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ओपिनियन

जरा संभल कर! अपनी तस्वीरों को रेट्रो लुक देना खतरनाक हो सकता है

जो काम करोड़ों रुपए देकर गूगल फेसबुक जैसी कंपनियां अपना मॉडल ट्रेन करवाती है, वो काम आप खुद ही फ्री में एक ट्रेंड के झांसे में आकर AI को दे रहे हो,

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जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, जिंदादिली से जीने की सीखें कला

जीवन के मोल का अंदाजा केवल एक बात से लगा लीजिए कि, एक मृत शरीर है, दुनिया की सारी दौलत खर्च करके, अत्याधुनिक अस्पताल, सरकारें, धार्मिक कर्मकांड सब मिलकर कोशिश कर लें, पूरे ब्रह्मांड की ताकत लगाकर भी मृत शरीर में एक सेकंड के लिए भी जान नहीं ला सकते. मतलब जीवन अनमोल है, उसे खत्म करने का अधिकार हमें स्वयं भी नहीं, क्योंकि यह जीवन अन्य की देन हैं. हर साल 10 सितंबर को “विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस” जागरूकता हेतु दुनिया भर में मनाया जाता है, इसका उद्देश्य लोगों में आत्महत्या जैसे बुरे विचारों को दूर करके एक सुखद सकारात्मक सोच जैसा वातावरण बनाने पर जोर देना हैं. इसकी थीम "आत्महत्या के बारे में सोच बदलना और बातचीत शुरू करें" यह है, वर्ष 2024 से 2026 तक यही थीम रखी गयी हैं.

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पुलिस को यह हक किसने दिया कि बिहार की बेटी को बदनाम करे

बिहार की बेटी नेहा झा. शराब सप्लाई व बेचने के आरोप में गिरफ्तारी. नेहा को लेकर तरह तरह की बातें मीडिया, सोशल मीडिया व फेसबुक तथा वाट्सएप पर लगातार कही जा रही हैं. यह सही है कि नेहा की सुंदरता ही उसके लिए समस्या बन गई. अगर नेहा की जगह कोई गरीब, फटी कपड़ों, गंदे कपड़ों में यही काम की होती तो शायद इतनी चर्चा नहीं होती.

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भेष के पीछे छिपा अधिकार-विरोध: महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई

सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अब केवल 52 महीने बचे हैं. लेकिन जेंडर समानता और स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़े लक्ष्यों पर दुनिया की गति चिंताजनक रूप से धीमी है. कानूनी रूप से बाध्यकारी संधियों, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और दशकों की वैश्विक प्रतिबद्धताओं से हासिल प्रगति, अब बढ़ते और बहुरूपी अधिकार-विरोधी अभियान के निशाने पर है.

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आरक्षण के तक्षक विधान पर बहस जरूरी

एक बार फिर से देश में आरक्षण पर बहस की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है. लोकतंत्र में किसी भी समस्या के समाधान का रास्ता बहस और चर्चा से ही निकलना चाहिए. बहस करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वह उन्मादी या प्रज्वलनशील स्वरुप धारण न कर ले. हम अमूमन गंभीर विषय पर बहस से कतराते रहे हैं और बिना सम्यक विचार-विमर्श के फैसले लेते रहे हैं. इसका नतीजा यह होता है कि समस्या विकराल या असाध्य हो जाती है और हमारी व्यवस्था के हाथ-पांव फूल जाते हैं.

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‘जौहर’ का महिमांडन क्यों?

तात्कालिक कारण/बहाना- स्वरा भास्कर ने ‘जौहर प्रथा’ पर कुछ ऐसा कहा, जो इनको महान हिंदू संस्कृति और परंपरा का अपमान लग गया! मेरी समझ से मूल कारण- स्वरा भास्कर का विवाह एक मुसलिम से हुआ है, कथित 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' की सदस्य है, अब ‘दिमागी नक्सल.'

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मनुस्मृति मुर्दाबाद, शरिया जिंदाबाद

देश की राजनीति में अचानक युवाओं को रिझाने-लुभाने की होड़ सी मच गयी है. हालांकि सरकारों की तकदीर पहले भी युवा ही तय करते रहे हैं, लेकिन तिलचट्टा पार्टी की सक्रियता के बाद माहौल में नयी गर्मी तारी हो गयी है. तिलचट्टा आंदोलन के बाद जेन जी नामक नया शब्द प्रचलन में आ गया है. खबर है कि यह गिरोह पांच सितंबर को कुछ नयी हरकत करने वाला है. इस बाबत दिल्ली पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर कहा है कि ये छात्र और युवा कम, रीलबाज ज्यादा हैं. ये गुस्सा दिलायेंगे और कंटेंट बनायेंगे. ये चाहेंगे कि पुलिसकर्मी लड़कियों महिलाओं से उलझें और फंस जायें. इसलिए इन्हें सख्ती से डील जरूर करें, परंतु हंसते हुए, मुस्कराते हुए. एडवाइजरी में रीलबाजों के लिए गालीबाज शब्द का उपयोग नहीं किया गया है, लेकिन इशारा उस तरफ जरुर किया गया है.

