Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

पड़ताल : हजारीबाग के कार्यपालक दंडाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर पर थानेदार ने किया था FIR

Advertisement
Advertisement
Hazaribagh :  हज़ारीबाग़ के बड़कागांव थाना में कांड संख्या 135/16 को तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के फर्जी हस्ताक्षर पर तत्कालीन थाना प्रभारी रामदयाल मुंडा ने किया था. कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा ने कोर्ट बयान में यह स्वीकार किया है कि उनके लिखित आवेदन को बदलकर थानेदार ने अपने मुंशी से टाइप करवाकर एफआईआर किया था. रांची सिविल कोर्ट के एडीजे-7 विशाल श्रीवास्तव की कोर्ट में बहस के दौरान कांड में मंटू सोनी के अधिवक्ता अभिषेक कृष्ण गुप्ता ने बहस के दौरान लिखित तौर पर दिए आवेदन में पुलिस की तरफ से उक्त केस में की गई गलतियों को विस्तार से रखा है. कोर्ट में बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 के एफआईआर में सूचक कुमुद झा के हस्ताक्षर और कोर्ट में दिए गवाही के बाद किए हस्ताक्षर को दिखाया और मिलान कराया गया. एफआईआर में शॉर्ट सिग्नेचर और गवाही में लॉन्ग सिग्नेचर किया गया है. 17 मई 2016 को बड़कागांव में एनटीपीसी के द्वारा खनन चालू किए जाने के दिन पुलिस-पब्लिक में हुई झड़प के दौरान बड़कागांव के तत्कालीन थानेदार रामदयाल मुंडा की काली करतूत रांची एडीजे 7 विशाल श्रीवास्तव की कोर्ट में ट्रायल के दौरान हुई गवाही के बाद खुल कर सामने आ गई है. मंटू सोनी की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक कृष्ण गुप्ता और विमल कुमार के दिए पिटीशन में खुलासा हुआ है कि रामदयाल मुंडा ने एक ही मामले को लेकर हुई तीन झड़प को लेकर तीन अलग-अलग एफआईआर बड़कागांव थाना कांड संख्या 134/16,135/16,136,16 दर्ज करवाया था. [caption id="attachment_276273" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/03/haz.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 के पहले पन्ने पर सूचक तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा का हस्ताक्षर[/caption]

दंडाधिकारी कुमुद झा के आवेदन को बदल जोड़ दिया था अभियुक्तों का नाम

बड़कागांव के तत्कालीन थानेदार रामदयाल मुंडा ने तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद कुमार झा द्वारा थाना में दिए आवेदन को बदलकर थाना के मुंशी से मंटू सोनी व अन्य अभियुक्तों के नाम लिखवाकर कुमुद झा से हस्ताक्षर करवा लिया था. कुमुद झा ने कांड संख्या 135/16 में ट्रायल के दौरान कोर्ट में दिए गवाही में स्वीकार किया है. जिसमें उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा थाना में दिए आवेदन में दो लोगों का नाम था. थाना प्रभारी ने मेरे आवेदन को हटाकर मुंशी से अन्य लोगों का नाम लिखवाकर हस्ताक्षर करवा लिया था. [caption id="attachment_276274" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/03/haz2.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> कोर्ट में गवाही में कुमुद झा का सिग्नेचर, जो एफआईआर में किए सिग्नेचर से अलग है[/caption]

जमादार के आवेदन देने से आधा घंटे पहले थानेदार ने कर दिया एफआईआर

उरीमारी के तत्कालीन एएसआई लाल बहादुर सिंह ने कांड संख्या 135/16 के गवाही में यह कहा है कि उसी घटना को लेकर मेरे से भी एक अलग केस करवाया गया है. जिसमें थाना के चौकीदार से नाम पूछकर अभियुक्त बनाया गया था. केस करने के लिए उसके द्वारा रात नौ बजे थाना में आवेदन देने की बात कही गई है, लेकिन थाना के रिकॉर्ड में लालबहादुर सिंह के बयान पर दर्ज कांड संख्या 136/16 के एफआईआर में समय 8:30 बताया गया है. [caption id="attachment_276276" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/03/haz3.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> गवाही में कुमुद झा का बयान 23 नंबर में लिखकर कहा है घटना की जानकारी दिया था, लेकिन लिखित दस्तावेज कोर्ट में नही है. वहीं 26 और 27 नम्बर में उनके द्वारा दिए नामों के अलावे अन्य लोगों का नाम थानेदार द्वारा जोड़ दिए जाने की बात कही गई है और जांच के दौरान कोई बयान नही लिए जाने का जिक्र किया गया है.[/caption]  

307 और 333 जैसी धारा लगा खुद घायल बता बन गया अनुसंधानकर्ता, सबूत जुटा नही पाया

[caption id="attachment_276279" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/03/haz5.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> प्राथमिकी और गवाही में कुमुद झा के अलग-अलग सिग्नेचर की जानकारी लिखित में कोर्ट को दिया गया.[/caption] तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के शिकायत पर दर्ज कांड संख्या 135/16 में रामदयाल मुंडा को घायल बताया, फिर भी रामदयाल मुंडा शिकायत पत्र बदलवाकर केस किया और खुद अनुसंधानकर्ता बन गया. केस मे में 307 और 333 जैसी धाराएं भी लगा दिया. लेकिन अनुसंधान में रामदयाल मुंडा और दुसरे आईओ अकील अहमद 307 और 333 के सबूत पेश नही कर सके और कोर्ट में उक्त धाराओं के साथ अन्य धाराओं में चार्जशीट दायर कर दिया. केस का ट्रायल चालू होने पहले मंटू सोनी सहित अन्य के डिस्चार्ज लिटीशन पर कोर्ट ने धारा 307,333 हटा दिया था.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही