ज्ञानवापी केस : सिविल कोर्ट ने मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा, सुनवाई 30 को, मुस्लिमों की इंट्री रोके जाने की मांग)
हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में 7 फीसदी का आया उछाल
कैबिनेट के फैसले के बाद हिंदुस्तान जिंक के शेयरों 7 फीसदी का उछाल आया. जिसके बाद इसकी कीमत बढ़कर 318 रुपये तक पहुंच गयी. हालांकि थोड़े देर के बाद इसमें थोड़ी नरमी देखी गयी. कंपनी के शेयर 4.89 फीसदी की तेजी के साथ 310 रुपये पर ट्रेड करने लगा. इसे भी पढ़े : कार्रवाई">https://lagatar.in/instead-of-taking-action-pandara-op-in-charge-did-a-counter-case-on-the-basis-of-wrong-papers/">कार्रवाईकरने के बजाये पंडरा ओपी प्रभारी ने गलत कागजात के आधार पर किया काउंटर केस
कंपनी में अनिल अग्रवाल की 64.92 फीसदी हिस्सेदारी
मालूम हो कि हिंदुस्तान जिंक देश की सबसे बड़ी जिंक, लीड और सिल्वर उत्पादन करने वाली कंपनी है. यह पहले सरकारी कंपनी थी. लेकिन केंद्र सरकार ने 2002 में 26 फीसदी हिस्सेदारी अनिल अग्रवाल के वेंदाता ग्रुप को बेच दी थी. फिर अनिल अग्रवाल ने कंपनी में हिस्सेदारी 26 फीसदी से बढ़ाकर 64.92 फीसदी कर दी. अब सरकार अपनी बची 29.54 फीसदी हिस्सेदारी भी बेचने वाली है. इसे भी पढ़े : अफसरों">https://lagatar.in/mla-saryu-rai-explained-on-corruption-officers-a-b-c-d-meaning-of-kakhara/">अफसरोंके भ्रष्टाचार पर MLA सरयू राय ने समझाया “क, ख, ग, घ, ङ ” ककहरा का मतलब
वित्त वर्ष 2023 में विनिवेश से 65000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य
बता दें कि सरकार को विनिवेश के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. सरकार ने वित्त वर्ष 2023 के लिए 65000 करोड़ के विनिवेश लक्ष्य का अनुमान लगाया है. केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से अबतक 23575 करोड़ जुटाये हैं. इसमें से 20,560 करोड़ एलआईसी के आईपीओ से मिली है. वहीं ओएनजीसी में अपनी 1.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 3000 करोड़ जुटाये थे. इसे भी पढ़े : शेल">https://lagatar.in/shell-company-mining-lease-case-order-given-by-sc-tuesday-was-observed-hc-only-may-13/">शेलकंपनी व खनन लीज केस: SC ने मंगलवार को जो आदेश दिया, उसे HC ने 13 मई को ही किया था ऑब्जर्व
विनिवेश के मोर्चे पर पिछड़ने के बाद कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेच रही सरकार
विनिवेश के मोर्चे पर पिछड़ने के बाद सरकार कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है. हिंदुस्तान जिंक के अलावा सरकार आईटीसी में भी अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. मालूम हो कि आईटीसी में सरकार की 7.91 फीसदी हिस्सेदारी है. बता दें केंद्र सरकार शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, पवन हंस, आईडीबीआई बैंक और भारत पेट्रोलियम कॉरपोर्रेशन को बेचने वाली है. लेकिन इसको बेचने में देरी हो रही है. इसे भी पढ़े : आईएमएफ">https://lagatar.in/imf-chief-georgieva-pleads-india-should-reconsider-the-ban-on-export-of-wheat/">आईएमएफप्रमुख जॉर्जिवा की गुहार, गेहूं के निर्यात पर लगी पाबंदी पर दोबारा विचार करे भारत [wpse_comments_template]

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