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फिर सिर उठाता खालिस्तानी आंदोलन

Vijay Kesari पंजाब प्रांत में खालिस्तानी आंदोलन, जिस रूप में बढ़ता चला जा रहा है, यह देश की एकता और अखंडता के लिए एक बड़ा खतरा बनता चला जा रहा है. खालिस्तानी आंदोलन धीरे धीरे कर अपने पुराने स्वरूप में लौटता दिख रहा है. एक अलग खालिस्तान देश की मांग के नाम पर पंजाब में जो कुछ भी हो रहा है, यह एक प्रकार से देश की अखंडता को रौंदने के समान है. इससे देश की एकता और अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. अमृतपाल सिंह, `वारिस पंजाब दे` संगठन के स्वयंभू नेता हैं. अमृतपाल सिंह खालिस्तान अलग देश के नाम पर अपने साथियों के साथ जो कुछ भी कर रहे हैं, इसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. अमृतपाल सिंह, देश के लिए दूसरा जनरैल सिंह भिंडरावाले बन चुके हैं. ये अपने बंदूकधारी साथियों के साथ खुलेआम जनसभाएं कर रहे हैं. खुलेआम भारत सरकार को चुनौती दे रहे हैं. वे खुले रूप से खालिस्तान के नाम पर पंजाब को भारत से अलग कर एक नया देश बनाने की बात कर रहे हैं. वहीं प्रांत की सरकार चुपचाप धृतराष्ट्र बनकर यह सब होने दे रही है. फलस्वरूप अमृतपाल सिंह की गतिविधियां बढ़ती चली जा रही हैं. अमृतपाल सिंह के साथ खड़ी भीड़ बताती है कि खालिस्तानी आंदोलन जोर पकड़ता चला जा रहा है. अमृतपाल सिंह को कनाडा, पाकिस्तान और ब्रिटेन में बैठे खालिस्तानी समर्थकों द्वारा फंडिंग की जा रही है. अब यह बात किसी से छुपी नहीं रह गई हैं. पाकिस्तान, भारत से अलग होने के बाद लगातार भारत में अशांति फैलाता चला रहा है. आज पंजाब में जो कुछ भी हो रहा है, उसमें पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी समर्थकों और गुप्त रूप से पाकिस्तानी सेना और सरकार में भी शामिल है. अमृतपाल सिंह का मन बहुत बढ़ता चला जा रहा है. अमृतपाल सिंह ने हथियार से लैस अपने साथियों के साथ बीते 23 फरवरी को लवप्रीत सिंह उर्फ तूफान सिंह को छुड़ाने के लिए अजनाला थाना को जिस प्रकार से रौंदा, इससे प्रतीत होता है कि वह कितना निरंकुश और स्वयं को ताकतवर समझने लगा है. हजारों की भीड़ लेकर, पुलिस बैँरेकेटिंग तोड़ कर थाना में घुस जाना और कई पुलिसकर्मियों को गंभीर रूप से घायल कर देना, यह कोई छोटी घटना नहीं है. जबकि इस जुलूस के निकलने की जानकारी अमृतसर के जिला कलेक्टर सहित पुलिस के पदाधिकारियों को थी. तब अमृतसर के जिला कलेक्टर और पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ धरे क्यों रहें? जबकि वहां का पुलिस प्रशासन चाहता तो अमृतपाल सिंह के उग्र जुलूस को थाने से बहुत पहले रोक सकता था. लेकिन ऐसा नहीं कर वहां का जिला और पुलिस प्रशासन ने खुद को कटघरे में खड़ा कर लिया है. पंजाब में आप पार्टी की सरकार है. भारी बहुमत से पंजाब विधानसभा के चुनाव में आप पार्टी की जीत हुई थी. आप पार्टी की इस जीत पर देश के विभिन्न समाचार पत्रों में यह खबर भी प्रकाशित हुई थी कि आप पार्टी को खालिस्तानियों का समर्थन प्राप्त है. इस आरोप का आप पार्टी के चीफ अरविंद केजरीवाल ने जोरदार खंडन किया था. अब देश, अरविंद केजरीवाल से जवाब मांग रहा है कि पिछले दिनों पंजाब में जो कुछ भी हुआ, उसके लिए जवाबदेह कौन है? इस घटना को रोका भी जा सकता था. लेकिन क्यों नहीं रोका गया? जिस लवप्रीत उर्फ सिंह तूफान सिंह को अमृतसर की पुलिस ने बाइज्जत रिहा कर दिया. उस लवप्रीत सिंह पर एक व्यक्ति को किडनैप कर बुरी तरह मारने का आरोप है. वह इतने गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया गया था. यह कोई मामूली आरोप नहीं हैं. अगर देश के किसी भी थाने में इस तरह के आरोप में कोई व्यक्ति गिरफ्तार होता हो, तब क्या कोई भीड़ थाना पर हमला कर उस व्यक्ति को छुड़ा सकता है ? इसका जवाब नहीं है. `वारिस पंजाब दे` संगठन का प्रमुख अमृतपाल सिंह, खालिस्तान अलग देश के नाम पर जिस तरह देश तोड़ने वाली बातों को हवा दे रहा है, यह कतई देश के लिए अच्छी बात नहीं है. अमृतपाल सिंह जिस तेजी के साथ पंजाब में उभर रहे हैं, यह पंजाब सहित देश के लिए बहुत ही चिंता का विषय बनता चला जा रहा है. अमृतपाल सिंह, लवप्रीत सिंह को छुड़ाने के उपरांत जिस अंदाज में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में दस्तक दिया, अरदास किया, उसके बाद मीडिया को जिस अंदाज में अपनी बातों को रखा, उसका इरादा स्पष्ट रूप से देश को तोड़ने वाला है. अमृतसर के अजनाला थाना को अमृतपाल सिंह के समर्थकों द्वारा रोकने वाली घटना के दृश्यों को पूरा देश देख रहा है. पंजाब प्रांत में जो हालात बने हैं, उस हालात का एक ही राजनीतिक समाधान है केंद्र खालिस्तानी आंदोलन को जड़ से समाप्त करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए, ताकि फिर कोई पंजाब को खालिस्तान के नाम पर अलग देश बनाने की हिम्मत न जुटा पाए. पंजाब कल भी भारत का अभिन्न अंग था, आज भी अभिन्न अंग है. सिखों के बलिदान को कभी भी विस्मृत नहीं किया जा सकता है . ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सिखों ने जो बलिदान दिया, यह हमेशा संपूर्ण देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा. जालियांवाला बाग कांड, जिसमें हजारों की संख्या में सीखों ने अपनी शहादत दी थी, इसे कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता. आज उसी पंजाब में अमृतपाल सिंह, वारिस पंजाब दे, संगठन के नाम पर अलग खालिस्तान की मांग कर रहे हैं. अर्थात सिखों के बलिदान पर पानी फेर दे रहे हैं. भारत सरकार को पंजाब प्रांत पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की जरूरत है. खालिस्तानी आंदोलन को एक बड़े आंदोलन में तब्दील होने से रोका जाए. डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. [wpse_comments_template]

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