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अंधकार में भविष्य: राजकीय फार्मेसी के लिए12 पद स्वीकृत, 5 प्रोफेसर-लेक्चरर से चल रहा काम

  • -लेक्चरर के जितना ही प्रिंसिपल को मिल रहा वेतन
  • -पीसीआई द्वारा निर्धारित है 10 हजार ग्रेड पे, झारखंड में 6600
  • -10 साल में फार्मेसी कॉलेज प्रबंधन द्वारा 50 बार से अधिक मानदेय बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग व सरकार को लिखा है पत्र
Ranchi: राजकीय फार्मेसी कॉलेज में पढ़ रहे स्टूडेंट्स का भविष्य अंधकारमय है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां स्वीकृत पद की तुलना में आधे भी टीचिंग स्टाफ नहीं हैं. स्वास्थ्य विभाग ने 8 पद सृजित किए हैं. इसमें 1 प्राध्यापक, 4 लेक्चरर, 1 कार्यालय अधीक्षक व 2 लैब टेक्नीशियन हैं. जबकि नॉन टीचिंग में कंप्यूटर ऑपरेटर 1, मोटरयान चालक 1, माली और सफाईकर्मी के 1-1 पद हैं. नॉन टीचिंग के पद को आउटसोर्स से भरा जाना है. जबकि फार्मेसी कॉलेज में वर्तमान में 1 प्राध्यापक और 3 लेक्चरर की कार्यरत हैं. न ही यहां कार्यालय अधीक्षक और न ही लैब टेक्नीशियन हैं. ऐसे में हर साल यहां 60 स्टूडेंट डिप्लोमा में नामांकन कराते हैं. पढ़ाई नहीं होने के कारण रिजल्ट में इसका असर दिखता है. पिछले कुछ सालों से पेपर लीक के कारण स्टूडेंट्स अच्छे नंबर से पास हो जाते थे, लेकिन 2023 में आए परिणाम ने पोल खोल दी. दो-तीन स्टूडेंट्स भी पास नहीं हो सके. इससे पूर्व कई बार ऐसी भी शिकायत मिलती रही है कि स्टूडेंट्स अपनी उत्तर पुस्तिका में हनुमान चालीसा और गाने लिख डाले थे, कईयों की कॉपी में तीन-चार अलग-अलग हैंडराइटिंग थे. इसे पढ़ें-सौरव">https://lagatar.in/sourav-praises-shubman-gill-for-his-brilliant-batting-rcb-fans-furious-for-not-praising-virat/">सौरव

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10 साल पहले ही PCI ने बढ़ाया मानदेय, झारखंड में अबतक पुराना मानदेय ही मिल रहा

झारखंड फार्मेसी कॉलेज की सरकार भी पूरी तरह अनदेखी कर रही है. क्योंकि यहां स्टाफ कम हैं, इसलिए सरकार व विभाग ध्यान नहीं दे रहे. 10 साल पहले फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने देश भर में मानदेय निर्धारित की थी. निर्धारित मानदेय के अनुसार, प्रोफेसर रैंक को 37600-67000 पे-लेवल पर 10 हजार ग्रेड पे दिया जाना है. जबकि लेक्चरर को 9300-34800 में 6000 ग्रेड पे मिलना है. वहीं, झारखंड में प्राध्यापक को 15600-39100 में 6600 ग्रेड पे दिया जा रहा है. लेक्चरर को 5400 ग्रेड पे मिलेगा. इसे भी पढ़ें-गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-thieves-took-away-inverters-and-batteries-in-shubham-sandesh-office/">गिरिडीह

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10 साल में 50 से अधिक बार कर चुके हैं पत्राचार

राजकीय फार्मेसी काॅलेज प्रबंधन द्वारा पिछले 10 साल में वेतनमान बढ़ाने के लिए 50 बार से ज्यादा पत्राचार किया जा चुका है. बावजूद न ही सरकार रुचि ले रही है और ना ही स्वास्थ्य विभाग. थक हार कर अब कोर्ट का सहारा लिया गया है. बताते चले कि फार्मेसी काउंसिल के गजट ऑफ इंडिया 2014 और 2020 में स्पष्ट लिखा है कि शिक्षण कर्मियों का वेतनमान समान श्रेणी के पदों के लिए राज्य सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अखिल भारतीय तकनीक शिक्षा परिषद द्वारा निर्धारित वेतनमान से कम नहीं होगा. [wpse_comments_template]

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