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विशेश्वर ओझा हत्याकांड : आठ साल बाद मुख्य आरोपी हरेश और ब्रजेश को सश्रम आजीवन कारावास, पांच अन्य को 10 साल की सजा

Arrah :  भोजपुर के 8 साल पुराने चर्चित विशेश्वर ओझा हत्याकांड में एडीजे 8 की कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने मुख्य आरोपी हरेश मिश्रा और ब्रजेश मिश्र को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. साथ ही दोनों पर 85-85 हजार का जुर्माना भी लगाया है. इसके अलावा अन्य पांच दोषियों (उमाकांत मिश्रा, टुन्नी मिश्रा, बसंत मिश्रा, हरेंद्र सिंह, पप्पू सिंह) को 10 साल की सजा सुनाई है. साथ ही सभी पर 35–35 हजार का आर्थिक दंड लगाया है.

आठ साल पहले अपराधियों ने विशेश्वर ओझा को गोलियों से भूना था

दरअसल  आठ साल पहले 12 फरवरी 2016 को विशेश्वर ओझा अपनी कार से ड्राइवर और चार अन्य समर्थकों के साथ चंदेश्वर उपाध्याय के भतीजे की बारात में परसोंडा टोला स्थित मृत्युंजय मिश्रा के यहां आये थे. लौटने के क्रम में उनके काफिले में एक और गाड़ी शामिल हो गयी. गाड़ी जैसे ही सोनबरसा मैदान पहुंची, सगे भाई  हरेश मिश्रा व ब्रजेश मिश्र ने अपने सहयोगियों के साथ विशेश्वर ओझा की गाड़ी को रोका और ताबड़तोड़ फायरिंग की. इस गोलीबारी में विशेश्वर ओझा और उनके ड्राइवर राकेश कुमार ओझा की गोली लगने से मौत हो गयी.

पुलिस ने 13 अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में जमा किये थे दो आरोप पत्र 

विशेश्वर हत्याकांड में राजनाथ ओझा के बयान पर शाहपुर थाना में कांड संख्या- 48/2016 दर्ज कराया गया था. जिसमें हरेश मिश्रा, ब्रजेश मिश्र समेत सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था. वहीं छह अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया गया था. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच की और 13 अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में दो आरोप पत्र जमा किये. लेकिन ट्रायल के दौरान ही मुख्य गवाह और चश्मदीद कमल किशोर मिश्रा की हत्या कर दी गयी. ब्रजेश मिश्रा को पहले ही कमल किशोर मिश्रा मर्डर केस में उम्र कैद की सजा सुनायी गयी थी. हालांकि इस हत्याकांड में अभियोजन की तरफ से 10 गवाहों की गवाही करायी गयी.

9 अप्रैल को कोर्ट ने सात आरोपियों को दोषी करार दिया था 

एडीजे 8 की कोर्ट ने बीते नौ अप्रैल को हरेश मिश्रा और उसके भाई ब्रजेश मिश्रा को हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट मामले में दोषी करार दिया. वहीं उमाकांत, टुनी, बसंत, पप्पू और हरेंद्र सिंह को आईपीसी की धारा 307 और धारा 27 आर्म्स एक्ट में दोषी पाया. हालांकि कोर्ट ने इस कांड में आरोपी बनाये गये कुंदन, संतोष, विनोद, भृगु, मदन, बबलू को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया. वहीं आज 22 अप्रैल को कोर्ट ने मुख्य आरोपी हरेश और ब्रजेश मिश्रा समते सात को सजा सुनायी है. [wpse_comments_template]

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