"आप" का क्या होगा जनाब-ए-आली
यही हाल जनता दल का हुआ. बोफोर्स कांड के विरोध में पैदा-बना यह दल राजद, जद(यू), जद(एस) आदि में बंट चुका है. संभव है अन्ना आंदोलन से पैदा "आप" की "झाड़ू" भी तिनके-तिनके बिखर जाय. यह पार्टी भी ट्रांजेक्शनल है. इसकी न कोई विचारधारा है, न ध्येय, न मुद्दा. सिर्फ एक व्यक्ति इसे अपने हिसाब से हांक रहा है और व्यक्ति केंद्रित दल या तो खत्म हो जाते हैं या वंशवाद की चपेट में आ जाते हैं. कांग्रेस वंशवादी होते हुए भी बची है तो इस वजह से कि उसकी विचारधारा अभी पूरी तरह सूखी नहीं है. लेकिन "आप" का क्या होगा जनाब-ए-आली.
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