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ओपिनियन

व्यंग ... और मुर्गे ने इस्तीफा दे दिया!

सभी स्वामीभक्तों को याद दिलाने के लिए (एसआरआर यानी सर, जी सर, जी, जी के संदर्भ में).  एक पुरानी कहानी जो अचानक दो दिन से फिर से खूब याद की जा रही है. "एक आदमी एक मुर्गा खरीद कर लाया. एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उसने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा "तुम कल से बांग नहीं दोगे, नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूंगा."

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क्या मोदी रिटायर हो रहे हैं

इस लाल बुझक्कड़ी सुगबुगाहट का कारण शायद यह है कि मोदी सितंबर में 75 साल के हो जाएंगे और मोहन भागवत का सुझाव टाल पाना उनके लिए संभव नही होगा. लेकिन क्या भागवत खुद संघ प्रमुख का पद त्याग देंगे ? आखिर वह भी इसी सितंबर में 75 साल के हो रहे हैं. वह मोदी से एक हफ्ता बड़े हैं.

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फांसी पर लटकने वाले बैंक मैनेजर शिवशंकर मित्रा की पीड़ा को कभी समझ पाएंगे हम !

बैंक के अत्यधिक कार्य दबाव के कारण अपनी जिंदगी खत्म कर रहा हूं. मेरी बैंक से विनती है कि कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए. सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं और अपना 100% देते हैं. मेरी पत्नी और बेटी से माफी मांगता हूं. कृपया मेरी आंखें दान कर दें.

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लोकतंत्र  को मजबूत करने  के लिए गहरी नींव खोदनी पड़ेगी

पंडित जवाहरलाल नेहरू अपनी विख्यात पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखते हैं कि राजनीति और चुनाव की रोजमर्रा की बातें ऐसी है , जिनमें हम हर जरा-जरा से मामलों पर उत्तेजित हो जाते हैं. लेकिन अगर हम हिंदुस्तान के भविष्य की इमारत तैयार करना चाहते हैं, जो मजबूत और खूबसूरत हो, तो हमें गहरी नींव खोदनी पड़ेगी,  क्योंकि आदमी इच्छा के मुताबिक काम कर सकता है.

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मोदी बिहार मेंः मुंबई टू मोतिहारी और गुरुग्राम टू गयाजी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार में थे. बिहार के मोतिहारी में. मौका था हजारों करोड़ की योजनाओं के उदघाटन या शिलान्यास का.

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सवाल बुजुर्गों के स्वाभिमान का !

अभी आप कमा रहे हैं, कुछ सालों में बुजुर्ग हो जाएंगे, इसलिए सवाल आपका ही है. आज के लिए नहीं, आने वाले 10-15 साल बाद का सवाल. परिवार टूट रहा है. जीवन यापन के लिए पलायन की रफ्तार पहले से तेज होती जा रही है. ऐसे में बुजुर्गों के स्वाभिमान का सवाल उठाना जरुरी हो गया है.

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डियर NHAI, जब रांची-टाटा रोड में गड्ढ़े ही गड्‍ढे हैं, तो टोल वसूली किस बात की

रांची से टाटा (जमशेदपुर) जाने वाली सड़क NH-33 जगह-जगह टूट गई है. इतनी कि वाहनों को नुकसान हो रहा है. दुर्घटनाएं हो रही हैं. लेकिन NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का टोल वसूलना पहले की तरह जारी है. बुंडू के पास कार से 60 रुपये और चांडिल के निकट 25 रुपये की टोल वसूली हो रही है.

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खतरनाक है भाषाई वैमनस्य, गरमाई देश की राजनीति

बिहार के एक विकृत मानसिकता वाले तथाकथित पत्रकार और नेता ने पिछले वर्ष भारतीय अखंडता को तोड़ने-मरोड़ने और  भड़काने के उद्देश्य से एक नितांत फर्जी वीडियो बनाया कि बिहार से मजदूरी करने गए  व्यक्तियों के साथ दक्षिण भारत के राज्यों  में  उन्हें अपमानित कर उनके साथ मारपीट की जाती है.

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कंगना रनौत की तारीफ करिये...

