धर्म बदलने से ‘जाति’ नहीं बदलती, जाति आधारित प्रताड़ना तो नहीं ही
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को एक अहम फैसला सुनाया है- धर्म परिवर्तन के साथ ही अनुसूचित जाति (दलित) का दर्जा खत्म हो जायेगा. इस फैसले से अपनी विनम्र असहमति दर्ज करना चाहता हूं. असहमति दो आधारों पर है. एक तो यह कि मेरी समझ से बौद्ध, जैन और सिख धर्म हिंदू धर्म से अलग हैं, जबकि इस फैसले से वह अंतर खत्म हो गया है. दूसरे, हिंदू समाज के दलितों की सामाजिक हैसियत धर्म बदलने से नहीं बदलती.
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