Ranchi : भ्रामक विज्ञापन दिखाकर लोगों को गुमराह करने पर पतंजलि का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. लेकिन इस केटेगरी में कई और भी दवा कंपनियां हैं. दरअसल भ्रामक विज्ञापन को लेकर पतंजलि आयुर्वेद को सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में लताड़ लगाई है. साथ ही कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालाकृष्णा को माफी मांगने का भी आदेश दिया है. 23 अप्रैल को मामले की सुनवाई फिर होगी. ऐसे ही एक अन्य मामले को लेकर रांची के प्रख्यात व युवा डॉ अनुज ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट डाला है. जिसे पढ़कर सोचने और जागरूक होने की जरूरत है. https://twitter.com/dranuj_k/status/1781895812810981745
डॉ अनुज ने लिखा है, Auric नाम की एक कंपनी है जो ख़ुद आयुर्वेदिक न्यूट्रास्यूटिकल प्रोडक्ट बनाती है. इस कंपनी के विज्ञापन में दावा किया गया है कि 60 दिनों के भीतर ये फैटी लिवर को पूरी तरीके से ठीक कर देती है. ये सिगरेट और अन्य नशीली चीजों की वजह से हुए लंग्स की समस्या को भी पूर्णतः ठीक करने का दावा करती है. ये खुद के प्रोडक्ट्स को Nutraceuticals केटेगरी में कहने का दावा करती है. इनका कहना है कि इन्होंने काफी रिसर्च करने के बाद ये प्रोडक्ट्स मार्केट में उतारे हैं. अगर ये nutraceuticals हैं तो ये बीमारी ठीक करने का दावा कैसे कर रही? क्या ये भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में नहीं आता. जब इनसे रिसर्च शेयर करने को कहा गया तो इन्होंने कहा कि इनके पास amazon पे रिव्यूज हैं. क्या amazon और गूगल के रिव्यू इनके लिए रिसर्च आर्टिकल हैं? @fssaiindia की क्या मज़बूरी है कि इन सब भ्रामक कंपनियों को लोगों के स्वास्थ्य से खेलने की खुली छूट दी हुई है? इसे भी पढ़ें - क्या">https://lagatar.in/has-the-hindi-medium-of-civil-services-examination-become-a-matter-concern/">क्या
चिंताजनक बन गई है सिविल सेवा परीक्षा का हिंदी माध्यम? [wpse_comments_template]
डॉ अनुज ने लिखा है, Auric नाम की एक कंपनी है जो ख़ुद आयुर्वेदिक न्यूट्रास्यूटिकल प्रोडक्ट बनाती है. इस कंपनी के विज्ञापन में दावा किया गया है कि 60 दिनों के भीतर ये फैटी लिवर को पूरी तरीके से ठीक कर देती है. ये सिगरेट और अन्य नशीली चीजों की वजह से हुए लंग्स की समस्या को भी पूर्णतः ठीक करने का दावा करती है. ये खुद के प्रोडक्ट्स को Nutraceuticals केटेगरी में कहने का दावा करती है. इनका कहना है कि इन्होंने काफी रिसर्च करने के बाद ये प्रोडक्ट्स मार्केट में उतारे हैं. अगर ये nutraceuticals हैं तो ये बीमारी ठीक करने का दावा कैसे कर रही? क्या ये भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में नहीं आता. जब इनसे रिसर्च शेयर करने को कहा गया तो इन्होंने कहा कि इनके पास amazon पे रिव्यूज हैं. क्या amazon और गूगल के रिव्यू इनके लिए रिसर्च आर्टिकल हैं? @fssaiindia की क्या मज़बूरी है कि इन सब भ्रामक कंपनियों को लोगों के स्वास्थ्य से खेलने की खुली छूट दी हुई है? इसे भी पढ़ें - क्या">https://lagatar.in/has-the-hindi-medium-of-civil-services-examination-become-a-matter-concern/">क्या
चिंताजनक बन गई है सिविल सेवा परीक्षा का हिंदी माध्यम? [wpse_comments_template]
Leave a Comment