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जेफरी एपस्टीन फाइल्स, क्यों है प्याले में तूफान!

कल, यानी 19 दिसंबर (शुक्रवार) को जेफरी एपस्टीन की फाइलें सार्वजनिक होनी है. जेफरी एपस्टीन अमेरिका का एक फाइनेंशियर था. वह नाबालिगों के यौन हिंसा और दुनिया भर में प्रभावशाली लोगों को नाबालिग उपलब्ध कराने को लेकर कुख्यात रहा है. अमेरिका के एक जेल में 2019 में संदेहास्पद परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई. अमेरिकी संसद की ओवरसाइट कमेटी ने उसके ई-मेल समेत अन्य डिजिटल माध्यमों के 90 हजार से अधिक दस्तावेजों को जारी करने की अनुमति दी है और 19 दिसंबर को फाइल्स सार्वजनिक होंगी.

 

एपस्टीन की फाइल्स सार्वजनिक होने से पहले दुनिया भर में राजनेताओं, कॉरपोरेट और ब्यूरोक्रेट्स के बीच एक तरह से हड़कंप मचा हुआ है. दुनिया (भारत के भी) के बड़े नेताओं, कॉरपोरेट्स व ब्यूरोक्रेट्स के नामों को लेकर अटकलें लगायी जा रही हैं. अभी तक जो बातें सार्वजनिक हुई हैं, उसमें भारत सरकार के मंत्री हरदीप पुरी, उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम चर्चा में है. 

 

भारत में एपस्टीन फाइल्स को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि इनमें कथित तौर पर देश के सबसे पावरफुल पद पर बैठे नेता, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अनिल अंबानी जैसे नामों का जिक्र होने की अफवाह है. इन कारणों से यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि फाइलें सार्वजनिक होने के साथ कई देशों की राजनीति अस्थिर हो सकती है.

 

सबसे पहले हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि एपस्टीन फाइल्स से भारत का संबंध क्या है? नवंबर 2025 में जारी दस्तावेजों से पता चला है कि एपस्टीन ने 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार स्टीव को भारत की यात्रा पर मोदी से मिलने के लिए दबाव डाला था. एक ईमेल में लिखा है - "मोदी ऑन बोर्ड".  लोग इसका अर्थ यह निकाल रहे हैं कि एपस्टीन कोई बड़ा राजनीतिक या व्यावसायिक डील के बारे में बात कर रहा था. स्टीव भारत आए थे, लेकिन किस बात को लेकर उनकी किसके साथ बैठक हुई, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है.

 

अब तक सार्वजनिक हुए दस्तावेज के मुताबिक, एपस्टीन की असिस्टेंट लेस्ली ग्रॉफ के ई-मेल्स में हरदीप सिंह पुरी से मिलने की अपॉइंटमेंट्स का जिक्र है. अनिल अंबानी का नाम भी दस्तावेज में उभरा है. शायद कोई बिजनेस लिंक की वजह से. हरदीप सिंह पुरी और अनिल अंबानी के साथ एपस्टीन का कनेक्शन भारत के एलिट क्लास से उसके संबंधों को जोड़ता है. एपस्टीन, जो कि एक ट्रैफिकिंग का आरोपी था, उसके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह दुनिया भर के प्रभावशाली लोगों को हनी ट्रैप में फंसाता था.

 

एपस्टीन फाइल को लेकर भारत में सवाल (प्याले में तूफान) उठने की पहली वजह राजनीतिक टकराव है. भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है. जहां कांग्रेस ने इस मामले में हरदीप सिंह पुरी से स्पष्टीकरण मांगा है. वहीं भाजपा ने इसे विपक्ष की साजिश बताया है. इस बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने यह कह कर सनसनी फैला दी है कि 19 दिसंबर तक भारत को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है, जो मराठी हो सकता है. उन्होंने एपस्टीन फाइल्स में स्टिंग ऑपरेशंस का भी जिक्र किया है, जिसमें विश्व नेताओं के नाम हैं. चव्हाण का दावा है कि फाइल्स में तीन भारतीय सांसदों के नाम हैं, जो सोशल मीडिया पर देवेंद्र फडणवीस या नितिन गडकरी जैसे नामों से जुड़ रहे हैं. भाजपा इसे फर्जी खबर बता रही है.

 

प्याले में तूफान की दूसरी बड़ी वजह सोशल मीडिया है. सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर तरह-तरह के पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिसमें देश के बड़े व प्रभावशाली नेताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं. भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के एक पोस्ट का स्क्रिनशॉट भी वायरल है, जिसे उन्होंने पोस्ट करने के कुछ देर बाद हटा लिया था. मोदी सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, इस कारण संदेह बढ़ता जा रहा है.

 

प्याले में तूफान की तीसरी वजह भारत पर विदेश का प्रभाव और भारत के प्रभावशाली लोगों का इससे संबंध है. भारतीय मूल के कश पटेल जो अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के डायरेक्टर हैं, उन पर यह आरोप लगा है कि उन्होंने एपस्टीन फाइल्स में छेड़छाड़ की है. वहीं, भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट रो खन्ना ने फाइल्स जारी करने में बड़ी भूमिका निभाई है. यह दोनों कनेक्शन भारत को अमेरिकी राजनीति से जोड़ता है.  इन कारणों से यह सवाल उठ रहा है कि क्या एपस्टिन भारत के राजनीतिक सत्ता और कॉरपोरेट को प्रभावित करता था. क्या एक सेक्स ट्रैफिकिंग का आरोपी भारत के राजनेताओं व कॉरपोरेट के लिए बिजनेस मीटिंग तय कराता था.

 

बहरहाल, यह जेफरी एपस्टीन की फाइल्स 19 दिसंबर को सार्वजनिक की जाएंगी. तब दुनिया को पता चलेगा कि उन 90 हजार फाइलों में कितना बारूद है. उसके विस्फोट की जद में किस देश का कौन नेता, उद्योगपति आता है? फिलहाल तो इंतजार कीजिये.

 

 

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