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पलामू में खड़े करोड़ों के स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमार, केंद्रों में न डॉक्टर, न स्टाफ, लटक रहे ताले

Sanjeet Yadav Palamu: राज्य में एक तरफ जहां अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ रही है. करोड़ों खर्च कर नए-नए अस्पताल भवन तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टर, नर्स, पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की ओर किसी का ध्यान नहीं. इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है. ग्रामीण या तो झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे हैं या इक्का-दुक्का स्वास्थ्य केंद्रों में मौजूद कंपाउंडर या दूसरे छोटे कर्मचारियों के भरोसे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , स्वास्थ्य उप केंद्र खुले, करोड़ों के भवन भी बने, लेकिन न तो डॉक्टर की नियुक्ति हुई, न पारा मेडिकल स्टाफ की. अस्पताल भवन खड़े हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को मुंह चिढ़ा रहे हैं. ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेवार अफसरों से चिकित्सक, पारा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की मांग करते-करते थक गए, लेकिन किसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी अस्पताल भवन बनवाने और दवाओं की खरीदारी को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं. मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देने पर उनका ध्यान ही नहीं जाता है. ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल का रुख करना पड़ता है या रिम्स, रांची जाना पड़ता है. कई दफा तो गंभीर मरीजों की रास्ते में जान चली जाती है. इसे भी पढ़ें:  फिल्म">https://lagatar.in/film-review-along-with-the-emotional-thriller-the-harsh-reality-was-also-seen-in-the-film-lohardaga/">फिल्म

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चिकित्सकों की भारी कमी, जितनी जरूरी, उससे कम संख्या

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alt="" width="600" height="400" /> पलामू जिले में 171 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां चिकित्सकों के 171 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र 84 कार्यरत हैं .वहीं अगर चिकित्सा पदाधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों की बात करें, तो कुल स्वीकृत 195 पदों के विरुद्ध वर्तमान में मात्र 69 कार्यरत हैं. चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों की कमी के कारण कई स्वास्थ्य केंद्रों मे ताले लटके रहते हैं. ग्रामीण क्षेत्र के लोग बीमार पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र तो पहुंचते हैं, लेकिन केंद्र में ताला लटकता देख या तो वापस लौट जाते हैं या झोलछाप डॉक्टरों से दवा ले लेते हैं. कई दफा झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से मरीज का मर्ज बढ़ता ही जाता है और हालत गंभीर होने पर उनकी जान भी चली जाती है. जिला अस्पताल तक पहुंचने के लिए गांव के मरीजों के पास न तो पैसे होते हैं और न साधन. स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का इस ओर ध्यान दिलाने के बावजूद वे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं और यह कह कर खानपूर्ति कर दते हैं कि सरकार को लिखा गया है. इसे भी पढ़ें:घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-fire-broke-out-in-sand-laden-highway-burnt-to-ashes/">घाटशिला

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सिविल सर्जन बोले- डॉक्टरों की कमी तो है, सीएचओ से काम चलाएंगे

सिविल सर्जन का कहना है कि जिले में डॉक्टरों की कमी तो है. लेकिन ग्रामीण स्तर पर उप स्वास्थ्य केंद्रों में सरकार द्वारा सीएचओ की बहाली की गयी है, जिनकी ट्रेनिंग चल रही है. जल्द ही सभी को स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया जाएगा. अगर प्रखंड में स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद मिलते हैं या फिर किसी केंद्र पर से डॉक्रटर या पारा मेडिकल कर्मी गायब मिलते हैं या केंद्र पर ताला लटका रहता है, तो जिम्मेवारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई भी की जाएगी. इसे भी पढ़ें:  नया">https://lagatar.in/new-controversy-tribal-leaders-and-organizations-opposed-shankaracharya-sadanand-saraswatis-statement/">नया

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