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ओपिनियन

ईरान की करेंसी कमजोर हुई, राष्ट्रवाद फेल, जनता सड़क पर

ईरान की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही है. करेंसी रियाल ऐतिहासिक रूप से टूट गयी है. जनता सड़क पर है और इसी के साथ राष्ट्रवाद फेल कर गया. वही राष्ट्रवाद, जो 1979 के इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान के लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था. ईरान में जब भी महंगाई, बेरोजगारी, कमजोर रुपये पर सवाल उठा, सरकार ने धार्मिक कट्टरता और राष्ट्रवाद को हवा दे दी. जनता झूमने लगती थी. वही राष्ट्रवाद अब औंधे मुंह गिरा पड़ा है.

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मन रे गा अब जी राम जी

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) 2025 को मंजूरी दे दी है. इसे अंग्रेजी में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) कहते हैं. इससे इसका संक्षिप्त बीबी जी राम जी हो गया है. इसे महात्मा गांधी नेशनल रुरल इम्पालयमेंट गारंटी एक्ट के स्थान पर लाया गया है जिसे आमतौर पर मनरेगा कहा जाता है. मनरेगा मनमोहन सिंह की सरकार लायी थी. पहले मनरेगा बिना महात्मा गांधी के नरेगा था.

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बलात्कारी सेंगर के समर्थन में उतरी महिलाएं, तर्क सुन माथा पीट लेंगे आप

धर्म और जाति का नशा ऐसा चढ़ा कि भगवा पहनी महिलाएं बलात्कार के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में दिल्ली में सड़क पर उतर आईं. महिलाओं ने सेंगर के पक्ष में नारे लगाये. साथ ही उन महिलाओं से झगड़ती दिखीं, जो सेंगर की सजा निलंबित किये जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं.

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यह सब अब भी नहीं दिख रहा, तो सचमुच आप खतरे में हैं

देश में चल क्या रहा है. कौन खतरे में है? किसे कुछ भी नहीं दिख रहा? यह सवाल आज बहुत सारे लोगों को परेशान कर रहा है. जो हो रहा है, जिसे होने दिया जा रहा है, जिसका महिमामंडन किया जा रहा है, चुप रहकर, सम्मान देकर, वह कितना खतरनाक है,

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क्या बड़े एटॉमिक खतरे की तरफ बढ़ रहा उत्तर प्रदेश

कल्पना करे कि एटॉमिक पावर प्लांट से निकलने वाला गर्म जल और अपशिष्ट रेडियोधर्मी पदार्थ गंगा नदी में बहाए जा रहे हैं. अभी तक यह कल्पना ही है. लेकिन अगले कुछ सालों में यह हकीकत में बदलने जा रहा है, क्योंकि मोदी सरकार ने एटॉमिक एनर्जी का क्षेत्र प्राइवेट कंपनियों के लिए खोल दिया है और उत्तर प्रदेश में इसके लिए आगे आए हैं अडानी जी.

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क्रिसमस पर हिंदूवादी संगठनों का उपद्रव शर्मनाक है

आज क्रिसमस है. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसाई समुदाय के लोगों को क्रिसमस की बधाई दी है. बधाई देने की परंपरा है. निभा दिया. पर, क्या सच में ईसाई समुदाय देश में सुरक्षित महसूस कर रहा होगा? क्या सच में वह स्वतंत्र वातावरण में क्रिसमस पर्व मना रहा होगा? हर किसी के मन में सवाल उठ सकता है-क्रिसमस के दिन यह सवाल क्यों? तो इन घटनाओं पर नजर डालिये.

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अगर कोई ईश्वर है तो वो उन्नाव रेप पीड़िता के लिए तो नहीं है

अगर कोई ईश्वर है तो वो उन्नाव रेप पीड़िता के लिए तो नहीं है. यदि एक बार इस केस की टाइमलाइन देखेंगे तो आप पाएंगे कि ऊपर जो लिखा गया है वो पूरी तरह से सच है. कल उन्नाव रेप केस में उम्र कैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल गई. कोर्ट ने सेंगर की सजा को तब तक के लिए सस्पेंड कर दिया है, जब तक उनकी अपील पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती. दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से नाराज होकर पीड़िता और उसकी मां न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गईं. जिसे रातों रात दिल्ली पुलिस ने हटा दिया.