सवाल यह है कि कंगना ने क्या गलत कहा. वही कहा, जो अनुभव कर रही हैं और जितनी उनकी समझ है. अगर आलोचना ही करनी है तो भाजपा की करिये, उनको वोट देकर सांसद बनाने वाले मंडी की आम लोगों की करिये, जिन्होंने कंगना रनौत को पार्टी का प्रत्याशी बनाया और जिन्होंने वोट देकर उन्हें संसद पहुंचने का रास्ता दिया.

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विदेश नीति को संभालने की जरूरत है!

यह बात बिल्कुल सच है कि किसी भी जीव के  ईश्वर  प्रदत्त मूल स्वरूप को बदला नहीं जा सकता, लेकिन आज के चिकित्सकीय संसार में अब यह असंभव नहीं रहा . पर, कुछ जीव ऐसे होते हैं जिसके मूल स्वरूप को चाहे हम जितना भी चिकित्सकीय पद्धति से  ठीक कर लें, लेकिन वर्षों की मेहनत के बावजूद इसमें परिवर्तन नहीं आता. अक्षरशः यही हाल पाकिस्तान का है चाहे आजादी के बाद हो या पहले -पता नहीं उसके मन में कितना बैर भारत के प्रति था कि उसने अखंड भारत को  खंड खंड में बांट ही दिया

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ममदानी ‘भरतवंशी’ हैं तो क्या हुआ!

पहली बार एक ‘भरतवंशी’ जोहरान ममदानी दुनिया के सबसे ताकतवर और अमीर देश अमेरिका के प्रमुख शहर न्यूयार्क का मेयर बनने के करीब है. मगर ‘हम भारत के लोग’ शायद आह्लादित नहीं है!

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जेपी पर संघ को प्रतिष्ठित करने का आरोप कितना सही?

आपातकाल के 50वें साल पर भाजपा देश भर में अभियान चला रही है. संपूर्ण क्रांति के जनक जय प्रकाश नारायण (जेपी) पर यह आरोप लगाये जाते हैं कि उन्होंने संघ को प्रतिष्ठित किया. इसमें कितनी सच्चाई है, यह जानने के लिए पढ़ें जेपी आंदोलन में शामिल रहे श्रीनिवास की यह टिप्पणी....

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APCR Report: चुनाव के दौरान नफरती भाषणों में घुसपैठिया, बंगलादेशी, रोहिंगिया, आतंकी, लव जेहाद, जेहादी जैसे शब्दों का इस्तेमाल

चुनावों के दौरान भाजपा नेता और उससे जुड़े संगठन के लोग अपने भाषणों में बेरोक-टोक नफरती बयान देते हैं. इन सबके पीछे मकसद चुनाव में जीत हासिल करना होता है. बहुसंख्यक वोटरों को पहले यह समझाया जाता है कि वह ही सबसे सर्वश्रेष्ठ हैं, फिर उनके मन में एक काल्पनिक डर पैदा किया जाता है, और बताया जाता है कि उनकी हर समस्या के लिए अल्पसंख्यक जिम्मेदार हैं.

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केरल पहुंचकर हटिया एक्सप्रेस हो गई हत्या एक्सप्रेस!

नुवाद करने वाला अंग्रेजी में Hatia हटिया को हत्या पढ़ या समझ ही सकता है और ध्यान न दे, सतर्क न रहे तो मलयालम में उसे कोलापथकम लिखेगा, जिसका मतलब मर्डर यानी हत्या होता है.  ऐसी गलतियों से बचने के तमाम तरीके हैं. सामान्य बुद्धि वाले और कृत्रिम बुद्धि वाले भी. पर दोनों को अनुवाद में माहिर होना सबसे जरूरी है. अगर ऐसी गलतियों से बचना चाहें तो अनुवाद की जांच जरूर करवाइये. पैसे बचाने हैं तो पूरे लेख का न करवायें, महंगे विज्ञापनों, नामों, नारों और स्लोगन का तो करवाये हीं.

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नफरती भाषण देने में राजनीतिज्ञों के साथ न्यायाधीश व पत्रकार भी शामिल

चुने हुए जनप्रतिनिधियों के अलावा दो न्यायाधीशों और एक राज्यपाल ने भी नफरती भाषण दिये हैं. जिन पर नफरत के माहौल को समाप्त करने की जिम्मेवारी है, जब वही नफरती भाषण देने में आगे बढ़ करके हिस्सा ले, तो इसकी गंभीरता और अल्पसंख्यकों के सामने पैदा हुई स्थिति का समझा जा सकता है.

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