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ओपिनियन

अग्निवीर रिफॉर्म नहीं मोदी सरकार का यू-टर्न है

जब अग्निवीर योजना को लागू किया गया था तब इसकी जमकर आलोचना हुई थी. युवाओं, विपक्षी दलों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इसका विरोध किया था. देश भर में प्रदर्शन हुए थे. विरोध की वजह नौकरी की अनिश्चितता के अलावा पेंशन, ग्रेच्युटी, कैंटीन लाभ व मेडिकल सुविधा अग्निवीरों के लिए उपलब्ध नहीं होना था. इसके साथ ही भारतीय सेना की क्षमता को लेह भी सवाल उठे थे. चार साल के छोटे कार्यकाल की वजह से युद्ध क्षमता में कमी की आशंका जतायी गयी थी. विपक्ष ने इस योजना को देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया था. पूर्व सैन्य अधिकारियों ने यह कहकर आलोचना की थी कि बिना पायलट प्रोजेक्ट किए इसे लागू किया गया.

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बड़ा सवाल- क्या दिल्ली पुलिस राजनीतिक दबाव से बाहर निकलना चाहती है!

अब दो नवंबर को पुलिस के पदाधिकारियों व जवानों ने मोर्चा खोल दिया. वो पहुंच गए पुलिस मुख्यालय के बाहर और प्रदर्शन करने लगे. पुलिसकर्मियों की मांग थी कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ व प्रभारी अरुण कुमार को पुरानी पोस्टिंग दी जाये. वकीलों पर दर्ज मुकदमे वापस न किए जाए. थानों में वकीलों के प्रवेश व व्यवहार के लिए एसोओपी बने. पांच से अधिक वकीलों को भीड़ माना जाये. अदालतों व थानों में सुरक्षा बढ़ायी जाये. बार एसोसिएशन के साथ सामंजस्य बैठाया जाये.

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सत्ता संघर्षः इतिहास एक बार फिर खुद को दुहरा रहा है?

एक नवंबर की रैली को फ्लॉप बता दिया गया है! सोशल मीडिया और सड़कों पर ‘मोदी कहीं नहीं जायेगा’ का अभियान चल रहा है! मोदी को ‘भारतरत्न’ देने की मांग हो रही है! राहुल गांधी और विपक्षी दलों विदेशी ताकतों का एजेंट कहा जा रहा है! इंदिरा गांधी भी तब ऐसा ही कह रही थी, जेपी तक पर यह आरोप लगाया गया!

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किसी कमजोर की जोरू नहीं है हमारा लोकतंत्र

Lagatar Opinion: मजेदार बात यह है कि दोनों पक्ष लोकतंत्र बचाने के लिए सड़क पर निकल रहे हैं. मानो लोकतंत्र खतरे में पड़ गया है. अगर ऐसा ही है तो रैलियां और प्रदर्शन हो कैसे रहे हैं? इन दोनों गिरोहों को यह बात ठीक से समझ लेनी चाहिए कि हमारा लोकतंत्र किसी कमजोर की जोरू नहीं है जो खतरे में पड़ जाये. इसकी जड़ें गहरी हैं जिसे मौसमी हवाएं हिला तक नहीं सकती है. यह इमरजेंसी के झंझावाती थपेड़ों के बावजूद आज भी हरा-भरा है तो राजनीतिक दलों की चिंता या कृपा से नहीं, लोकशक्ति के संबल से.

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‘रामलीला’ की रैली से ऐसी दहशत!

आखिर क्या हो जाएगा उस रैली से? क्या सरकार के पास कोई खुफिया जानकारी है कि रैली के बहाने कोई साजिश हो रही है? लगता तो नहीं है! ऐसा होता, तो अब तक राहुल गांधी को गिरफ्तार किया जा चुका होता!

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नीरज कुमार की बिछायी बिसात पर कैसे पिटे अनंत सिंह

बिहार विधान परिषद चुनाव में हाई प्रोफाइल पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपनी ही पार्टी के नेता नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले मोकामा के विधायक अनंत सिंह राजनीतिक बदला चुकाने की जिद में बुरी तरह पिट गये. पार्टी से निकाले गये. विधायकी जाने की तलवार अलग ही लटक रही. जदयू ने स्पीकर से उनकी सदस्यता रद्द करने की स्पीकर से सिफारिश की है. दलविरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी ने यह कदम उठाया है. इधर नीरज चुनाव भी जीत गये.

