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अयोध्या में रामलला का भव्य सूर्य तिलक किया गया... पीएम मोदी ने कहा, अद्भुत और अप्रतिम क्षण देखने का सौभाग्य मिला

असम में सभा को संबोधित करने के बाद पीएम ने  हेलीकॉप्टर में इस अभिषेक को अपने टैब पर देखा. इस दौरान पीएम मोदी भावुक दिखे. उन्होंने अपने जूते उतार रखे थे Ayodhya : आज रामनवमी के पावन अवसर पर अयोध्या के राम मंदिर में पूजा की विशेष व्यवस्था की गयी थी. दोपहर 12 बजे रामलला की प्रतिमा के माथे का सूर्य की किरण से अभिषेक किया गया. प्रंदिर प्रबंधन द्वारा 5.8 सेंटीमीटर प्रकाश की किरण के साथ रामलला का सूर्य तिलक किया गया. इस अवसर पर 10 भारतीय वैज्ञानिकों की टीम राम मंदिर में तैनात थी. जानकारी दी गयी कि दोपहर 12 बजे से लगभग 3 से 3.5 मिनट तक दर्पण और लेंस का प्रयोग कर प्रतिमा के माथे का सूर्य की किरण से अभिषेक किया गया.                              ">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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श्रीराम जन्मभूमि का ये बहुप्रतीक्षित क्षण हर किसी के लिए परमानंद का क्षण है.

पीएम मोदी ने कहा कि नलबाड़ी(असम) की सभा के बाद मुझे अयोध्या में रामलला के सूर्य तिलक के अद्भुत और अप्रतिम क्षण को देखने का सौभाग्य मिला. श्रीराम जन्मभूमि का ये बहुप्रतीक्षित क्षण हर किसी के लिए परमानंद का क्षण है. ये सूर्य तिलक, विकसित भारत के हर संकल्प को अपनी दिव्य ऊर्जा से इसी तरह प्रकाशित करेगा. जान लें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे. सभा को संबोधित करने के बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर में इस अभिषेक को अपने टैब पर देखा. इस दौरान पीएम मोदी भावुक दिखे. उन्होंने अपने जूते उतार रखे थे, वे एक हाथ अपने सीने से लगाकर रामलला की आराधना करते दिखे.

ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम के तहत रामलला का सूर्य तिलक किया गया

एनडीटीवी ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई), रूड़की के वैज्ञानिक और निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार रामचार्ला के हवाले से कहा कि ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम के तहत रामलला का सूर्य तिलक किया गया. निदेशक ने कहा कि ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम में चार दर्पण और चार लेंस होते हैं, जो पाइपिंग सिस्टम के अंदर फिट होते हैं. एक एपर्चर के साथ पूरा कवर ऊपरी मंजिल पर रखा जाता है, ताकि दर्पण और लेंस के माध्यम से सूर्य की किरणों को गर्भ गृह की तरफ मोड़ा जा सके.

दर्पण और लेंस की क्वालिटी काफी उच्च है. यह लंबे समय तक टिकी रहेगी 

उन्होंने बताया, अंतिम लेंस और दर्पण पूर्व की ओर मुख किये हुए श्री राम के माथे पर सूर्य की किरणों को केंद्रित किया गया. सूर्य की किरणों को उत्तर दिशा की ओर दूसरे दर्पण की ओर भेजकर सूर्य तिलक बनाया गया. डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा कि दर्पण और लेंस की क्वालिटी काफी उच्च है. यह लंबे समय तक टिकी रहेगी. पाइप के अंदर की सतह काले पाउडर से रंगी गयी है, जिससे सूर्य की किरणें बिखरने नहीं पायं. सूर्य की गर्मी की तरंगों को मूर्ति के माथे पर पड़ने से रोकने के लिए एक इन्फ्रारेड फिल्टर ग्लास का उपयोग किया गया. वैज्ञानिक की टीम में सीबीआरआई, रूड़की और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईएपी), बेंगलुरु के वैज्ञानिक भी शामिल थे. टीम ने सौर ट्रैकिंग के स्थापित सिद्धांतों का प्रयोग कर मंदिर की तीसरी मंजिल से गर्भ गृह तक सूर्य की किरणों के सटीक संरेखण को व्यवस्थित किया. भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान से तकनीकी सहायता और बेंगलुरु स्थित कंपनी ऑप्टिका ने पूरी प्रक्रिया में सहायता की. [wpse_comments_template]  

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