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चैंबर की तीखी सलाह : सीएम या तो उद्योग सचिव बदलें या सचिव सोच बदलें, ऐसे औद्योगिकीकरण संभव नहीं

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Ranchi : जिस सोच के साथ राज्य के उद्योग सचिव कार्य कर रही हैं, उससे औद्योगिकीकरण संभव नहीं है. उद्योग सचिव सोच बदलें या तो मुख्यमंत्री सचिव बदलें. पांच साल पहले राज्य में मोमेंटम झारखंड हुआ था, लेकिन इसकी विफलता सबने देखी. सरकार ने इसकी समीक्षा नहीं की. सरकार ने ये नहीं देखा कि आखिरी प्रयास के बाद भी राज्य में निवेश नहीं बढ़ रहा. सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए. उक्त बातें चैंबर अध्यक्ष प्रवीण जैन छाबड़ा ने कहीं. शुक्रवार को झारखंड चैंबर की ओर से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. इसमें औद्योगिक स्थिति और दिल्ली में हुए इंवेस्टमेंट समिट पर चिंता जतायी गयी. छाबड़ा ने कहा कि राज्य में निवेश तभी बढ़ेगा, जब धरातल पर स्थिति ठीक होगी. जमीन, पाॅल्यूशन एनओसी, बिजली से लेकर अन्य आधाभूत संरचनाएं भी उद्योगों को नहीं मिल रहीं. इसे भी पढ़ें- नियुक्ति">https://lagatar.in/supreme-court-issues-notice-to-dgp-neeraj-sinha-in-appointment-case/">नियुक्ति

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उद्योग सचिव ने कभी नहीं किया दौरा

इस दौरान अजय भंडारी ने कहा कि उद्योगों के सामने विकट स्थिति है. इंवेस्र्टस समिट से सरकार इंवेस्टमेंट बढ़ाना चाहती है. जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है. चेंबर तब भी मोमेंटम झारखंड की पक्षधर नहीं थी. उद्योग सचिव दिल्ली में बैठक करती है. जबकि राज्य के उद्यमी ही उद्योग और निवेश में रुचि रखते हैं. इतने सालों में एक बार भी उद्योग सचिव ने किसी औद्योगिक क्षेत्र का दौरा नहीं किया, जबकि तुपुदाना जैसे इलाकों में स्थिति बदतर है. बिजली की समस्या के लिए एडवाइजरी कमेटी गठित है, लेकिन कमेटी की बैठक कोरोना के बाद से नहीं हुई. इसे भी पढ़ें - रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-police-confiscated-liquor-including-car-on-nh-one-arrested/">रामगढ़

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जमीन से अधिकार छीना जा रहा

वहीं दीपक कुमार मारू ने कहा कि उद्योगों के विकास के लिये इंडस्ट्रियल एरिया बनाये गये हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में संसाधनों की कमी है. देवीपूर इलाके में 81 प्लाॅट पर साल 2019 से लोग अधिकार नहीं कर पा रहे. जबकि इन इलाकों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत जमीन दी गयी. अब प्रशासन कहता है कि छह महीने तक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधि नहीं हुई, जिससे जमीन से बेदखल किया जाता है. जबकि लोग जमीन के लिए परेशान हैं. ऐसी शिकायत अन्य क्षेत्रों में भी है. सरकार को चाहिए कि क्षेत्रीय निदेशकों की जिम्मेवारी तय करें.

तीन साल से हो रहा निर्माण

इस दौरान अलग-अलग क्षेत्र के व्यापारियों ने अपनी समस्याएं रखीं. तुपुदाना के सुरेंद्र सिंह ने कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास नहीं हो रहा. तीन साल से नाली निर्माण किया जा रहा, जिसका कुल बजट 30 करोड़ है. लेकिन अभी तक कार्य पूरा नहीं हुआ. अब स्थिति ये है कि उद्योग तक जाने के लिए रास्ता भी नहीं है. इस दौरान राहुल मारू, धीरज तनेजा, किशोर मंत्री समेत अन्य मौजूद रहे. [wpse_comments_template]

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