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डरावना आंकड़ा : दुनिया में 60 हजार और भारत में 23 हजार...

इस खबर के आने के तुरंत बाद मेरे सामने आईटी पेशेवर का चेहरा घूमने लगा, जिससे पिछले ही हफ्ते मुलाकात हुई. उसने जो बताया था, माइक्रोसॉफ्ट की घोषणा ने उसकी पुष्टि कर दी. उसने बताया था कि डेस्क व रिपोर्टिंग के काम में लगे 50-60 प्रतिशत की छंटनी करने के बाद भी आपके समाचार पोर्टल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एक बोट की मदद से डेस्क के दो-तीन लोग ही 150-200 खबरें लगा देंगे. तो क्या छंटनी की अगली खबर मीडिया क्षेत्र से आने वाली है.

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महिमा घटी समुद्र की रावण बसा पड़ोस

राहुल गांधी वियतनाम निकलने से पहले शिव की बरात निकाल चुके हैं. यह बात अलग है कि वह बरात “हिमवान” यानी सुप्रीम कोर्ट के चौखट से ही लौट आयी. उन्होंने घोषणा तो की थी तांडव की, लेकिन बरात में जो कुछ हुआ वह तांडव तो कतई नहीं था. पता नहीं किस “समझदार” ने उन्हें समझा दिया था कि शिव जी ने अपनी बरात में तांडव किया था.

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झारखंड बीजेपी कार्यसमिति की बैठक में नितिन नबीन के शामिल होने के राजनीतिक मायने क्या हैं?

झारखंड बीजेपी प्रदेश कार्यसिमिति की रांची में 24-25 अक्टूबर को होने वाली बैठक को लेकर पार्टी के नेता, कार्यकर्ता उतासहित हैं. वजह साफ है. इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी शामिल होंगे.

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मुख्य न्यायधीश सूर्य कांत के सबसे शक्तिशाली फैसले वे हैं, जिन्हें वे लिखने से इनकार करते हैं

वे शायद ही कभी सरकार के पक्ष में ऐसा फैसला सुनाते हैं जो अदालत को कटघरे में खड़ा करे. वे बस एक मान्यता प्राप्त प्रक्रियात्मक रास्ता खोज लेते हैं जो यह सुनिश्चित करता है कि अदालत कभी सरकार के खिलाफ फैसला ही न सुनाए.

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शक्ति और ब्रह्म की आशिष का उत्सव

वेदों का ब्रह्म जब सृष्टि की रचना, पालन और संहार की इच्छा करता है, तब मां दुर्गा आदिशक्ति के रूप में अभिव्यक्त होती हैं. अष्टभुजा मां दुर्गा के एक हाथ में त्रिशूल है, तो एक में चक्र और एक में खड्ग है.

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गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, गृह मंत्रालय, गुजरात एटीएस और उठते सवाल

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात की जेल से बाहर क्यों नहीं निकाला जा रहा? आखिरकार मुंबई पुलिस कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को अपनी हिरासत में क्यों नहीं ले पा रही है?

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‘रिजीम चेंज’ की बात में गलत क्या है?

opinion: वह भारत का पहला सफल आंदोलन भी साबित हुआ, जिसके चलते विधानसभा भंग हुई. 9 फरवरी 1974 को मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल ने इस्तीफा दिया. उसी दिन राष्ट्रपति शासन लगा, विधानसभा निलंबित कर दी गयी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी विधानसभा भंग नहीं करना चाहती थीं. मोरारजी देसाई ने आमरण अनशन शुरू कर दिया.

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ऊपर से टिप-टॉप, अंदर से मोकामा घाट

ताजा आंकड़ा अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की है. त्योहारी सीजन में बिग बिलियन डे, जैसे महाछूट का ऑफर है. कोशिश ज्यादा से ज्यादा सामान बेचने की. सोच यह कि त्योाहर का मौसम है, लोग पैसे खर्च करेंगे. लालच यह कि लोग 50-60 फीसदी डिस्काउंट पर खरीददारी करेंगे. अब नहीं खरीदेंगे, तो कब?

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टूटता रुपया और कर्ज लेकर बैसाखी लगाती सरकार

महंगा तेल, अमेरिकी बाजार में ऊंचा ब्याज और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी रुपये पर लगातार दबाव डाल रहे हैं. तेल खरीदने के लिए डॉलर चाहिए और विदेशी निवेशक अपना पैसा वापस ले जाते हैं तो उसके लिए भी डॉलर चाहिए.

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