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किसी को फातिहा पढ़ने लायक नहीं छोड़ने का क्या मतलब है?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा और एक्स पर पोस्ट भी किया है, जो भी अपराधी होगा, बचने नहीं पाएगा... आपको फातिहा पढ़ने के लायक भी नहीं छोड़ेंगे, तब तक ऐसी कार्रवाई हम कर देंगे...

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केरल में भी ऐसा हो सकता है, यह सकते में डाल रहा है

केरल के पलक्कड़ जिले (वालायर के पास) में 17 दिसंबर 2025 को एक दर्दनाक घटना हुई. स्थानीय लोगों की एक भीड़ ने छत्तीसगढ़ के एक प्रवासी मजदूर को चोरी के शक में घेर लिया और बांग्लादेशी घुसपैठिया समझकर बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला. केरल में भी ऐसा हो सकता है, इस ख्याल से मैं सकते में हूं!

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जेल में बैठा कुलदीप सेंगर अट्टहास कर रहा होगा

उन्नाव की बेटी के साथ बलात्कार करने वाला कुलदीप सिंह सेंगर (उन्नाव से भाजपा के पूर्व विधायक) को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है. बलात्कार पीड़िता 23 दिसंबर की रात अपनी मां के साथ दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गई. दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन धरने उठाकर फेंक दिया. उनके हाथों में कागज के पोस्टर थे. जिसमें सवाल था- रेपिस्ट बाहर क्यों? पर उन्हें नहीं पता देश की आवाम कल रात भी सोई हुई थी और आज रात भी वह सो जाएगी. उधर कुलदीप सिंह सेंगर जेल में अट्टहास कर रहा होगा.

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अरावली पर फैसला : यह न्यायिक विवेक नहीं, बल्कि न्यायिक पलायन है

अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय केवल एक न्यायिक आदेश नहीं है, बल्कि यह उस असहज सच्चाई का दस्तावेज है, जहां सरकार की विकास-लालसा और न्यायपालिका की तकनीकी व्याख्या मिलकर पर्यावरण का गला घोंट देती हैं और फिर उसे “संतुलन” का नाम दे दिया जाता है. वस्तुतः यह फैसला संरक्षण की आड़ में विनाश का वैधानिक रास्ता खोलता है.

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भाजपा के "नवीन" प्रयोग का निहितार्थ

इन सब बातों पर चर्चा फिजूल है, क्योंकि होइहिं वही जो मोदी-शाह रचि राखा और ये दोनों महानुभाव किस नेता के किस गुण पर रीझ जायें तथा किस बात पर खीझ जायें, जानना-समझना मुश्किल है. इसलिए अब यह साफ हो गया है कि नितिन नवीन ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. ठीक उसी तरह से जिस तरह नड्डा जी 2019 में अमित शाह के इस्तीफे के बाद कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये थे और फिर अध्यक्ष बना दिये गये.

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हिजाब प्रकरण पर शोर के बीच कुछ भिन्न मत!

पूरा एहसास है कि इस मुद्दे पर मेरी राय से अनेक साथी असहमत होंगे, फिर भी अपनी बात रखने का दुस्साहस कर रहा हूं. मुद्दा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला (मुसलिम) डॉक्टर का ‘हिजाब’ हटाने का है, जो सुर्खियों में है! इस मुद्दे पर गर्मी का एक कारण राजनीतिक भी है.

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जेफरी एपस्टीन फाइल्स, क्यों है प्याले में तूफान!

बहरहाल, यह जेफरी एपस्टीन की फाइल्स 19 दिसंबर को सार्वजनिक की जाएंगी. तब दुनिया को पता चलेगा कि उन 90 हजार फाइलों में कितना बारूद है. उसके विस्फोट की जद में किस देश का कौन नेता, उद्योगपति आता है? फिलहाल तो इंतजार कीजिये.

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LOP होने का मतलब क्या है!

व्हाट इट मीन्स टू बी LOP.  नेता विपक्ष का मतलब क्या है? सदन में खड़ा वह नेता, जिसे बहुमत नहीं मिला? इतना ही? असल में तो अब इसका मतलब यही रह गया है. पर कॉन्स्टिट्यूशन क्या कहता है? कहता है- संसद सुप्रीम है. देश को सरकार नहीं चलाती. राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री नहीं चलाता. संसद चलाती है. संसद का मतलब- लोकसभा+ राज्यसभा+ राष्ट्रपति.

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