जाने को बोला हैं तो चले जाते हैं. थोड़ी आउटिंग भी हो जाएगी...
भूरा हरे झंडे वालों कू डरा धमकाकर यहां ले तो आया है, लेकिन ये बयानबाजी के सिवा यहां कुछ नहीं करेंगे. वैसे अभी तक ये बचे फिर रहे थे कि हम तो खुद अफगानिस्तान के साथ उलझे हैं. हमें तो शाब आप माफ ही करो. लेकिन भूरे की अब जान पर बनी पड़ी है इसलिए उसने अब सारे हरबे आजमा लेने है. इसलिए उसने सड़क पार से वर्दी वाले ओर कोट पेंट वाले दोनों को मरुस्थल बुलवाया और जमकर फटकार लगाई. दिन भर हाथ में पेनी लिए ये टेरीकाट की वर्दी पहने फिरते रहते हो? कुछ काम भी करोगे या.. ? अभी जानते नहीं हो मुझे एक फोन पर तंदूर गर्म करवा दुंगा...
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