Mumbai : वित्त वर्ष के पहले कारोबारी दिन एक अप्रैल को आज शेयर बाजार 1500 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया. जानकारो ने इसका कारण डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को बताया. कहा कि इसके दबाव में सेंसेक्स एक बार फिर 76 हजार अंकों के नीचे चला गया. निफ्टी भी 23150 अंकों के नीचे चला गया. सबसे ज्यादा मार आईटी और बैंकिंग शेयरों पर पड़ी है.
ऑटो को छोड़कर, सभी प्रमुख सेक्टर्स लाल निशान पर कारोबार करते रहे. निफ्टी आईटी, रियल्टी, वित्तीय और कंज्यूमर ड्यूरेबल गुड्स 1-3 फीसदी नीचे गिरे. कुल मिला कर बीएसई का मार्केट कैप 3.50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा गिरा.
शेयर बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ ही नहीं था. तीन अन्य कारक शेयर बाजार को गिरा रहे हैं कच्चे तेल की कीमत 5 सप्ताह के हाई पर पहुंच गयी. आईटी शेयर प्रेशर में दिख रहे हैं. इसके अलावा इस मार्च में आयी मजबूत रैली के बाद शेयर बाजार में बिकवाली हावी हो रही. जिसे ट्रंप के टैरिफ ने हवा दे दी.
2 अप्रैल को ट्रंप का रेसीप्रोकल टैरिफ पूरी दुनिया पर लागू हो जायेगा
याद रखें कि कल 2 अप्रैल पूरी दुनिया के लिए काफी अहम है. 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिबरेशन डे का नाम किया है. 2 अप्रैल को ट्रंप का रेसीप्रोकल टैरिफ पूरी दुनिया पर लागू हो जायेगा. ट्रंप ने पूर्व में कह था कि अमेरिका के तमाम टैरिफ सभी देशों को टारगेट करेंगे. इस वजह से ग्लोबल ट्रेड वॉर की संभावना बलवती हो गयी है. यह ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को स्लो कर सकता है.
आईटी कंपनियों में, जो अमेरिकी बाजार पर बहुत अधिक निर्भर है, कमजोर मांग की चिंताओं की वजह से 1.8 फीसदी की गिरावट आयी. मार्च तिमाही में इस सेक्टर में पहले ही 15 फीसदी की गिरावट आ चुकी है, जिससे निफ्टी 50 में गिरावट देखने को मिली है. मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 26 में आईटी फर्मों के लिए रेवेन्यू काफी कम रहने का अनुमान है और कमाई में गिरावट का रिस्क भी बना रहेगा.
जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार ग्लोबल लेवल पर बाजार 2 अप्रैल से लागू होने वाले ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ के डिटेल पर फोकस है. टैरिफ लागू होने के बाद मार्केट का ट्रेंड टैरिफ डिटेल और विभिन्न देशों और सेक्टर्स पर पड़ने वाले उसके प्रभावों पर निर्भर रहेगा
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