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ओपिनियन

'काली दाल' की जांच कराने से क्यों हिचक रही सरकार

देश के राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) का निर्णय लिया, जिसकी शुरुआत बिहार से की गई. कारण था कि कुछ महीने बाद वहां विधानसभा का चुनाव होने वाला है. चूंकि इसमें कोई ऐसी विशेष बात नहीं थी, इसलिए किसी को इसमें कुछ आपत्तिजनक भी नहीं लगा था.

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मीडिया को लेकर नेपाल से जो वीडियोज आ रहे हैं, गलत है, पर जिम्मेदार हम ही हैं

मीडियाकर्मियों से बदसलूकी, मारपीट, सरकारी सिस्टम का इस्तेमाल कर जेल भेजने की घटनाएं भारत में भी कम नहीं होती. पर, नेपाल जैसी शायद नहीं. इन हालातों के लिए जिम्मेदार कौन हैं. मुझे यह मानने में कतई झिझक नहीं है कि इसके लिए जिम्मेदार हम पत्रकार और मीडिया संस्थान के मालिकान व प्रबंधन ही हैं.

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तस्वीर नेपाली युवक की-वर्दी रूसी फौज की

भारत मे अग्निवीर लागू है. 10 साल के भीतर दुनिया के कांफ्लिक्ट जोन में हमारे बच्चे लड़ते दिखेंगे. ट्रेंड और बेरोजगार वे दुनिया को असुरक्षित बनाने में योगदान देंगे. फटेहाल घरवालों को रेमिटेंस (वेतन के रुप में मिली नकद राशि) भेजेंगे. तब, तस्वीर आपके बेटे की होगी और वर्दी विदेशी फौज की.

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नेपाल का संदेशः टैक्स हमारा, रईसी तुम्हारी

श्रीलंका के बाद बंग्लादेश. बंग्लादेश के बाद नेपाल. नेपाल के बाद फ्रांस. हर जगह एक ही जैसा नारा- टैक्स हमारा, रईसी तुम्हारी. एक ही जैसी समस्या- नेपोटिज्म, असमानता, बेरोजगारों की फौज. यह सब नहीं चलेगा. सब जगह एक ही जैसे सवाल. एक ही जैसा गुस्सा- नेताओं के खिलाफ, उद्योगपतियों के खिलाफ. आखिर पूरी दुनिया में इस तरह का आक्रोश क्यों भड़क रहा है?

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मामला मजहबी नहीं, निखालिस तेजाबी है

पिछले कुछ वर्षों से यह नारा बेहद अफसोसनाक तरीके से सिर्फ उकसावे के मकसद से जहां-तहां लगाया जा रहा है. लेकिन इस्लाम के आलिमों ने इसकी पुरजोर मजम्मल करना मुनासिब नहीं समझा. नतीजा यह हुआ छह सितंबर को भोपाल में गणेश प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा पर पथराव हो गया. कुछ प्रतिमाएं खंडित हो गईं और कुछ श्रद्धालु चोटिल हो गए. कहा जा सकता है कि शासन प्रशासन की काहिली या नामुश्तैदी का नतीजा है. लेकिन क्या हमारे पर्व-त्योहार संगीनों के साये में ही संपन्न होंगे?

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रांची की स्वास्थ्य सेवाएं खुद ICU में, सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत

झारखंड की राजधानी रांची में बीते दो वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती रही है. सरकारी और निजी अस्पतालों की लापरवाही, उपकरणों की खराबी और एंबुलेंस सेवाओं के संकट ने मरीजों की जान के लिए खतरा पैदा कर दी है. अदालत और सरकार के आदेशों के बावजूद स्थिति में सुधार की जगह हालात बिगड़ते जा रहे हैं.

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युद्ध लड़ा नहीं, थोपा जाता है

युद्ध लड़ा नहीं जाता थोपा जाता है. भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में हमेशा युद्ध थोपा ही गया है. इतिहास गवाह है कि विश्व के कई बलशाली देशों द्वारा कमजोर देशों पर आज तक युद्ध थोपा ही गया है

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बिहार में उबाल, गुजरात में शांति!

एनडीए के लोग, खुद नीतीश कुमार जिस तरह लोगों को ‘जंगल राज’ की वापसी का डर दिखा रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि उनको  ‘सुशासन’ के नाम पर वोट मिलने का बहुत भरोसा नहीं है!

