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अब बदल जाएगी जेल की प्रशासनिक संरचना, झारखंड कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक 2025 में किया गया है प्रावधान

 
Ranchi: सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान जेल में सुधार से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए थे. पहले की व्यवस्था में जेल को दंडात्मक माना जाता था. सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुधारात्मक बनाने का निर्देश दिया था. इस निर्देश के आलोक में राज्य सरकार ने झारखंड कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक 2025 तैयार कर बुधवार को सदन में पेश किया. झारखंड कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक में 24 अध्याय में कुल 89 बिंदुओं को शामिल किया गया है. इसमें कैदियों, जेल की सुरक्षा, जेल अधिकारियों के कर्तव्य, कैदियों से मुलाकात, एक जेल से दूसरे जेल में स्थानांतरण और नियमों के उल्लंघन करने पर जेल अधीक्षक द्वारा दी जाने वाली सजा का उल्लेख किया गया है.

प्रशासनिक व्यवस्था के तहत जेल में 14 तरह के रजिस्टर रखने का प्रावधान

विधेयक में कारा एवं सुधारात्मक सेवाओं को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए महानिरीक्षक, अपर महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक और सुधारात्मक अकादमी के निदेशक जैसे पदों पर अधिकारियों को पदस्थापित करने का प्रावधान किया गया है. जेल अधीक्षक को अनुशासन, नियंत्रण, दंड, श्रम, व्यय और सुधार से संबंधित विषयों के प्रबंधन की जिम्मेवारी दी गई है. जेल में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत 14 तरह के रजिस्टर रखने का प्रावधान किया गया है. इसमें सजायाफ्ता कैदियों के लिए प्रवेश पंजी, विचाराधीन कैदियों के लिए प्रवेश पंजी, कारामुक्त किए जाने वाले कैदियों के लिए रजिस्टर, लॉकअप पंजी, गेट रजिस्टर, रोकड़ बही, स्टॉक बुक सहित अन्य प्रकार के रजिस्टर शामिल हैं.

नौ श्रेणी में कैदियों को बांटने का किया गया है प्रावधान

बंदियों को उनकी उम्र सुरक्षा जोखिम आदि के अनुसार अलग-अलग जगहों में रखने के लिए कैदियों को नौ श्रेणी में बांटा गया है. इसमें सिविल बंदी, पुरूष सजायाफ्ता बंदी, पुरूष विचाराधीन बंदी, महिला बंदी, युवा अपराधी, विदेशी बंदी, विशेष कमजोरी वाले बंदी, संक्रामक रोग से पीडिंत बंदी और कोरेनटाइन में रखा गया बंदी शामिल है. सुरक्षा के दृष्टि कोण से कैदियों को पांच श्रेणी में बांटा गया है. अधिकतम सुरक्षा वाला, कम सुरक्षा वाला, प्रशासनिक अलगाव के लिए बंदी, मध्यम सुरक्षा बंदी और न्यूनतम सुरक्षा बंदी शामिल हैं.

कारा अधीक्षक के अधिकार में वृद्धि का प्रावधान

जेल में कैदियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर कारा अधीक्षक को दंडित करने का अधिकार दिया गया हैजिन कामों को नियम विरूद्ध माना जाएगा, उसकी सूची में जानबूझ कर नियमों का उल्लंघन करना, हमला करना, अपमान जनक भाषा का प्रयोग करना, अभद्र व्यवहार करना, हथकड़ी या सलाखों को रगड़ना या काटना, बीमारी का बहाना बनाना, जेल से भागने की साजिश रचना, जेल अधिकारी पर खिलाफ साजिश रचने, उस पर हमला करने या जेल से किसी के भागने की जानकारी रहने पर सक्ष्म अधिकारी को इसकी सूचना नहीं देना भी अपराध की श्रेणी में माना जाएगा. इस तरह के ममलों में जेल अधीक्षक ऐसे कैदियों को एक साल तक पेरोल देने पर रोक लगा सकते हैं. तीन महीने की अवधि के लिए अलग कमरे में रख सकते हैं. 14 दिन के लिए सेलुलर जेल में रख सकते हैं. या एक महीने तक कैंटिन की सुविधा पर रोक लगा सकते हैं.

इन चीजों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखने का प्रावधान

जेल के अंदर नशीले पदार्थों को प्रतिबंधित किया गया है. प्रतिबंधित सांमग्रियों की सूची में शराब या नशीला पदार्थ, तंबाकू, गांजा, अफीम,या कोई नशीला पदार्थ या जहरीली चीजें प्रतिबंधित रहेंगी. इसके अलावा आग जलाने के लिए सामग्री गोल्ड, रूपया, जेवर, सहित अन्य कीमती चीजें प्रतिबंधित रहेंगी. इसके अलावा चाकू, हथियार, रस्सी, तार, बॉस, सीढ़ी, लाठी या ऐसी दूसरे चीजें या उपकरण जिससे जेल से भागने में आसानी हो, वैसी चीजें भी प्रतिबंधित रहेंगे। मोबाइल, सिम, डिजिटल कैमरा, पेन ड्राइव, कार्ड रीडर, कोई भी एप्लीकेशन, सॉफ्टवेयर डॉर्क वेबसाइट, मैसेंजर, सोशल मीडिया एप्लीकेशन को प्रतिबंधित किया गया है. जेल में ड्रोन या उड़ने वाली ऐसी चीजें जिसे दूर से नियंत्रित किया जा सकता हो, उसे भी प्रतिबंधित किया गया है. इसे भी पढ़ें – लोकसभा">https://lagatar.in/lok-sabha-rahul-gandhi-said-i-am-not-allowed-to-speak-only-the-governments-views-are-heard/">लोकसभा

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