बाद आयी है. फरवरी में पहले जारी एचसीईएस सर्वेक्षण रिपोर्ट की फैक्टशीट से सामने आया था कि ग्रामीण इलाकों में औसत मासिक खर्च 2011-12 में 1,430 रुपए प्रति व्यक्ति से बढ़कर 2022-23 में 3,773 रुपए प्रति माह हो गया. यानी 164 फीसदी की वृद्धि हुई थी. शहरों में 146 फीसदी वृद्धि हुई थी, 2011-12 में 2,630 रुपए प्रति व्यक्ति की तुलना में 2022-23 में 6,459 रुपए खर्च किये गये.

ग्रामीण इलाकों में किस चीज पर कितना फीसदी खर्च

  • अनाज :  14.8 फीसदी
  • दूध व दूध से बने उत्पाद :  11 फीसदी
  • सब्जी :  12.5 फीसदी
  • फल :  6.1 फीसदी
  • अंडा, मछली व मीट :  13.9 फीसदी
  • पेय पदार्थ, जलपान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ :  20.3 फीसदी

शहरी इलाकों में किस चीज पर कितना फीसदी खर्च

  • अनाज : 14.2 फीसदी
  • दूध व दूध से बने उत्पाद : 16.1 फीसदी
  • सब्जी :  11.3 फीसदी
  • फल : 8.7 फीसदी
  • अंडा, मछली व मीट : 9.7 फीसदी
  • पेय पदार्थ, जलपान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ : 21.2 फीसदी
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