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अमेरिका के एक फैसले से रुपया में रिकॉर्ड गिरावट, 80.11 रुपये के निचले स्तर पर पहुंची करेंसी

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LagatarDesk : अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयान से दुनियाभर के बाजारों में उथल-पुथल मच गयी है. भारतीय शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी मार्केट भी इससे अछूता नहीं है. वहीं मुद्रा विनिमय बाजार में भी भारतीय करेंसी रुपये पर दबाव देखने को मिल रहा है. इसके कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. (पढ़ें, लालू">https://lagatar.in/lalu-family-cooled-many-people-got-my-husband-murdered-too-bjp-mp-rama-devi/">लालू

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24 पैसे गिरकर 80.11 पर पहुंचा रुपया

सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे गिरकर 80.11 रुपये पर पहुंच गयी. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 80.10 पर खुला था. लेकिन बाद में यह गिरकर 80.15 पर आ गया था. इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.51 प्रतिशत बढ़कर 109.35 पर आ गया. इसे भी पढ़ें : क्रिप्टो">https://lagatar.in/crypto-mcap-fell-below-1-trillion-avalanche-fell-9-percent-in-24-hours-all-currencies-on-the-red-mark/">क्रिप्टो

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2022 में अबतक 7 फीसदी कमजोर हुआ रुपया

मालूम हो कि शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 79.84 पर बंद हुआ था. इससे पहले जुलाई में रुपया का सबसे निचला स्तर 80.06 डॉलर था. 2022 में अभी तक डॉलर के मुकाबले रुपया में 7 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. दरअसल जेरोम पॉवेल ने कहा कि महंगाई के काबू में आने तक ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी जारी रहेगी. 8 मिनट के भाषण में पॉवेल ने सिर्फ एक बात पर जोर दिया कि महंगाई दर 2 फीसदी तक आने तक ब्‍याज दरें बढ़ती रहेंगी. यही कारण है कि आज अमेरिका, यूरोप और एशिया के ज्‍यादातर शेयर बाजारों में गिरावट का माहौल है. इसे भी पढ़ें : अंकिता">https://lagatar.in/ankita-murder-case-babulal-marandi-accuses-dsp-noor-mustafa-of-protecting-accused-shahrukh/">अंकिता

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सस्ते पेट्रोल-डीजल के लिए लोगों को करना होगा इंतजार

रुपये में आयी गिरावट का असर आम लोगों पर देखा जा सकता है. महंगाई दर के रूप में तो यह पहले से देखा जा रहा है. रुपये में गिरावट आने से किसी भी कमोडिटी का आयात करने के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं. बता दें कि भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है. यह अपनी जरुरत का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. रुपया कमजोर होने से भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने होंगे. इससे सरकारी खजाने पर बोझ बना रहेगा. जिसके कारण आम लोगों को सस्ता पेट्रोल-डीजल के लिए इंतजार करना पड़ेगा. इसे भी पढ़ें : शेयर">https://lagatar.in/there-was-chaos-in-the-stock-market-sensex-fell-1466-points-tech-mahindra-shares-fell-4-66-percent/">शेयर

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