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ओपिनियन

ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हमले : हमारे लिए सबक और कुछ सीखने का वक्त !

पिछले कुछ सालों में हमारे यहां भी एक बड़ा समूह आक्रामक तरीके से दूसरे देश के लोगों के खिलाफ बोल रहे हैं. धर्म के नाम पर हमले बढ़े हैं. कई बार सरकार व सरकार के लोग ऐसे लोगों के पक्ष में खड़े दिखते हैं. प्रधानमंत्री समेत अन्य नेता घुसपैठिया शब्द का इस्तेमाल करते हैं. दोनों देशों में ऐसे लोग यह मानते हैं कि बाहर से आये लोग ही उनकी हर समस्या के लिए जिम्मेदार हैं. बाहर से आये लोग उनके संसाधनों पर बोझ बन गए हैं. ऐसा सोचने वालों की संख्या पूरी दुनिया में बढ़ रही है. कई देशों की सरकारें ऐसी घटनाओं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है, जबकि कुछ देशों में इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है.

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महिलाओं को धारण करना होगा 'दुर्गा' का स्वरूप

आज आदर के तमाम केंद्र पर राजनीतिक लोग ही काबिज हो गए हैं. जबतक राजनीतिज्ञों को आदर के केंद्रों से उतारकर जमीन पर खड़ा नहीं किया जाएगा, तब तक भारत में ईमानदारी की कोई गुंजाइश नहीं बन सकती है.

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ऑपरेशन सिंदूर के तीन माहः पाक से क्रिकेट, तुर्किए से व्यापारिक रिश्ते बहाल, चीन के साथ तो..

जम्मू-कश्मीर के गलवान घाटी में पर्यटकों की हत्या के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था. ऑपरेशन सिंदूर. फिर सीजफायर. ऑपरेशन सिंदूर के वक्त और उसके बाद क्या-क्या कहा गया था और आज क्या किया जा रहा है, इसे जानना दिलचस्प होगा.

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50 प्रतिशत टैरिफः ब्राजिल ऐसे लड़ रहा और भारत में स्टीकर चिपकाओ अभियान

ब्राजील जहां अपने लोगों, व्यापारियों के साथ खड़ा है, अमेरिका से लड़ रहा है, वहीं हमारे यहां अभी तक ना ही अमेरिका से लड़ पा रहे हैं और ना ही कारोबारियों को राहत देने की कोई योजना सामने आयी है. हम कर क्या रहे हैं? हम दुकानों पर स्टीकर चिपकाने का अभियान चला रहे हैं. जिसमें लिखा है- हम स्वदेशी सामान बेचते हैं.

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वह विद्रोह के लिए उकसाना नहीं था, तो राहुल कैसे अराजकता फैला रहे हैं !

वह विद्रोह के लिए उकसाना नहीं था. मगर राहुल और विपक्षी दल विदेशी ताकतों से मिल कर अराजकता फैला रहे हैं! 12 जून, 1975. इलाहाबाद हाइकोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. 1971 में हुए लोकसभा चुनाव (रायबरेली) में विजयी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी धांधली का दोषी मान कर उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी.

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प्रश्न हिमालय का नहीं, शिव के भाल का है

गंभीर आपराधिक मामलों में महीने भर जेल में रहने वाले मुख्य मंत्रियों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री की बर्खास्तगी का प्रस्तावित कानून बेमतलब विवाद की जद में आ गया है. इसके विरोधियों की एक मात्र दलील यह है कि इसका दुरुपयोग होगा. सरकारें अपनी एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल कर अपने विरोधियों को ऐसी धाराओं में जेल भेजवा देंगी जिनमें आसानी से जमानत नहीं मिलेगी.

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सलवा जुडूम पर अमित शाह और भाजपा का स्टैंड क्या है?

यदि भाजपा को तब लगता था कि फैसला गलत है, तो उसे उसके खिलाफ याचिका दायर करनी चाहिए थी. अब चूंकि वह फैसला देने वाली बेंच में रहे जस्टिस रेड्डी उप राष्ट्रपति पद के विपक्ष के उम्मीदवार है, तो उस फैसले के आधार पर उनके खिलाफ अभियान चलाना ओछापन ही कहलायेगा!

