Ghatshila (Rajesh Chowbey) : घाटशिला प्रखंड के काड़ाडुबा पंचायत अंतर्गत केंदोपोषी गांव रविवार को हूल दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया. इस मौके पर सिदो मुर्मू, कान्हू मुर्मू, चांद मुर्मू, भैरव मुर्मू, फूलो मुर्मू, झानो मुर्मू, समेत संथाल विद्रोह के शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया. मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू ने कहा कि हुल दिवस आदिवासी समाज के साहस, संघर्ष व बलिदान के समर्पण का प्रतीक है. कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि आसना के मुखिया मानसिंह हेम्ब्रम व बांकी के मुखिया फागु सोरेन ने भी सम्बोधित किया. मौके पर भादो मांडी, सुनील टुडू, राजकुमार पातर, दुर्गा दंडपात, राजीव टुडू, बिशू टुडू, शीलू टुडू, तपन टुडू, सलमा बास्के, जोबा मुर्मू, पार्वती टुडू, सुजीत मानकी, सिमल टुडू, उदय टुडू, फुकारा मुर्मू समेत अनेक लोग उपस्थित थे.
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हूल दिवस पर गीत-संगीत सहित कई प्रतियोगिताएं आयोजित

जादूगोड़ा : जादूगोड़ा समेत सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के ग्वालकाटा पंचायत अंतर्गत चंदनपूर में भी वीर शहीद सिदो-कान्हू को याद किया गया. इस मौके पर माझी बाबा रघु सोरेन की अगुवाई में कार्यक्रम आयोजित किया गया. जहां उनकी प्रतिमा पर गांव के माझी बाबा रघु सोरेन, नायके बाबा छोटराय सोरेन, रायमणि सोरेन, खेला राम हेंब्रम, जोबा टुडू, जोबा सोरेन, देवला सोरेन, जयंती, अर्जुन, गौरी, सुरेश, करण माझी, लखन सोरेन ने माल्यार्पण कर नमन किया व श्रद्धांजलि दी. समारोह को संबोधित करते हुए जोबा टुडू ने कहा कि 1855 में वीर शहीद सिदो-कान्हू ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी. इस संघर्ष में हजारों आदिवासी शहीद हुए. जिसे आज भी हूल दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसके पूर्व गांव में भाषण व गीत-संगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया व प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया.
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चांडिल के नारायण आईटीआई में मना हूल दिवस

Jamshedpur (Anand Mishra) : चांडिल के लुपुंगडीह स्थित नारायण आईटीआई में रविवार को हूल दिवस मनाया गया. इस दौरान सिदो-कान्हू की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया. इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक प्रो (डॉ) जटाशंकर पांडेय ने विद्यार्थियों को हूल का मतलब बताया. उन्होंने बताया कि आजादी यह पहला आंदोलन था. 30 जून 1855 को भोगनाडीह गांव जिला साहिबगंज में हजारों आदिवासी एकत्रितहोकर के अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका और उसका नेतृत्व सिदो-कान्हू, चंद-भैरव फूलो-झानू के नेतृत्व में 50 हजार आदिवासी सेनानियों ने तीर-धनुष के बल पर अंग्रेजों के बारूद और गोले को परास्त कर दिया था. इस अवसर पर अधिवक्ता निखिल कुमार, शांति राम महतो, पवन कुमार महतो, अरुण पांडेय, गौरव महतो, आदित्य गोप, मोहन सिंह सरदार, देब कृष्ण महतो, अजय मंडल समेत अन्य उपस्थित थे.
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