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ओपिनियन

'कई चांद थे सरे आसमां' : हिन्दुस्तान के एक विशेष कालखंड की रोचक दास्तान

2010 में पहली बार प्रकाशित (हिंदी अनुवाद) हो चुके इस बहुचर्चित और बहुप्रशंसित उपन्यास की अब समीक्षा करने का कोई मतलब नहीं है. न ही मैं खुद को उस लायक समझता हूं. फिर भी इस मोटी पुस्तक (754 पेज) को पढ़ लेने के बाद लगा कि इसके बारे में लिखना चाहिए, शायद साहित्य और इतिहास में रुचि रखने वाले कुछ और लोग प्रेरित हों.

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किताब-किताब खेलने का हश्र

संसद के बजट सत्र का पहला अध्याय संपन्न हो गया. यानी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो गया. राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बोलने के बाद और लोकसभा में बिना उनके बोले.

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रूसी तेल के नये समीकरण से किसका फायदा?

रूस ने भारत की जगह चीन को अपना सबसे बड़ा तेल खरीदार बना लिया है. और यह रिकॉर्ड तेजी से रिकार्ड स्तर पर हुआ है. चीन ने रूस से 18.6 लाख बैरल प्रतिदिन समुद्री रास्ते से कच्चा तेल खरीदा.

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बेतुका और आपत्तिजनक

एक फिल्म ‘घूसखोर पंडत' चर्चा और विवादों में है. नाम से जाहिर है कि फिल्म किसी जन्मना ब्राह्मण किरदार पर केंद्रित है. स्वाभाविक ही ब्राह्मण समुदाय नाराज और आहत महसूस कर रहा है. जानकारी के मुताबिक कहानी मुंबई के किसी वास्तविक घूसखोर पर बनी है, जिसे सजा भी हुई थी,

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एप्स्टीन Files, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, नये खुलासे और उठते सवाल

हरदीप पुरी ने इसे एक सामान्य मेल के रूप में नहीं लिया. उन्होंने एप्स्टीन के सहयोगी को वीजा दिलवाने के लिए अपनी सारी हदें पार कर दी! उन्होंने रिटायर्ड राजदूत प्रमोद कुमार बजाज और न्यूयॉर्क में एक संजीव नामक व्यक्ति को ईमेल किया और उन्हें एप्स्टीन की मदद करने का निर्देश दिया. पूर्व राजदूत प्रमोद बजाज ने बात मान ली.

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भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता : मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता

भारत का यूरोप के साथ 250 ईसा पूर्व से एक समृद्ध व्यापारिक संबंध रहा है, जो सिल्क रोड से भी पहले की अवधि है. अगले 2000 वर्षों के अधिकांश हिस्से के दौरान, भारतीय मसलिन, कपास, हस्तशिल्प, मसाले, पन्ना और रत्न अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सबसे पसंदीदा वस्तुओं में शुमार होते थे, जिनमें से अधिकांश यूरोप तक पहुंचती थीं.

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एप्सटीन फाइल्स: सत्ता, सेक्स और नैतिकता

कुछ छोटे बच्चों को टॉर्चर करते थे, क्योंकि बेहद तनाव की स्थिति में बच्चों के शरीर में Adrenochrome जैसा कैमिकल बनता है, जिसे पीकर जवान बने रह सकते हैं. अभी ये कहना संभव नहीं है कि इनमें से कितने लोग इन सभी अपराधों के बारे में जानते थे या उसमें शामिल थे. लेकिन इतना तय है कि इनमें से लगभग सभी अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति के लिए एप्सटीन के टापू पर जाते थे.

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सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक - कारवां मैग्जीन में छपी रिपोर्ट का हिन्दी अनुवाद पढ़ें

लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी, जो भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड के प्रमुख थे, को 31 अगस्त 2020 की रात 8:15 बजे एक फोन कॉल मिला. जो जानकारी उन्हें मिली, वह बेहद चिंताजनक थी. चार चीनी टैंक, पैदल सेना के समर्थन के साथ, पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला की ओर एक खड़ी पहाड़ी पगडंडी से ऊपर बढ़ रहे थे. जोशी ने तुरंत इस गतिविधि की सूचना सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को दी.

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सरकार की लगाई आग पर सुप्रीम कोर्ट का पानी

यह मानने का कोई आधार नहीं है कि यूजीसी ने सरकार को बिना बताये-दिखाये एक ऐसा विनियम जारी कर दिया जिससे देश में आग लगने की स्थिति पैदा होने लगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान प्रदत्त अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर देश को जलने से बचा लिया है.

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टिप्पणी- बजट 2026-27: विकसित भारत की मजबूत नींव, विकास का प्रतीक

बजट 2026-27 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की दूरदर्शी सोच का उत्कृष्ट उदाहरण है. यह बजट 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और कर सुधारों पर केंद्रित है.  वैश्विक चुनौतियों जैसे अमेरिकी टैरिफ, मुद्रा अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच,

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टिप्पणी- बजट 2026-27: एक असफल प्रयास जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देता है

भारत सरकार द्वारा एक फरवरी 2026 को पेश किया गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की नौवीं बजट पेश होने के बावजूद, देश की आर्थिक चुनौतियों को संबोधित करने में बुरी तरह विफल साबित हुआ है. 'विकसित भारत' के नारे के साथ पेश किया गया

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माघ मेला में नाहक झमेला पर सियासी रेला

प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है. यह मेला हमारी सनातनी परंपरा का हिस्सा है. लेकिन मेला लगे और झमेला न हो तो विघ्नसंतोषियों को मजा नहीं आता. इस बार यह मौका कथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन ने दिया है.

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मजबूत गणतंत्र की नीव, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था

नागरिक स्वस्थ होंगे तभी लोकतंत्र जीवित, सक्रिय और सशक्त रहेगा. स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ विचार जन्म लेते हैं और वही विचार राष्ट्र को प्रगति की राह दिखाते हैं. इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मजबूत गणतंत्र की असली नींव मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था पर ही टिकी होती है. जिस देश में नागरिक बीमारी, कुपोषण और इलाज की चिंता में घिरे हों, वहां लोकतंत्र एक जीवंत व्यवस्था नहीं, बल्कि केवल औपचारिक ढांचा बनकर रह जाता है.

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PESA नियमावली 2025 (7): इसपर उठे गंभीर सवाल

पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली 2025 (PESA नियमावली 2025) को लेकर आदिवासी समाज और जानकारों ने गंभीर आपत्ति जताई है. नियमावली के नियम 22 सहित कई प्रावधानों को पढ़ने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सामुदायिक और प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन आखिर किस ग्राम सभा के अधिकार में होगा.

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