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अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लेकर क्या-क्या कहा

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. उन्होंने शराब घोटाला मामले में सीबीआी की रिवीजन पिटीशन की सुनवाई से दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के केस से खुद हट जाने (रिक्यूजल) को लेकर दो दिन पहले बहस की. इसके साथ ही उन्होंने एक शपथ पत्र दाखिल किया. बहस के दौरान उन्होंने कुल 10 दलीलें दी और मांग किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हट जाना चाहिए. उनकी बहस के बाद न्यायपालिका को लेकर देश भर में चर्चा है. पढ़ें, अरविंद केजरीवाल के दलील और पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार Sanjaya Kumar Singh की टिप्पणी.

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और गहरायेगा गैस संकट

अब तक ईरान ने होर्मुज की खाड़ी में बाधा डाल रखी थी. ईरान-अमेरिका समझौता टूटने के बाद अमेरिका ने भी वहां से जहाजों को नहीं गुजरने देने की बात की है. ऐसे में यह दोहरा ब्लॉकेज भारत के लिए बड़ा संकट ला सकता है.

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हंगरी : ओरबान के साथ अदालतें, आयोग और मीडिया भी हार गया

आखिरकार हंगरी में विक्टर ओरबान के शासन का अंत हो गया. विक्टर ओरबान, जो पिछले 16 सालों से हंगरी का प्रधानमंत्री था. वही हंगरी, जो यूरोपियन यूनियन का एक देश है और जिसका पीएम विक्टर ओरबान रूस के राष्ट्रपति पुतिन का समर्थक.

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खरगे हों या खेड़ा बखेड़ा ही बखेड़ा

असम, केरलम और पुडुचेरी विधानसभाओं के चुनाव संपन्न हो गये हैं. तमिलनाडु में तेईस अप्रैल को वोट पड़ेंगे. बंगाल के मतदाता तेईस और उन्नतीस अप्रैल को अपनी सरकार चुनेंगे. सभी राज्यों के नतीजे चार मई को आयेंगे. लेकिन असम और केरलम में जिस स्तर पर चुनाव प्रचार हुआ, वह संसदीय जनतंत्र के लिए शोचनीय है. लोकलाज तो गायब था ही, मर्यादाएं भी टूट गयीं.

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झारखण्ड आन्दोलन-1912 से 2000 तक संघर्ष के कड़वे मीठे अनुभव

झारखंड का इतिहास प्राचीन जनजाति संस्कृति, समृद्धि, खनिजों और लंबी औपनिवेशिक व प्रशासनिक संघर्षों की कहानी है. बहुरंगी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण झारखंड प्रदेश सदा से ही आकर्षक और जिज्ञासा का केंद्र रहा है. 1912 से 2000 तक झारखंड आंदोलन का इतिहास एक अलग आदिवासी राज्य के लिए संघर्ष का रहा, जो 20वीं शदी में ढाका छात्रसंघ आंदोलन 1912 से शुरू होकर 15 नवंबर 2000 को पृथक राज्य बनने तक चला. यह आंदोलन औपनिवेशिक शासन, भूमि, आत्म स्वभाव और आदिवासी पहचान की रक्षा के लिए छोटानागपुर उन्नत समाज 1928, आदिवासी महासभा 1938 और 1986 जैसे प्रमुख चरणों से गुजरा है.

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रुरल नक्सल खत्म, अर्बन कब

हमारा देश रुरल नक्सल से मुक्त हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बाबत 30 मार्च को लोकसभा में यह घोषणा की. उन्होंने 24 अगस्त 2024 को देश से नक्सलवाद के सफाये की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की थी. इससे एक दिन पहले ही उन्होंने संसद को बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में 706 नक्सली मारे गये हैं और 4839 ने सरेंडर किया है, जबकि 2218 गिरफ्तार किये गये हैं. अमित शाह ने यह भी कहा कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश को विस्तृत जानकारी दी जाएगी. उन्होंने साफ कर दिया है कि अब हथियार उठानेवालों को उनकी ही भाषा में समझाया जाएगा.

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इंडी गंठबंधन की गांठें खुल गयी हैं

खाड़ी में जारी युद्ध के बीच अपने देश में जो चुनावी महाभारत छिड़ा है, वह कम रोमांचक नहीं है. हालांकि युद्ध की खबरों के बीच इस रोमांच की चर्चा कम हो रही है. यह रोमांच पैदा हुआ है पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के कारण. इनमें तीन राज्य ऐसे हैं जहां सैद्धांतिक और व्यावहारिक अर्थों में इंडी गंठबंधन (इंडिया) निरर्थक हो गया है. इसके सहयोगी आपस में ही भिड़ गये हैं.

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धर्म बदलने से ‘जाति’ नहीं बदलती, जाति आधारित प्रताड़ना तो नहीं ही

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को एक अहम फैसला सुनाया है- धर्म परिवर्तन के साथ ही अनुसूचित जाति (दलित) का दर्जा खत्म हो जायेगा. इस फैसले से अपनी विनम्र असहमति दर्ज करना चाहता हूं. असहमति दो आधारों पर है. एक तो यह कि मेरी समझ से बौद्ध, जैन और सिख धर्म हिंदू धर्म से अलग हैं, जबकि इस फैसले से वह अंतर खत्म हो गया है. दूसरे, हिंदू समाज के दलितों की सामाजिक हैसियत धर्म बदलने से नहीं बदलती.

