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झारखण्ड में स्वयं सहायता समूहों को 6 साल में मिले 13,659 करोड़ क्रेडिट लिंकेज

 
Lagatar Desk Ranchi : झारखंड के ग्रामीण महिलाओं व उनके परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए क्रेडिट लिंकेज योजना को बड़ी सफलता मिली है. पिछले छह सालों में राज्य के 32 लाख परिवार को इसका लाभ मिला है.  आंकड़े के मुताबिक दिसंबर 2019 से लेकर अब तक 53,293 नए समूहों बनाए गए. 2.67 लाख सखी मंडलों को बैंक क्रेडिट लिंकेज से जोड़ा गया है. इन समूहों को अब तक 14,204 करोड़ रुपये का क्रेडिट लिंकेज दिया गया है. दिसंबर 2019 से पहले यह क्रेडिट लिंकेज 545.30 करोड़ रुपया था.
स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बैंकों के साथ क्रेडिट लिंकेज कराने की प्रक्रिया तेज होने से राज्य के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सरकार को मदद मिल रही है. एसएचजी सदस्यों को आसान शर्तों पर बैंक लोन सुविधा मिल रही है.
क्रेडिट लिंकेज योजना का इस्तेमाल सिर्फ रोजगार के लिए नहीं हो रहा है बल्कि बड़ी संख्या में किसान भी इसके लाभ ले रहे हैं. राज्य संपोषित झारखंड माइक्रोड्रिप इरिगेशन परियोजना के तहत करीब 31,861 किसानों को टपक सिंचाई तकनीक से जोड़ कर उन्नत खेती की जा रही है. बैंकिग करेस्पांडेंट सखी, पशु सखी, कृषि सखी, वनोपज मित्र, आजीविका रेशम मित्र, सीआरपी समेत, करीब 85,000 सामुदायिक सदस्यों को प्रशिक्षित कर महिलाओं को आधुनिक संचार तकनीक सिखाया जा रहा है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2025/04/sakhi-mandal-272x135.jpeg"

alt="" width="272" height="135" /> बोकारो - चंद्रपुरा की प्रेमलता देवी को मिला सहारा : पति की मौत के बाद बोकारो के चंद्रपुरा प्रखंड की प्रेमलता देवी की जिंदगी अंधकार में डूब गया था. उनके सामने जिंदगी जीने और परिवार को संभालने की चुनौती थी.  संकट के उस दौर में वह जीवन ज्योति आजीविका सखी मंडल से जुटी. उन्होंने क्रेडिट लिंकेज (सीसीएल) से 50 हजार रुपया का लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदी. वह कपड़ों की सिलाई मशीन से करने लगी. उनकी आय बढ़ी और तय समय पर उन्होंने लोन की पूरी राशि लौटा दी. 
लोन चुकाने के बाद उन्होंने सिलाई केंद्र खोलने का निर्णय लिया. उन्होंने ग्राम संगठन से 20 हज़ार रूपए का लोन लिया. अब वह स्वाभिमान के साथ खुद की और अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रहीं हैं.
जामताड़ा - किरण झा बनी सफल उद्यमी : जामताड़ा के नाला प्रखंड की किरण झा की पहचान एक छोटे उद्यमी के रुप में है. राधा कृष्ण आजीविका सखी मंडल से जुड़कर उन्होंने अचार-पापड़ बनाने का प्रशिक्षण लिया. यह प्रशिक्षण उन्हें आरसेटी (RSETI) में लिया.
प्रशिक्षण के बाद उन्होंने कैश क्रेडिट लिंकेज के तहत 50 हजार रुपया का लोन लिया. अब वह सालाना 1.2 लाख रुपये कमाती हैं.
उन्होंने अपने साथ कई अन्य महिलाओं को जोड़ा लिया है. किरण झा की वजह से दूसरी महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन रही हैं. मां की सफलता ने उनके बेटे को भी उत्साहित किया. उसने डीडीयूजीकेवाई से ट्रेनिंग ली. आझ वह सलाना 3.6 लाख रुपया की कमाई कर रही है. 
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