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ये जन्मजात ‘सर्वश्रेष्ठ’ हैं!

सवर्ण समुदाय, जिसे खुद के श्रेष्ठ होने का गुमान और भ्रम है, के कुछ लोग, जो शिक्षित हैं और जिनको आधुनिक और लिबरल माना जाता है, दुविधा में हैं. या शायद हम जैसों को ऐसा भ्रम होता है! ऐसे लोग अनेक कारणों से भाजपा-संघ को पसंद करते हैं, मगर ऐसा दिखना नहीं चाहते. ‘हमें किसी पार्टी से लेना-देना नहीं है’, कि ‘हम तो तटस्थ हैं’ जैसा बोलना जरूरी लगता है.

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आदिवासी एकता महाजुटान रैली या राजनीतिक रैली! पोस्टरों में राहुल गांधी और हेमंत सोरेन की तस्वीरों से उठे सवाल

Lagatar Desk  : बताया जा रहा है कि रैली का आह्वान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बंधु तिर्की की ओर से किया गया है.ऐसे में कांग्रेस से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी की चर्चा है.रैली में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना भी जताई जा रही है.

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’महिला सम्मान’ का संस्कारी मॉडल!

कर्नल सोफिया कुरैशी पर अभद्र टिपण्णी करने वाले मंत्री पर केस नहीं चलेगा! मध्य प्रदेश सरकार एक महिला फौजी अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन' बताने अपने मंत्री विजय शाह को बचाने में लगी हुई है.

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जयराम को मिला शैलेंद्र महतो का साथ, कहा- एक माननीय किससे माफी मांगे?

Shailendra Mahto : यदि झारखंड पुलिस एसोसिएशन एक दारोगा के पक्ष में खड़ा होगी तो कल ऐसा ना हो कि जयराम महतो के समर्थन में पूरा झारखंड खड़ा हो जाएगा? मैं 'झारखंड की समरगाथा' पुस्तक से दो पंक्ति उद्धृत कर रहा हूं...

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नेपाल तो ट्रेलर है, भारत में दिख सकता है भयानक दृश्य

नेपाल में आई भयानक बाढ़ से भी कहीं ज्यादा तबाही भारत में मच सकती है लेकिन हमारे देश की सरकार सोई हुई है ! दरअसल, 2025 से ही चीन ने भारत-चीन सीमा पर दुनिया का सबसे विशालकाय बांध बना शुरू कर दिया है.

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पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बढ़ता असंतोष

पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जून 2026 के दौरान राजनीतिक एवं सामाजिक तनाव तेजी से बढ़ा है. ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद क्षेत्र के कई हिस्सों में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई हैं. संचार सेवाओं पर प्रतिबंध, अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग तथा बड़े जमावड़ों को रोकने के प्रयासों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है. स्थानीय प्रशासन ने एक अवधि के लिए पर्यटन को लेकर भी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी.

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ओ जेरूसलम!  घर से इतनी दूर भारतीय मजदूर क्यों मर रहा है?

इजरायल जेरूसलम में एक भारतीय घरेलू कामगार की बेरहमी से हत्या- यह सिर्फ एक अपराध की घटना (crime story) नहीं है. यह उस भारत की कहानी है जिसके लाखों लोग अपने परिवार को पालने के लिए अपना घर-गांव छोड़कर हजारों किलोमीटर दूर निकल रहे हैं. अक्सर ऐसी जगहों पर, जहां युद्ध चल रहा है, मिसाइलें गिर रही हैं और जान की कोई गारंटी नहीं.

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प्रश्न हिमालय का नहीं, शिव के भाल का है

देश सावन में शिव के महिमा गायन का मासिक पर्व मना रहा है. शिव वागर्थ हैं. ऐसे जैसे वाणी और अर्थ चिपके रहते हैं. इसीलिए वह अर्द्धनारीश्वर भी हैं. वह महाकाल हैं. यानी समय के नियंता. समय के पांच अंग होते हैं. इन्हीं के आधार पर पंचांग बनते हैं. दुर्भाग्य यह है कि शिव के ही इस भारत में देश की राजनीति का पंचांग नहीं बन पा रहा है. हमारी सभी पार्टियों के पुरोहित सलाहकार योग बैठा भी ले रहे हैं तो कारण नहीं बता पा रहे हैं. नक्षत्र किसी के ठीक नहीं चल रहे हैं. सब एक-दूसरे के वैरी भाव में हैं. विलुप्तगामी पार्टियों को छोड़ दें तो बाकी सभी पर कमोबेश शनि की महादशा चल रही है. इसीलिए संसद नहीं चली. करीब डेढ़ सौ सांसदों ने लोकसभा को बंधक बना लिया. साढ़े तीन सौ टुकुर-टुकुर देखते रहे. राज्य सभा में भी यही स्थिति थी.

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