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धान की दो परंपरागत पादप अनुवांशिकी का पता चला
डॉ कुमार ने फसलों के पादप अनुवांशिकी तथा परंपरागत फसल किस्मों के महत्व एवं उपयोगिता के बारे में बताया. कृषि विज्ञान केंद्र, सिमडेगा के वैज्ञानिक डॉ बंधनु उरांव ने बताया कि पीढ़ी दर पीढ़ी उपयोग में लाई जाने वाली फसलों की पादप अनुवांशिकी विविधता का विशेष महत्व है. जो भावी पीढ़ी के लिए अमूल्य धरोहर है. इन परंपरागत फसल किस्मों को संरक्षित किये जाने की आवश्यकता है. आदिवासी किसानों एवं कृषक समुदाय को वैज्ञानिकों ने स्थानीय परिवेश के उपयुक्त फसलों के पादप अनुवांशिकी तथा परंपरागत फसल किस्मों के बारे में बताया. बताया कि धान की दो परंपरागत पादप अनुवांशिकी का पता चला है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘जोलपो’ तथा ‘दा बाबा’ नाम से जाना जाता है. किसानों के बीच दोनों किस्मों की खेती के अनुभवों को साझा किया गया. किसानों ने परंपरागत रूप से उपयोगी औषधीय वनस्पति ‘मंडूकपर्णी’ की विशेषता को बताया, जिसे उलीहातू में ‘चोके अड़ा’ कहा जाता है. इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने ‘मंडूकपर्णी’ के संरक्षण कैसे किया जाए, किसानों को बताया. इसे भी पढ़ें- लीना">https://lagatar.in/leena-manimekalai-tweeted-hindutva-can-never-become-india-i-will-stand-firm-lashed-out-at-bjp-rss/">लीनामणिमेकलाई ने ट्वीट किया, हिंदुत्व कभी भारत नहीं बन सकता, मैं डटी रहूंगी.. BJP-RSS पर बरसीं
40 आदिवासी किसानों के बीच 6.5 क्विंटल बीज का वितरण
मौके पर बीएयू में संचालित आईसीएआर- नेटवर्क प्रोजेक्ट ऑन आर्गेनिक फार्मिंग की ट्राइबल सब प्लान के अधीन धान बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर खूंटी जिले के उलीहातू गांव के कुल 40 आदिवासी किसानों को वैज्ञानिकों ने कुल 6.5 क्विंटल धान के बीज का अग्रिम प्रत्यक्षण लगाने हेतु वितरण किया. मौके पर परियोजना के शोधार्थी डॉ रूपलाल प्रसाद ने वितरित किये गये धान की तीन उन्नत किस्मों सहभागी, स्वर्ण शक्ति एवं स्वर्ण श्रेया की विशेषता एवं फसल प्रबंधन की जानकारी दी. बीज वितरण में एटिक केंद्र के प्रकाश कुमार ने सहयोग किया. इसे भी पढ़ें- कन्हैया">https://lagatar.in/kanhaiya-singh-murder-case-daughter-and-lover-hatched-a-conspiracy-11-arrested-including-shooter/">कन्हैयासिंह हत्याकांड: बेटी व प्रेमी ने रची थी साजिश, शूटर समेत 11 गिरफ्तार [wpse_comments_template]

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