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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर यादव को तलब किया, कहा था, बहुसंख्यकों के अनुसार ही देश चलेगा

 55 विपक्षी सांसदों ने जस्टिस यादव के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग करते हुए राज्यसभा में नोटिस दिया है. NewDelhi : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाजिर होने को कहा है. जस्टिस शेखर कुमार यादव ने विश्व हिंदू परिषद के समारोह में एक बयान दिया था, जिसके कारण विवाद हो गया था. खबर है कि जस्टिस शेखर कुमार यादव अपना रुख स्पष्ट करने के लिए व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के समक्ष पेश होंगे होंगे. इस मामले में सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट के शीतकालीन अवकाश से पहले मंगलवार, 17 दिसंबर को बैठक करने वाली है.

जस्टिस यादव ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया था

बता दें कि प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में आठ दिसंबर को जस्टिस यादव ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया था. उन्होंने कहा था कि कानूनों को बहुसंख्यकों की प्राथमिकताओं के अनुरूप होना चाहिए. यह वीडियो वायरल होने पर विवाद खड़ा हो गया था. जस्टिस यादव ने कहा था कि यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि ये हिंदुस्तान है. हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों के अनुसार ही देश चलेगा. यही कानून है. आप यह भी नहीं कह सकते कि हाई कोर्ट के जस्टिस होकर ऐसा बोल रहे हैं. लेकिन कानून तो बहुसंख्यक से ही चलता है. परिवार समाज का उदाहरण देते हुए कहा था, देखिए, जहां पर अधिक लोग होते हैं, जो कहते हैं उसी को माना जाता है. साथ ही कहा था कि कठमुल्ले देश के लिए घातक हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिपोर्ट तलब की थी

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही बवाल मच गया था. आलोचना विपक्षी नेताओं सहित कई वकीलों ने उनके बयान और टिप्पणियों को विभाजनकारी और असंवैधानिक करार दिया था. इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिपोर्ट तलब की थी. एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश जस्टिस शेखर कुमार यादव द्वारा दिये गये भाषण की समाचार पत्रों में छपी रिपोर्टों पर ध्यान दिया है. हाईकोर्ट से विवरण और विवरण मंगवाए गये हैं.

यह टिप्पणी न्यायाधीश पद की शपथ का उल्लंघन है

जस्टिस के बयान की आलोचना करते हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण और सीपीआई (एम) की नेता वृंदा करात ने सीजेआई खन्ना को पत्र लिखकर कहा कि उनकी यह टिप्पणी न्यायाधीश पद की शपथ का उल्लंघन है. साथ ही बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने भी जस्टिस की टिप्पणी की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया था. खबर है कि शुक्रवार को 55 विपक्षी सांसदों ने जस्टिस यादव के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग करते हुए राज्यसभा में नोटिस दिया है. समाजवादी पार्टी के सांसद कपिल सिब्बल और कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के नेतृत्व में सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा महासचिव को महाभियोग का नोटिस दिया था.  

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