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हजारीबाग रामनवमी : दर्द व आंसुओं में बदल गया खुशियों व आस्था का प्रतीक यह त्योहार

भुजाली, तलवार, चाकू, भाले और उपर से शराब का नशा. डीजे का कानफाड़ू शोर. यह सब मिलकर जुलूस को श्रद्धा, शक्ति और आस्था के बदले कुछ और ही बना दे रहा है. पारंपरिक हथियारों का प्रदर्शन के बदले नये चाईनीज हथियारों ने जगह ले ली है. उपर से रामनवमी के बहाने आपसी दुश्मनी को साधने के मंसूबे ने इस पर्व को अब अलग ही लेवल पर पहुंचा दिया है.

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सरयू का लेख, लालू का गुस्सा, ललन, नीतीश व पत्र

नीतीश कुमार की राजनीति की संपूर्ण यात्रा को दो खंड में देखा जा सकता है. पहला खंड वह है जब वे सत्ता के बाहर थे. विधानसभा सदस्य वे 1985 में बने. उसके बाद तो उनकी राजनीति सरपट दौड़ी. 1989 में बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद बने. 1990 में वीपी सिंह की सरकार में कृषि और सहकारिता राज्यमंत्री बने. वह सरकार सिर्फ पंद्रह महीने ही चल पाई. 1991 में लोकसभा के मध्यावधि चुनाव में नीतीश जी पुनः बाढ़ से सांसद बने.

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त्वरित टिप्पणीः प्रधानमंत्री बोले, पर बहुत कम बोले

युद्ध शुरू होने के 23 या 24 दिन बाद प्रधानमंत्री सोमवार को संसद में 24 मिनट बोले और खूब बोले. यह बात और है कि बहुत जरूरी सवालों पर चुप रह गये! वही सब बताया, जो कोई भी मंत्री या अधिकारी बता सकता था. जैसे-पहले हम 27 देशों से तेल लेते थे, अब 41 देशों से ले रहे हैं. ईरान सहित विभिन्न देशों में फंसे इतने भारतीयों को वापस लाया गया है. विदेशों में हमारे दूतावास 'एडवाइजरी' जारी कर रहे हैं. हमने वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल से डीजल-पेट्रोल की अपनी खपत इतनी कम कर ली है. हमें सतर्क रहना होगा कि लोग कालाबाजारी न करें. आदि आदि.

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ईरान युद्ध में बेतरह फंस गया है अमेरिका

ईरान में जारी लड़ाई से पूरी दुनिया हलकान है. पूरे विश्व पर ऊर्जा संकट के काले बादल दिनानुदिन घनीभूत होते जा रहे हैं. एक-एक दिन बामुश्किल गुजर रहे हैं. सबके जेहन में एक ही सवाल कौंध रहा है. वह यह कि यह युद्ध कब खत्म होगा. लेकिन इस सवाल का जवाब अमेरिका और इजरायल को देना है जिन्होंने इसे शुरु किया है. इसलिए उन उद्देश्यों पर गौर करना जरूरी है जिन्हें लेकर हमला किया गया है. इस युद्ध के अगुवा अमेरिका ने ईरान की राजनीतिक व्यवस्था बदलने (रिजीम चेंज), उसकी सैन्य शक्ति क्षीण करने और उसकी मारक (मिसाइल बनाने और उसे लांच करने) क्षमता खत्म करने के मकसद से यह युद्ध थोपा है.

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तेल और गैस नहीं, असली संकट आने वाला है

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सिर्फ तेल और नैचुरल गैस ही नहीं आती हैं, असली संकट जो आने वाला है, वो क्या है? ये जान लीजिए! विकासशील देशों की मदद करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था ‘यूएनसीटीएडी' के मुताबिक हर महीने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते लगभग 13.3 लाख टन खाद का निर्यात किया जाता है. इसलिए, अगर यह समुद्री रास्ता सिर्फ 30 दिनों के लिए भी बंद हो जाए, तो दुनिया भर में खाद की किल्लत पैदा हो सकती है. इससे मक्का, गेहूं और चावल जैसी फसलों की पैदावार गिरने का बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा, क्योंकि ये फसलें पूरी तरह से नाइट्रोजन (यूरिया) पर निर्भर होती हैं. दुनिया भर में व्यापार होने वाली प्रमुख खादों, जैसे कि अमोनिया, फॉस्फेट और सल्फर का 20 फीसदी हिस्सा अकेले खाड़ी देशों से आता है.

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अच्छा लगे या बुरा, कहना पड़ेगा

मुझे लगता है कि लोगों को ऐसा बना दिया गया है, इसके लिए प्रेरित किया गया है कि वे कुछ भी लिखें, बोलें, गलत का भी समर्थन करें. पत्रकारों पर इस बात के लिए दबाव डाला जाता रहा है कि आप आलोचना करते हैं तो प्रशंसा भी कीजिए. इस तरह सरकार ने अर्ध साक्षरों, अज्ञानियों और अपराधियों की फौज खड़ी की जो सोशल मीडिया पर सरकार का समर्थन और विरोधियों का विरोध करते हैं. इस संबंध में पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी की किताब भी है, आई एम अ ट्रोल.

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जल का उत्सव, जन भागीदारी का संकल्प

प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व जल दिवस के अवसर पर मैं सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं. यह दिन हमें याद दिलाता है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन की आधारशिला है और इसका संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है.

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