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50 प्रतिशत टैरिफः ब्राजिल ऐसे लड़ रहा और भारत में स्टीकर चिपकाओ अभियान

ब्राजील जहां अपने लोगों, व्यापारियों के साथ खड़ा है, अमेरिका से लड़ रहा है, वहीं हमारे यहां अभी तक ना ही अमेरिका से लड़ पा रहे हैं और ना ही कारोबारियों को राहत देने की कोई योजना सामने आयी है. हम कर क्या रहे हैं? हम दुकानों पर स्टीकर चिपकाने का अभियान चला रहे हैं. जिसमें लिखा है- हम स्वदेशी सामान बेचते हैं.
 

अमेरिका ने भारत की तरह ही ब्राजील पर भी 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है. दोनों देश अपने-अपने तरह से टैरिफ लगाने की वजह से उत्पन्न समस्या व नुकसान से निपटने में लगे हैं. हमने जब जानकारियां जुटायीं, तो दिलचस्प तथ्य सामने आयें. ब्राजील जहां अपने लोगों, व्यापारियों के साथ खड़ा है, अमेरिका से लड़ रहा है, वहीं हमारे यहां अभी तक ना ही अमेरिका से लड़ पा रहे हैं और ना ही कारोबारियों को राहत देने की कोई योजना सामने आयी है. हम कर क्या रहे हैं? हम दुकानों पर स्टीकर चिपकाने का अभियान चला रहे हैं. जिसमें लिखा है- हम स्वदेशी सामान बेचते हैं.

 

ब्राजील सरकार के कदम भारत सरकार के कदम
ब्राजील सरकार ने "संप्रभु ब्राजील" नाम से योजना शुरु की है. इस योजना के तहत 5.5 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता दी जा रही है.  भारत सरकार 20 हजार करोड़ रुपये के पैकेज का निर्यात प्रोत्साहन मिशन शुरु करने की तैयारी कर रही है. 
टैरिफ से प्रभावित कंपनियों को 30 अरब रियाल (वहां की करेंसी) का कर्ज पैकेज दिया जा रहा है. छोटे और मझोले कारोबारियों का 2026 तक टैक्स माफ कर दिया गया है. ⁠उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने जीएसटी में संशोधन की घोषणा की है. 
एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के जो ऑर्डर रद्द हुए हैं, उसे बीमा कवरेज देने की शुरुआत की गई है.  ⁠निर्यात करने वाली कंपनियों को सस्ता कर्ज देने, टैक्स में छूट व सब्सिडी देने पर विचार किया जा रहा है.
एक्सपोर्ट होने वाले सामानों को सरकार खुद खरीद रही है और उन सामानों को ब्राजील में चल रही सरकारी योजनाओं में शामिल कर लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है.  ⁠दूसरे देशों में वैकल्पिक बाजार की तालाश किया जा रहा है. इसके लिए अलग-अलग देशों से बात की जा रही है.
ब्राजील सरकार ने 50 प्रतिशत टैरिफ के खिलाफ अमेरिका में मुकदम भी दर्ज कराने की बात की है. ⁠प्रधानमंत्री ने अपील की है कि लोग देशी उत्पाद ही खरीदे. भाजपा स्टीकर साटने का अभियान चला रही है. दुकानों के बाहर "हम स्वदेशी ही बेचते हैं" का स्टीकर.

 


टैरिफ की मार झेल रहे दोनों देश की सरकारों द्वारा उठाये गये कदमों से यह स्पष्ट होता है कि हमारे यहां जो किया जा रहा है, वह नाकाफी है. हमारी सरकार राष्ट्रवाद की भावना का उबाल लाकर इस संकट से ध्यान भटकाने भर की कोशिश में लग गई है. जबकि 50 प्रतिशत टैरिफ से पीड़ित एक दूसरा देश अपने व्यापारियों की मदद कर रही है. लोगों तक सस्ता सामान पहुंचा रही है. ताकि खपत बढ़ायी जा सके. कंपनियों को उत्पादन कम ना करना पड़े, क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ेगी.

 

टैरिफ के अलावा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व उनकी सरकार के लोगों द्वारा हर दिन भारत के खिलाफ बयानबाजी की जा रही है. अब यहां तक कहा जा रहा है कि यूक्रेन में युद्ध के लिए भारत जिम्मेदार है. ट्रंप पहले कह चुके हैं भारत के अमीर रुस से तेल खरीद कर उसे यूरोप में बेच कर बहुत सारा मुनाफा कमा रहे हैं. इन सबके बीच भारत सरकार चुप है. क्यों चुप है, इसका जवाब किसी के पास नहीं. 

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