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मंडा मेला में अंगारों पर चलकर व झूलन उत्सव में श्रद्धालुओं ने दिखायी आस्था

Chakradharpur (Chaibasa)| Shambhu kumar पश्चिमी सिंहभूम जिला के बंदगांव प्रखंड स्थित बंदगांव बाजार के समीप लगने वाला ऐतिहासिक व प्रसिद्ध मंडा (हकन) मेला पर्व शुक्रवार को संपन्न हो गया. शुक्रवार की सुबह मंडा मेला में भक्तों ने भगवान शिव व पार्वती की पूजा अर्चना कर अंगारों पर चलकर व झूलन उत्सव में ऊंचे झूले से लटक कर अपनी आस्था दिखायी. इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी. मंडा मेला के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि पीपुल्स वेल्फेयर एसोसिएशन के सचिव डॉ. विजय सिंह गागराई उपस्थित थे. इस दौरान उन्होंने भगवान शिव-पार्वती के मंदिर में पूजा अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की. साथ ही झूला की परिक्रमा कर झूलन उत्सव का शुभारंभ किया. इस दौरान लगभग 30 फीट ऊंचे झूले पर बल्ले के सहारे लटक कर भोक्ताओं ने परिक्रमा करते हुये गले में पहने माला के फूल बरसाये. इस झूलन उत्सव में छोटे बच्चे भी शामिल हुये. तेज धूप में यह अनुष्ठान लगभग दो से ढाई घंटे तक चला.

फूल पाने के लिए आतुर दिखे श्रद्धालु

इस झूलन उत्सव को देखने के लिए उमड़ी भीड़ व श्रद्धालु भोक्ताओं द्वारा बरसाये गये फूल पाने के लिए आतुर दिखे. इससे पहले भोक्ताओं ने बंदगांव घाट तालाब में इकट्ठा होकर पाट एवं बनस पूजा की. इस अवसर पर समाजसेवी डॉ. विजय सिंह गागराई ने कहा कि बंदगांव का मंडा मेला पूरे जिला में विख्यात है. सन 1800 ई. से यहां वर्षों पुरानी परंपरा के तहत पूजा अर्चना होती आ रही है. झारखंड की पहचान हमारे धर्म, संस्कृति व सभ्यता से है. मंडा मेला में भगवान शिव-पार्वती के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति नजर आती है. दहकते अंगारों पर चलना व ऊंचे झुलन पर लटकर श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था दिखायी हैं.

मनुष्य भक्ति व साधना से हर मुश्किल को आसान बना सकता है : डॉ विजय

डॉ विजय सिंह गागराई ने कहा कि मनुष्य चाहे तो अपनी भक्ति व साधना से सभी मुश्किल चीजों को आसान कर सकता है. मेला संचालन समिति का भी आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय योगदान है. समिति को हरसंभव सहयोग किया जाएगा. मौके पर आयोजन समिति के संरक्षक रमेश सिंह, अर्जुन सिंह, रासबिहारी मुंडा, किशुन मछुआ, अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण सिंहदेव, कोषाध्यक्ष अनुप सिंह, जगन्नाथ मुंडरी, मेला संचालन समिति के विवेक सिंह उर्फ विक्की, राजकुमार, हरेन्द्र सिंह, राजेन्द्र मछुवा, कुदलदीप कुमार, बिशु पाहन समेत अन्य सदस्य व बड़ी संख्या में महिला-पुरूष श्रद्धालु व ग्रामीण मौजूद थे.

झाड़ी काटने के दौरान मिला था शिवलिंग, तब से हो रही पूजा

स्थानीय लोगों के अनुसान सन 1800 में बंदगांव के सोंजा मुंडा द्वारा झाड़ी काटने के दौरान शिवलिंग मिला था. उससे दूध की धारा निकलने लगी थी. इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी जानकारी गांव के जमींदार जगमोहन सिंह को दी. इस घटना के बाद उक्त स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया. साथ ही प्रत्येक वर्ष यहां विशाल मेला का भी आयोजन किया जाता है.

ग्रामीणों ने छऊ नृत्य का लिया आनंद

बंदगांव में आयोजित मंडा मेला के दौरान गुरुवार रात छऊ नृत्य का आयोजन किया गया. जहां पश्चिमी बंगाल एवं सरायकेला-खरसावां के सुप्रसिद्ध छऊ नृत्य कलाकरों ने एक से बढ़कर पौराणिक कथाओं पर आधारित छऊ नृत्य पेश किये. जहां पश्चिमी बंगाल के चितरंजन कुमार व टीम, सरायकेला-खरसावां के सुधीर कुमार व उनकी टीम ने छऊ नृत्य से सभी लोगों का मन मोह लिया.

मंडा मेले में ग्रामीणों की उमड़ी भीड़

बंदगांव बाजार परिसर में लगे मंडा मेला के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी. यहां खानपान के अलावे जरुरत के सामानों के दुकान, मनोरंजन के साधन, तरह-तरह के झुले लगाये गये थे.जहां बड़ों के साथ-साथ बच्चों ने भी झुले व मनोरंजन के साधनों का आनंद उठाया.

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