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किसी को फातिहा पढ़ने लायक नहीं छोड़ने का क्या मतलब है?

Sanjaya Kumar Singh


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा और एक्स पर पोस्ट भी किया है, जो भी अपराधी होगा, बचने नहीं पाएगा... आपको फातिहा पढ़ने के लायक भी नहीं छोड़ेंगे, तब तक ऐसी कार्रवाई हम कर देंगे... ठीक है, अच्छी बात है. कार्रवाई होनी भी चाहिए निष्पक्ष होनी चाहिए. पर जो हो रहा है वह दिख रहा है. 

 

कुलदीप सेंगर को राहत मिल सकती है, अखलाक की हत्या के आरोपियों को राहत दिलाने की कोशिश हो सकती है, लेकिन नेशनल हेराल्ड मामले में नहीं मिलेगी, नहीं देने दी जाएगी. अगर मामला केंद्र व राज्य सरकार का हो भी तो बहु प्रचारित डबल इंजन वाली सरकारों का है. 

 

जहां तक नकली कफ सिरप मामले में कार्रवाई की बात है तो अभी तक गिरफ्तार, आरोपी या शामिल लोगों के नाम है - शुभम जयसवाल, आलोक सिंह, अमित सिंह टाटा, विभोर राणा, विष्णु अग्रवाल, विशाल सिंह आदि. इनके खिलाफ ऐसी क्या और कौन सी कार्रवाई की जाएगी कि उत्तर प्रदेश में विपक्ष को (या किसी को) फातिहा पढ़ने की जरूरत होगी और उस लायक भी नहीं छोड़ने की बात की जा रही है. यह सरकार या मुख्यमंत्री का कहना नहीं होता तो अलग बात थी पर...

 

जहां तक नकली दवा बनाने-बेचने और उसपर कार्रवाई की बात है तो नकली कफ सिरप का मामला दिसंबर 2022 में सामने आया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पश्चिम अफ्रीकी देश गाम्बिया में 66 बच्चों की किडनी फेल होने और मृत्यु के लिए भारत में बने कफ सिरप को जिम्मेदार ठहराया था. डब्ल्यूएचओ के प्रयोगशाला विश्लेषण में पाया गया था कि कफ सिरप में "डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की अस्वीकार्य मात्रा" थी, जो अक्सर औद्योगिक उपयोग के लिए होते हैं. 

 

भारत में क्या कार्रवाई हुई राम जानें


भारत में क्या कार्रवाई हुई राम जानें. घटिया कफ सिरप से विदेशों में सैकड़ों मौतों के बाद, अमेरिकी एफडीए ने स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों के दर्जनों निर्माताओं द्वारा अपनाई जा रही ढीली परीक्षण प्रक्रिया पर कार्रवाई की. 


नियामक एजेंसियों को चेतावनी दी गई और समाचार एजेंसी रायटर्स ने इनकी समीक्षा से यह खबर सितंबर 2023 में दी थी. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने उस वर्ष कम से कम 28 कंपनियों को फटकार लगाई थी. इनमें भारत की कंपनी भी थी.

 

कहने की जरूरत नहीं है कि भारत में कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी. यहां बनी दवा से विदेश में मौत - बड़ी बदनामी का कारण थी. धंधा और निर्यात का भी मामला था. इसके बाद कार्रवाई नहीं करने वालों को राहुल गांधी को विदेश में कुछ कह देने भर से बदनामी की चिंता होती है. लेकिन नकली दवाइयों को लेकर चिंता होती तो शायद मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत नहीं होती. 

 

छिंदवाड़ा में 9 अक्तूबर 2025 को कम से कम 20 बच्चों की मौत की खबर थी. क्या कार्रवाई हुई पता नहीं लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा था कि उत्तर प्रदेश में कोडीन से कोई मौत नहीं हुई. 

 

अब कई एफआईआर और गिरफ्तारियां हैं. कार्रवाई हो रही है और मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि (विपक्ष को) फातिहा पढ़ने लायक भी नहीं छोड़ेंगे. मुद्दा है कि गिरफ्तार लोगों, आरोपियों और अभियुक्तों में जब फातिहा पढ़ने वाले हैं ही नहीं तो किसी को फातिहा पढ़ने लायक नहीं छोड़ने का क्या मतलब है ? और वैसे भी जब इस नकली दवा का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है तो भारत सरकार कहां है? कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है? या उसकी चुप्पी और पहले से पता होने के बावजूद भारत में मौतों से देश की बदनामी नहीं हो रही है?

 

डिस्क्लेमरः लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह टिप्पणी उनके फेसबुक वॉल से ली गई हैं.

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