सस्ती तकनीक व हर नागरिक तक पहुंच: AI में आत्मनिर्भर भारत की तैयारी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आज की सबसे ताकतवर और तेजी से बदलने वाली तकनीक में से एक बनती जा रही है.
Continue readingकृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आज की सबसे ताकतवर और तेजी से बदलने वाली तकनीक में से एक बनती जा रही है.
Continue readingबजट 2026-27 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की दूरदर्शी सोच का उत्कृष्ट उदाहरण है. यह बजट 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और कर सुधारों पर केंद्रित है. वैश्विक चुनौतियों जैसे अमेरिकी टैरिफ, मुद्रा अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनावों के बीच,
Continue readingभारत सरकार द्वारा एक फरवरी 2026 को पेश किया गया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की नौवीं बजट पेश होने के बावजूद, देश की आर्थिक चुनौतियों को संबोधित करने में बुरी तरह विफल साबित हुआ है. 'विकसित भारत' के नारे के साथ पेश किया गया
Continue readingप्रयागराज में माघ मेला चल रहा है. यह मेला हमारी सनातनी परंपरा का हिस्सा है. लेकिन मेला लगे और झमेला न हो तो विघ्नसंतोषियों को मजा नहीं आता. इस बार यह मौका कथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन ने दिया है.
Continue readingनागरिक स्वस्थ होंगे तभी लोकतंत्र जीवित, सक्रिय और सशक्त रहेगा. स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ विचार जन्म लेते हैं और वही विचार राष्ट्र को प्रगति की राह दिखाते हैं. इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मजबूत गणतंत्र की असली नींव मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था पर ही टिकी होती है. जिस देश में नागरिक बीमारी, कुपोषण और इलाज की चिंता में घिरे हों, वहां लोकतंत्र एक जीवंत व्यवस्था नहीं, बल्कि केवल औपचारिक ढांचा बनकर रह जाता है.
Continue readingपंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली 2025 (PESA नियमावली 2025) को लेकर आदिवासी समाज और जानकारों ने गंभीर आपत्ति जताई है. नियमावली के नियम 22 सहित कई प्रावधानों को पढ़ने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सामुदायिक और प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन आखिर किस ग्राम सभा के अधिकार में होगा.
Continue readingझारखंड राज्य का जन्म ही राजनीतिक संघर्ष की कोख से हुआ. अलग राज्य की मांग दशकों पुरानी थी, जिसकी जड़ें आदिवासी अस्मिता, प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार और क्षेत्रीय उपेक्षा में थीं. बिहार से अलग होकर बने इस राज्य से यह उम्मीद थी कि यहां की राजनीति स्थानीय आकांक्षाओं को प्राथमिकता देगी, आदिवासी समाज को निर्णायक भूमिका मिलेगी और विकास की दिशा दिल्ली या पटना नहीं, बल्कि रांची से तय होगी. लेकिन गणतंत्र की इन अपेक्षाओं को व्यवहार में उतारना इतना आसान नहीं रहा.
Continue readingआज जब भारत अपना गणतंत्र दिवस मना रहा है, तो झारखंड की इस पावन माटी में लोकतंत्र की जड़ें केवल दिल्ली के लाल किले से नहीं, बल्कि यहाँ के गाँवों की अखड़ा और मुंडा-मानकी शासन प्रणाली से भी जुड़ती हैं. गणतंत्र का अर्थ ही है जनता का तंत्र, और झारखंड की धरती सदियों से अपनी विशिष्ट सामाजिक संरचना और प्रकृति-सम्मत जीवन पद्धति के माध्यम से इस अवधारणा को जीती आई है. यह राज्य केवल खनिज संपदा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह 32 विभिन्न जनजातियों और सदनों के आपसी मेल-जोल का एक जीवंत दस्तावेज़ है.
Continue readingप्रसिद्ध संगीतकार एआर रहमान के इस कथन पर कि फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव के चलते उनको पहले की तरह काम नहीं मिल रहा, उनको बहुत गाली पड़ रही है
Continue readingपंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 को PESA अधिनियम 1996 के उद्देश्य आदिवासी स्वशासन, ग्राम सभा की सर्वोच्चता और पारंपरिक व्यवस्थाओं की रक्षा को सशक्त करने के लिए लाया गया था. लेकिन नियमावली के कुछ प्रावधान इसके ठीक उलट प्रभाव डालते दिखाई दे रहे हैं.
Continue readingदिल्ली हाई कोर्ट ने प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ 2016 में जारी किए गए आयकर पुनर्मूल्यांकन (reassessment) नोटिस को रद्द कर दिया है.
Continue readingइन चुनाव परिणामों का एक साईड इफेक्ट यह भी है कि मुस्लिम वोटों ने अपने बीच की पार्टियों और उम्मीदवारों को तरजीह दी है. मसलन, मालेगांव महानगर में स्थानीय इस्लाम पार्टी और ओवैसी की पार्टी ने दो तिहाई सीटें हथिया ली है. मुंबई, अमरावती, संभाजीनगर, मुंब्रा में भी ओवैसी ने अच्छी सफलता हासिल की है.
Continue readingअनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से बनाए गए पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) की मूल भावना से झारखंड की PESA नियमावली 2025 भटकती हुई नजर आ रही है. नियमावली के कुछ प्रावधान न केवल ग्राम सभा की शक्तियों को कमजोर करते हैं,
Continue readingपंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 (PESA नियमावली 2025) के नियम 34 (i) और 34 (ii) को लेकर आदिवासी समाज और पारंपरिक ग्राम व्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. इन नियमों के तहत ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में स्थित सभी बाजारों, मेलों और पारंपरिक जतराओं के नियंत्रण और प्रबंधन का अधिकार दिया गया है. लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह अधिकार राजस्व गांव की ग्राम सभा के पास होगा या टोला स्तर पर गठित ग्राम सभाओं के पास.
Continue readingपंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 (PESA नियमावली 2025) के नियम 30 (1)(क) को लेकर आदिवासी क्षेत्रों में नई बहस छिड़ गई है. इस नियम के तहत ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में उपलब्ध लघु खनिज जैसे मिट्टी, पत्थर, रेत और मोरम का उपयोग अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार करने का अधिकार दिया गया है. साथ ही नियम 30 (1) में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में संबंधित ग्राम सभा की पूर्व सहमति के बिना कोई खनन पट्टा जारी नहीं किया जा सकता.
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