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खूबसूरत तसवीर-नाकाफी तदबीर

बिहार बीजेपी को किसी कीमत पर नही चाहता. लेकिन विकल्पों पर सशंकित है. इस बार के परिणाम केवल बिहार नहीं, देश बदल सकते हैं. और यह बात केंद्र में बैठे को मालूम है. कोई भी कानूनी, गैर कानूनी हथकंडे से बाज नहीं आएंगे. सत्ता, अफसर, आयोग सब जाल बिछाए बैठे हैं.

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दरकने लगा है रेत पर टिका सियासी महल

सात सितंबर 2022 को दक्षिण भारत के कन्याकुमारी से शुरू की गई 'भारत जोड़ो पदयात्रा' का समापन 136 दिन के बाद 14 राज्यों का कामयाब सफर पूरा करने के साथ श्रीनगर में संपन्न हुआ था.

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मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों व 31 दिन और अमित शाह

तो आज यह किस्सा क्यो याद आया?  इसलिए, कि मुख्यमंत्रियों पर मुकदमे लादने और गिरफ्तार कराकर, बिना जमानत, कई माह जेल में रखने की ताकत तो गृहमंत्री के हाथ थी. लेकिन पद से हटाने की नहीं.  आज उन्होंने आनन फानन में एक बिल ड्राफ्ट करके, सदन के पटल पर धर दिया है. अब किसी भी सरकार या सीएम को मिटाने की ताकत, उनकी मुट्ठी में आ जायेगी.  चूंकि एजेंसियां उनके हाथ मे हैं. तो ये अमित शाह की निजी ताकत होगी.

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कमाई की रईसों ने, भुगतेंगे अन्नदाता किसान

पिछले 10-11 सालों में हम अमेरिका के करीब आते चले गये. खास कर डोनाल्ड ट्रंप के मामले में पीएम मोदी और भाजपा व सरकार के समर्थक कुछ ज्यादा ही उत्साहित रहे. हाउडी ट्रंप से लेकर अबकी बार-ट्रंप सरकार तक. अब वही अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप भारी पड़ रहे हैं. इतना कि हम चीन से भी हर तरह की दोस्ती करने को उतावले नजर आ रहे हैं. जिसने दो माह पहले पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में दुश्मन का साथ दिया था.

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नैतिकता को जब कानून बना देते हैं तो वह दुरुपयोग का हथियार बन जाता है

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद में एक संविधान का 130वां संशोधन विधेयक पेश किया. इस विधेयक में कहा गया है कि अगर पीएम, सीएम और मंत्रियों को गिरफ्तार किया जाता है

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क्या भारत ने अमेरिका के लिए कृषि बाजार खोलना शुरू कर दिया है !

नरेंद्र मोदी ने जो बात ट्रंप सरकार द्वारा टैरिफ लगाने के बाद कही, वही बात 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से भी दोहराया. फिर ऐसा क्या हुआ कि तीन दिन बाद ही एक आदेश जारी कर कपास के आयात पर टैरिफ को खत्म कर दिया गया. इस सवाल का जवाब सरकार ने नहीं दिया है.

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अब हवाएं ही करेंगी रोशनी का फैसला

इस समय राहुल गांधी उत्साह से लबरेज हैं. उन्हें लग रहा है या उन्हें समझा दिया गया है कि समस्याओं की बारिश में नरेंद्र मोदी के विश्वास की भीत पोपली हो गयी है. यह एक जोरदार धक्के से गिर जाएगी. इसलिए राहुल बेंगलुरु की एक लोकसभा सीट के एक विधानसभा सिग्मेंट की कुछ मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाकर मोदी से इस्तीफा मांग रहे हैं

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पीएम का रिसर्चर व साइंटिस्ट से आह्वान और कथनी-करनी में फर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से कहा कि भारत के रिसर्चरों और साइंटिस्ट को भारत में जेट इंजन विकसित करने पर काम करना चाहिए.

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