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वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने गांवों व शहर के विकास के लिए नहीं दी 5516.90 करोड़

Ranchi :  राज्य सरकार ने वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में 2024-25 में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों को 5516.90 करोड़ रुपये नहीं दिये. पंचम राज्य वित्त आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों को पांच प्रतिशत राशि देने की अनुशंसा की थी. केंद्र सरकार ने राज्य में वित्त आयोग के निष्क्रिय होने की वजह से पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को दिये जाने वाले अनुदान पर रोक लगा दी थी. साथ ही यह भी कहा था कि राज्य सरकार द्वारा राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) नहीं देने तक अनुदान की राशि बंद रहेगी.  केंद्र द्वारा बरती गयी सख्ती के बाद राज्य सरकार ने वित्त आयोग में पदाधिकारियों की नियुक्ति की. सेवानिवृत आईएएस अधिकारी एपी सिंह को पंचम राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया गया.  उन्होंने राज्य के राजस्व में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को दी जाने वाली हिस्सेदारी सहित इन संस्थओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट दी. मार्च 2025 में पंचम राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट सदन में पेश की गयी. इसमें राज्य के राजस्व में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को लिए कुल पांच प्रतिशत की भागीदारी तय की गयी थी. आयोग की यह अनुशंसा दो साल के लिए प्रभावी है. यानी पंचम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में इन संस्थाओं को राज्य के राजस्व में 5-5 प्रतिशत की हिस्सेदारी निर्धारित की गयी थी. आयोग ने राज्य के कुल राजस्व के पांच प्रतिशत में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए 60 प्रतिशत और शहरी स्थानीय निकायों के लिए 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी निर्धारित की थी. वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का राजस्व (टैक्स व नन टैक्स) 110337.75 करोड़ रुपये होना का अनुमान था. इसमें से पांच प्रतिशत यानी 5516.9 करोड़ रुपये पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों को देना था. आयोग द्वारा निर्धारित फार्मूले के हिसाब से पंचायती राज संस्थाओं को 3310.14 करोड़ और शहरी स्थानीय निकायों को 2206.76 करोड़ रुपये मिलना था. लेकिन सरकार ने आयोग की अनुशंसा के आलोक में इन संस्थाओं को 2024-25 में अपने राजस्व में हिस्सेदारी नहीं दी.

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