Bermo: पंचायत चुनाव में इस बार गोमिया प्रखंड के कई पंचायतों में पानी की समस्या मुख्य मुद्दा था. इसे लेकर मतदाता काफी गंभीर थे. इसी मुद्दे पर उन्होंने वोट भी दिया. मतदाताओं ने नये प्रत्याशी को चुना और पुराने मुखिया को बदल दिया. अब लोगों की निगाहें नये मुखिया पर टिकी हैं. दरअसल गोमिया में पानी की समस्या आजादी के समय से ही रही है. वैसे गोमिया के शहरी क्षेत्रों में सभी पंचायतों में पानी की टंकी बनी है. सरकार की नयी नीति के तहत उस पानी टंकी का संचालन वाटसन समिति यथा ग्रामीण और पंचायत के जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है. इसके लिए पानी के उपभोक्ताओं से न्यूनतम राशि वसूली जाती है. इसका देखरेख वाटसन समिति करती है. लेकिन दुर्भाग्यवश पानी का संचालन सही तरीके से नहीं हो पाती है. इससे ग्रामीणों को पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती है. यहां तक की कुछ पंचायतों में एक सप्ताह में एक दिन और कहीं-कहीं महीने में एक दिन पानी की आपूर्ति होती है. वैसे गोमिया प्रखंड के पलिहारी गुरुडीह, गोमिया, हजारी, गंझूडीह, स्वांग, करमटिया और बांध पंचायत के टड़ियापार सहित अन्य टोलों में पानी का संकट है. पानी की समस्या से सबसे ज्यादा महिलाओं को परेशानी होती है. लिहाजा पलिहारी गुरुडीह, हज़ारी और बांध पंचायत की जनता ने नये मुखिया को वोट देकर विजयी बनाया है. अब ग्रामीणों की अपेक्षा नये मुखिया से बढ़ गई है. लेकिन पानी की समस्या इतनी जल्दी दूर होने वाली नहीं है. बांध पंचायत के निवासी मणिलाल सिंह ने कहा कि बांध जलापूर्ति योजना से उनके मोहल्ले में पानी ही नहीं पहुंचती है. जो समस्या पहले थी वह अभी भी है. उनका कहना है कि पंचायत के प्रतिनिधि बदलने से तुरंत समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा. यह समझा जा सकता है, लेकिन उस पर पहल भी तो किया जाना चाहिए, जो नहीं हो रहा है. इसे भी पढ़े- राज्यसभा">https://lagatar.in/rajya-sabha-elections-mahua-maji-filed-nomination-in-the-presence-of-hemant-solidarity-seen-in-jmm-congress-stayed-away/">राज्यसभा
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