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उत्तर प्रदेश : दारुल उलूम के छात्रों पर इंग्लिश पढ़ने-लिखने पर प्रतिबंध, आदेश नहीं माना तो निकाल दिये जायेंगे

Lucknow : इस्लामी तालीम के लिए दुनिया भर में विख्यात प्रमुख केंद्र दारुल उलूम के छात्र अंग्रेजी नहीं पढ़ पायेंगे. यहां शिक्षा ग्रहण करने के दौरान अंग्रेजी या किसी दूसरी भाषा पढ़ने पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है. बता दें कि दारुल उलूम के शिक्षा विभाग के प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी द्वारा जारी फरमान में कहा गया है कि यहां छात्र अंग्रेजी या किसी दूसरी भाषा का ज्ञान नहीं अर्जित कर सकेंगे. अगर कोई छात्र इस आदेश की अवहेलना करेगा तो उसे संस्थान से निष्कासित कर दिया जायेगा.                                    ">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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मदरसा हमारा दीन है मगर हमारी दुनिया नहीं

इस संबंध में दारुल उलूम के सदर मुदर्रिस व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को कहा कि मदरसा हमारा दीन है मगर हमारी दुनिया नहीं. इसलिए छात्र पहले अच्छे आलिम-ए-दीन बनें. उसके बाद ही वे डॉक्टर,इंजीनियर या वकील बनने के बारे में सोचें. कहा कि छात्रों को ध्यान देना चाहिए, क्योंकि दो कश्तियों पर सवार होने वाले को कभी मंजिल नहीं मिल सकती.

दारुल उलूम के छात्रों में हड़कंप मच गया

. शिक्षा विभाग के प्रभारी के फरमान में यह भी कहा गया है कि यदि कोई छात्र अंग्रेजी भाषा का अध्ययन करते पाया गया या फिर गुप्त तरीके किसी छात्र की संलिप्तता सामने आयी तो उसे संस्थान से निष्कासित कर दिया जाएगा. इस फरमान के बाद दारुल उलूम के छात्रों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि दारुल उलूम में दीनी तालीम हासिल करने के अलावा काफी छात्र इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स या आधुनिक शिक्षा से संबंधित अन्य विषयों को पढ़ते हैं.

मौलाना मदनी की छात्रों को नसीहत

हालांकि मौलाना मदनी ने कहा कि दारुल उलूम देवबंद अंग्रेजी, कंप्यूटर या आधुनिक शिक्षा का विरोध नहीं करता. संस्थान में इसके विभाग भी है. कहा कि हमारा मानना है कि संस्थान में दाखिला लेने वाले छात्रों को पहले उसी तालीम पर फोकस करना चाहिए जिसके लिए वे संस्थान में आये हैं. इसी कारण संस्थान ने यह बड़ा फैसला किया है. दारुल उलूम का इतिहास लगभग 156 साल पुराना है. इसकी स्थापना 30 सितंबर 1866 को की गयी थी. बड़े-बड़े इस्लामिक विद्वानों ने यहां अध्ययन किया है.

एक लाख से अधिक फतवे ऑनलाइन जारी किये जा चुके हैं

बता दें कि यहां तालीम हासिल कर निकलने वाले मौलवी और मुफ्ती दुनिया भर की मस्जिदों और मदरसों में दीनी तालीम देने हैं. अब यहां अंग्रेजी शिक्षा पर प्रतिबंध लगाये जाने से छात्र मुश्किल में हैं. मौजूदा समय में छात्रों को दीनी तालीम देने के लिए संस्थान में लगभग 200 शिक्षक हैं. 2005 में यहां फतवा जारी करने के लिए ऑनलाइन विभाग की स्थापना की गयी थी. खबरों के अनुसार पिछले 17 वर्षों के दौरान करीब एक लाख से अधिक फतवे ऑनलाइन जारी किये जा चुके हैं. [wpse_comments_template]

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