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बीएयू में स्मार्ट फार्मिंग पर कार्यशाला, नैनो टेक्नोलॉजी से किसानों को होगा फायदा

 
Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रीय कृषि उच्चतर शिक्षा परियोजना (नाहेप) द्वारा संघवी स्ट्रेटजी एंड कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से ``स्मार्ट कृषि एवं प्रत्येक प्लॉट से संबंधित डाटा की प्राप्ति`` विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला को संबोधित करते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश) के पूर्व कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने कहा कि धरातल पर फुलप्रूफ योजनाएं बनाने के लिए कृषि संबंधी उपयुक्त डाटा प्राप्त करने हेतु ड्रोन, सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ज्योग्राफिकल मैपिंग जैसी नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा. इससे विभिन्न कृषि ऑपरेशंस के पहले ही आवश्यक आंकड़े मिल जाएंगे और घर बैठे ही खेत की मॉनिटरिंग भी की जा सकेगी. देश में वर्ष 1950 की तुलना में खाद्यान्न उत्पादन में 6 गुना तथा सब्जी एवं फल उत्पादन में 12 गुना वृद्धि हुई है. किंतु कृषि योग्य जमीन का रकबा प्रायः नहीं बढ़ा है. उस दिशा में भी प्रयास की जरूरत है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/33-5.jpg"

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नैनो टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से मिलेगा पोषण : कुलपति

बीएयू के कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने कहा कि क्लाइमेट स्मार्ट कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी. मशीनों और नैनो टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से बहुत कम इनपुट के इस्तेमाल पर भी फसल को उतना ही पोषण मिलेगा और उत्पादन अच्छा होगा. वानिकी संकाय के प्रभारी अधिष्ठाता और नाहेप के प्रधान अन्वेषक डॉ एमएस मलिक ने कहा कि हर प्लॉट के बारे में विस्तृत जानकारी अग्रिम में उपलब्ध रहने से वहां से बेहतर उत्पादकता और फसल गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है. सही समय पर कृषि ऑपरेशंस एवं मौसम संबंधित परामर्श देने में भी ये डाटा बहुत उपयोगी साबित होगा. इसे भी पढ़ें-ईईसीएल">https://lagatar.in/eecl-owes-10-crores-to-ranchi-municipal-corporation-the-company-is-no-longer-installing-new-street-lights-in-the-city/">ईईसीएल

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दवा एवं रसायनों के छिड़काव में ड्रोन का सही इस्तेमाल : डॉ बीके झा

परियोजना के सह प्रधान अन्वेषक डॉ बीके झा ने कहा कि ड्रोन का इस्तेमाल सही चित्र लेने के अलावा फसल में कीड़ों, बीमारियों, पोषक तत्वों की उपलब्धता के आकलन, दवा एवं रसायनों के छिड़काव तथा आंकड़ों के विश्लेषण के लिए भी किया जा सकता है. केंद्रीय योजना के तहत कृषि कार्य में लगी पब्लिक सेक्टर संस्थाओं को शत-प्रतिशत अनुदान पर ड्रोन उपलब्ध हो रहा है. इसका लाभ लेने के लिए सभी संस्थाओं को आगे आना चाहिए. लेकिन शादी-विवाह और सामाजिक समारोहों में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी के अलावा अन्य उद्देश्यों से इसका इस्तेमाल करने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना होगा.

कार्यशाला में ये भी रहे मौजूद 

संघवी स्ट्रेटजी एंड कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से मिशीगन विश्वविद्यालय यूएसए में कार्यरत सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ रवि सिंह, हिमाचल की कृषि वैज्ञानिक डॉ शुभ लक्ष्मी सिंह तथा आईटी विशेषज्ञ मनीष कुमार, हरिप्रसाद जैन, श्रीकर रेड्डी तथा अजय ने भी स्मार्ट फार्मिंग के विविध पहलुओं पर अपने विचार रखे. इसे भी पढ़ें- गढ़वा">https://lagatar.in/garhwa-shri-banshidhar-temple-is-at-the-place-of-confluence-of-three-states/">गढ़वा

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