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ईद मिलाद उन नबी पर विशेष :  पैगम्बर मोहम्मद (स.) और महिला स्वास्थ्य की शिक्षा

पैगम्बर मोहम्मद (स.) ने अपने जीवनकाल में महिलाओं के अधिकारों और उनके स्वास्थ्य की देखभाल को विशेष महत्व दिया. उस समय जब समाज में महिलाओं को अक्सर उपेक्षित किया जाता था. पैगम्बर (स.) ने स्पष्ट रूप से बताया कि महिला भी पुरुष की तरह सम्मान और देखभाल की अधिकारी है. उन्होंने महिलाओं के लिए स्वच्छता, पोषण, मानसिक शांति और सुरक्षित मातृत्व पर जोर दिया.

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नये जमाने का शहर है जरा फासले से मिला करो

अलबत्ता भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में कोई कारगर पहल नहीं हो पाई. जिनपिंग ने कहा कि सीमा विवाद भूलकर हमें आपसी रिश्ते मजबूत करने चाहिए. लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि सीमा विवाद जारी रहने के कारण आपसी रिश्ते कभी भी हिचकोले खा सकते हैं. बावजूद इसके ऐसा लग रहा है कि इस सम्मेलन से विश्व पटल पर नये समीकरण बनेंगे और अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय देशों पर दबाव बढ़ेगा.

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ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हमले : हमारे लिए सबक और कुछ सीखने का वक्त !

पिछले कुछ सालों में हमारे यहां भी एक बड़ा समूह आक्रामक तरीके से दूसरे देश के लोगों के खिलाफ बोल रहे हैं. धर्म के नाम पर हमले बढ़े हैं. कई बार सरकार व सरकार के लोग ऐसे लोगों के पक्ष में खड़े दिखते हैं. प्रधानमंत्री समेत अन्य नेता घुसपैठिया शब्द का इस्तेमाल करते हैं. दोनों देशों में ऐसे लोग यह मानते हैं कि बाहर से आये लोग ही उनकी हर समस्या के लिए जिम्मेदार हैं. बाहर से आये लोग उनके संसाधनों पर बोझ बन गए हैं. ऐसा सोचने वालों की संख्या पूरी दुनिया में बढ़ रही है. कई देशों की सरकारें ऐसी घटनाओं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है, जबकि कुछ देशों में इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है.

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महिलाओं को धारण करना होगा 'दुर्गा' का स्वरूप

आज आदर के तमाम केंद्र पर राजनीतिक लोग ही काबिज हो गए हैं. जबतक राजनीतिज्ञों को आदर के केंद्रों से उतारकर जमीन पर खड़ा नहीं किया जाएगा, तब तक भारत में ईमानदारी की कोई गुंजाइश नहीं बन सकती है.

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ऑपरेशन सिंदूर के तीन माहः पाक से क्रिकेट, तुर्किए से व्यापारिक रिश्ते बहाल, चीन के साथ तो..

जम्मू-कश्मीर के गलवान घाटी में पर्यटकों की हत्या के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था. ऑपरेशन सिंदूर. फिर सीजफायर. ऑपरेशन सिंदूर के वक्त और उसके बाद क्या-क्या कहा गया था और आज क्या किया जा रहा है, इसे जानना दिलचस्प होगा.

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50 प्रतिशत टैरिफः ब्राजिल ऐसे लड़ रहा और भारत में स्टीकर चिपकाओ अभियान

ब्राजील जहां अपने लोगों, व्यापारियों के साथ खड़ा है, अमेरिका से लड़ रहा है, वहीं हमारे यहां अभी तक ना ही अमेरिका से लड़ पा रहे हैं और ना ही कारोबारियों को राहत देने की कोई योजना सामने आयी है. हम कर क्या रहे हैं? हम दुकानों पर स्टीकर चिपकाने का अभियान चला रहे हैं. जिसमें लिखा है- हम स्वदेशी सामान बेचते हैं.

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वह विद्रोह के लिए उकसाना नहीं था, तो राहुल कैसे अराजकता फैला रहे हैं !

वह विद्रोह के लिए उकसाना नहीं था. मगर राहुल और विपक्षी दल विदेशी ताकतों से मिल कर अराजकता फैला रहे हैं! 12 जून, 1975. इलाहाबाद हाइकोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. 1971 में हुए लोकसभा चुनाव (रायबरेली) में विजयी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी धांधली का दोषी मान कर उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी.

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